सात-सात सीएम खड़े-खड़े कांग्रेस को हराएँ पड़े-पड़े

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

राजस्थान में हैं कांग्रेस के सात भावी मुख्यमन्त्री..

राजस्थान विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए जितना चुनौतीपूर्ण और कांग्रेस के लिए जितना अवसरपूर्ण है, जनता के लिए अब उतना ही दिलचस्प भी है. 

कहते हैं घर का भेदी लंका ढाये. पर यहाँ लंका नहीं राजस्थान की बात हो रही है. भाजपा दबाव में आ कर बैकफुट पर खेल रही है और कांग्रेस को अवसर मिला है तो वो बाउंड्री लाइन से रन अप ले कर बॉलिंग कर रही है. और राजनीति के इस मैच में दर्शक-दीर्घा में बैठी जनता को बड़ा मज़ा आ रहा है.

कारण ये है कि अब एक नहीं सात-सात विभीषण कांग्रेस की लंका ढा सकते हैं. और ये सात विभीषण छोटे मोटे नहीं बल्कि सुरसा जैसा भारी मुँह खोले हुए हैं. इनका बस चले तो चुनाव से पहले ही सीएम की कुर्सी लपक लें. किन्तु भला हो भाजपा का, उनके मुँह में कुर्सी इतनी आसानी से आने नहीं देगी. हाँ, उलटा कांग्रेस को नुकसान जरूर हो सकता है.

ये खबर चल कर आई है सीधे राजस्थान से. ये सोची समझी रणनीति है या ये किसी की जुबान फिसली है. वैसे जुबान फिसलने की आशंका कम है. ये सोची समझी रणनीति का चतुर हिस्सा ज्यादा लग रहा है.

हुआ ये है कि अशोक गहलोत ने ये बयान दिया है कि राजस्थान में साथ कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के सात दावेदार हैं. उन्होंने कहा एक तो मैं स्वयं हूँ, दूसरे हैं सचिन पायलट और उनके बाद भी पांच बड़े नेता और हैं जो राज्य में सीएम पद के प्रयाशी हैं.

राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ माहौल भाजपा को अतिरिक्त श्रम करने को विवश कर रहा है. किन्तु दूसरी ओर एंटी इनकंबेंसी को फायदा उठाते हुए सत्ता में पहुंचने का सपना देख रही कांग्रेस अतिरिक्त आत्मविश्वास का शिकार हो रही है. रणनीतिकारों से चूक हो गई है और कुछ ऐसे कदम उठ गए लगते हैं जो कांग्रेस को भारी पड़ सकते हैं.

कहीं कांग्रेस पार्टी को भी महसूस हो गया है कि टिकटों का वितरण थोड़ा गड़बड़ा गया है. जल्दबाज़ी में टिकट वितरण में पार्टी से चूक हुई है. इस का सबसे बड़ा कारण राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी जी हो सकते हैं जिन्होंने अपनी सीट नोखा को सुरक्षित करने के चक्कर में पूरे बीकानेर जिले में उम्मीदवारों को गलत चयन करा दिया.

दूसरी बड़ी गड़बड़ी बिलकुल जायज़ है जो कि होनी ही थी. अशोक गहलोत और सचिन पायलट की आपसी खींचतान बढ़ती ही जा रही है. ये खींचतान कांग्रेस की ही देन है. कांग्रेस ने ही अपने दोनों बड़े नेताओं को लड़ा डाला है. उनके सामने मुख़्यमंत्री पद की गाजर लटका उन्हें एक दूसरे से तेज़ दौड़ने को मजबूर कर डाला है.

राहुल गाँधी ने सूचना मिलने पर डैमेज कंट्रोल के लिए पहले तो दिल्ली के बड़े नेताओं को राजस्थान कूच करने का हुकुम दिया. फिर गहलोत को ये जिम्मा सौंपा कि सभी समाजों को साधने में जुट जाएँ, कुछ दिनों की ही तो बात है. उधर सचिन पायलट से राहुल ने कहा कि युवा मतदाताओं में जोश बरकरार रखने के लिए जान लगा दें. सचिन बोले – यस सर!

फिर राहुल ने अतिरिक्त मानसिक श्रम करके ये फैसला लिया कि गहलोत से बयान दिलवाया जाए कि सीएम के दावेदार वे और पायलट ही नहीं बल्कि पांच और भी नेता हैं. अब गहलौत बोले- यस सर!!

गहलौत ने ये बयान तो दे दिया लेकिन राहुल गाँधी के अतिरिक्त ये रहस्य विधाता भी नहीं जान सके हैं कि सात मुख्यमंत्रियों की ये समझदारी किस वजह से दिखाई गई है?

ये बयान भी बड़े तरीके से दिया गया है. पत्रकारों ने अशोक गहलोत से सवाल किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो सीएम कौन बनेगा, तब उन्होंने कहा कि पहले तो दो ही दावेदार थे, अब पांच हो गए है । रघु शर्मा, डॉ.सी.पी जोशी, गिरिजा व्यास, लालचंद कटारिया, रामेश्वर डूडी भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में है.

वैसे यह गहलौत जी की सोशल इंजीनियरिंग की कोशिश भी हो सकती है. उन्होंने ओबीसी से लेकर ब्राह्मण, जाट और गुर्जर समुदाय तक को साध लिया एक ही जुमला फेंक कर. अब सबको लग रहा है कि सीएम तो उनके समाज का ही बनने वाला है.

ये समझदारी वाली गलती कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में भारी इस तरह पड़ सकती है कि अब सात-सात कांग्रेसी नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना पालने लग जायेंगे. और इनमें से 6 नेता जानते हैं कि यदि कांग्रेस जीती तो राहुल गाँधी सचिन पायलेट को ही सीएम बनायेंगे. मुख्यमंत्री बनने के अपने राजनीतिक स्वप्न की हत्या ये नेता इतनी आसानी से नहीं होने देंगे क्योंकि कांग्रेस जीती तो ऐसा ही होगा..

(पारिजात त्रिपाठी)

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति