सांस्कृतिक कुम्भ कला उत्सव : दिवस-5 : 21 जनवरी, 2019

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प्रयागराज कुम्भ २०१९ वर्तमान में आस्था और धर्म के केंद्र बिंदु की भूमिका में है और तब तक रहेगा जब तक कुम्भ मेला चलेगा.

उत्तरप्रदेश संस्कृति विभाग ने सांस्कृतिक गतिविधियों को जो मंच प्रदान किया है वह सराहनीय है. कुम्भ परिसर के अंतर्गत इन पांचों मंचों पर प्रति दिन सांस्कृतिक गतिविधियां चल रही हैं.

मेला क्षेत्र के सेक्टर ४ स्थित अक्षयवट कला मंच पर आज दर्शकों ने संगीत का आनंद लिया. आप कोलकाता की कलाकार इंद्राणी मुखर्जी ने उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया. उनके उपरान्त मंच भक्ति के रंगों से सराबोर हुआ जब दिल्ली के श्रीराम भारती कला केंद्र ने रामलीला का मंचन किया.

सेक्टर ६ स्थित भारद्वाज मंच पर लखनऊ की गायिका डॉक्टर मालविका के भजन से कार्यक्रम की प्रारम्भि हुई. डॉक्टर मालविका जी ने भजन की शुरुआत मां गंगा भजन ‘चला हो सकी गंगा नहाए’ से किया। तत्पश्चात उन्होंने पचरा गायन के माध्यम से मां जगदम्बा की स्तुति प्रस्तुत की. उनके बाद दर्शकों ने तालियां बजा कर झांसी की बाल कलाकार बेबी इमरान राई का स्वागत किया. बेबी इमरान राय ने लोकनृत्य प्रस्तुत किया. उनके बाद वारणसी की लोक-गायिका गीतांजलि मौर्य के भोजपुरी गीतों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया. अंत में सबसे गंभीर प्रस्तुति के तौर पर बिरहा आई जिसका गायन गोरखपुर के लोक गायक रामसिंह यादव ने किया.

सेक्टर १७ के यमुना मंच पर आजमगढ़ के कलाकार मुन्ना लाल द्वारा धोबिया लोकनृत्य की सुन्दर प्रस्तुति दर्शकों ने देखी. इस नृत्य के उपरान्त असम के कलाकार हेमचन्द्र गोस्वामी ने लोकनाट्य शैली – अंकिया नाट का मंचन किया. गोरखपुर के लोक-कलाकार राकेश श्रीवास्तव का लोक-गीत उसके बाद सूना गया जिसमें सुंदरता की सृष्टि तब हुई जब उसके साथ नृत्य भी प्रारम्भ हो गया. इसके बाद विशेष प्रस्तुति के तौर पर दर्शकों के लिए इस मंच पर असम के उत्तर कमलाबाड़ी संत शंकरदेव कृषि संघ रासलीला ले कर आये. रासलीला की इस प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया.

मेला क्षेत्र के सेक्टर 13 स्थित सरस्वती मंच पर लखनऊ के कलाकारों ने नाटक का मंचन कर दर्शकों का मनोरंजन किया. इस नाटक के निर्देशक राकेश अस्थाना थे जिनके बाद लखनऊ के ही कलाकार गोपाल सिन्हा द्वारा निर्देशित एक और नाटक दर्शकों के लिए परोसा गया.

सेक्टर 19 स्थित ललित कला अकादमी के प्रदर्शनी मंच पर विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों ने अपने अपने राज्यों के पारम्परिक ग्रामीण कलाओं का प्रदर्शन किया. यहां केरल से आए कलाकारों के समूह ने केरल की प्रसिद्ध कन्यारकली गीत-नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी जिसे भास्करन , प्रेम, बाला सुब्रम्णयम,रवि ,सिवान , दीपेश , श्रीजेश आदि कलाकारों ने प्रस्तुत किया. इसके पहले आंध्र प्रदेश के कलाकारों ने ‘गरागुलु ‘ , तेलंगाना के कलाकारों ने ‘गुसाडी ‘ और कर्नाटक के कलाकारों ने ‘बिसुकमसेला’ आदि ग्रामीण नृत्यों का प्रभावकारी जीवंत मंचन किया. न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये प्रयागराज से पारिजात त्रिपाठी

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