सांस्कृतिक कुम्भ कला उत्सव : दिवस-2 : 18 जनवरी, 2019

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प्रयागराज में इस बार कुम्भ को सांस्कृतिक कुम्भ की संज्ञा दी गई है. और यह संज्ञा इस बार अक्षरशः सत्य सिद्ध हुई है. उत्तरप्रदेश सरकार के विशेष परिश्रम से कुम्भ परिसर में संस्कृति को कुम्भ में आये श्रद्धालुओं के समक्ष विभिन्न कलात्मक रूपों में प्रस्तुत किया जा रहा है.

कुम्भ में इस उद्देश्य से निर्मित पांच विशेष कला मंचों में आज दूसरे दिन भी प्रस्तुतियां देखी गईं जिन्हें दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त हो रही है. बात करें गंगा मंच की तो जगदलपुर से आये हुए जन-संगीत के वाद्य-वृन्द ने दर्शकों का मन मोह लिया. किन्तु दर्शकों की सर्वाधिक तालियां बटोरीं दिल्ली से आये श्री राम भारती कलाकेंद्र द्वारा मंचित रामलीला ने.

अक्षयवट मंच में आज कोलकाता के पार्थो बोस का सितार वादन प्रस्तुत हुआ. इसी मंच पर दर्शकों ने जगदलपुर के आदिवासी बस्तर बैंड की सांगीतिक प्रस्तुति का आनंद लिया. यहीं आगरा के सुधीर नारायण ने भजन की सुन्दर प्रस्तुति दी.

ऋषि भारद्वाज मंच पर हरियाणवी लोक नृत्य ने समा बाँध दिया. यह दर्शनीय प्रस्तुति मनोज जाले की थी. इसके अनन्तर पटना से आये अभय सिन्हा ने बिहार का लोक नृत्य प्रस्तुत किया. सुरेश कुशवाहा ने गायन की प्रस्तुति दी तो वहीं त्रिनिडाड से आये बाल-कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया. विदेश में रामलीला की जीवन्त अस्तित्व के इस मन्चन से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गये.

यमुना मंच पर लखनऊ के अग्निहोत्री बंधुओं ने भजन प्रस्तुत किया और दिल्ली के बांसुरी वादक अजय प्रसन्ना ने बांसुरी पर सुरों के रंग बिखेरे. जैसलमेर के पद्मश्री अनवर हुसैन ने विशेष गायन शैली मांगणिहार को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया वहीं आगरा के ग़ज़ल गायक सुधीर नारायण ने अपनी खूबसूरत भजनोंं से सबका दिल जीत लिया.

सरस्वती मंच पर बिहार की उषा श्रीवास्तव ने झिझिया लोक नृत्य प्रस्तुत किया. दिल्ली से आई मधुमिता बोस ने भजन एवं गजल की सांगीतिक प्रस्तुति दी. उनके उपरान्त लखनऊ के ज्ञानेश्वर मिश्रा ग्यानी ने अपने नाटक के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया. लखनऊ के ही विनोद मिश्र ने भी नाटक का मंचन किया. दिल्ली के राजीव वालिया ने देशभक्ति के गीतों से दर्शकों में राष्ट्रप्रेम की जोत जलाई. न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल के लिये प्रयागराज से पारिजात त्रिपाठी