सुप्रीम कोर्ट का अजब फैसला – हिन्दू महिला की मुस्लिम पुरुष से शादी अवैध?

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हाल में ही कल सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम् फैसले में कहा कि किसी हिन्दू
महिला की किसी मुस्लिम पुरुष के साथ शादी अनियमित या अवैध
है लेकिन उसकी शादी से पैदा होने वाली संतान वैध है –और उसे
अपने पिता यानि मुस्लिम पुरुष की संपत्ति में अधिकार है.

ये फैसला जस्टिस एन वी रामना और जस्टिस एम् एम् शांतानागौदार की खंडपीठ ने केरल हाई कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ अपील पर दिया –हाई कोर्ट ने कहा था कि मोहम्मद इलियास और वलीलयम्मा (जो शादी के समय हिन्दू थी) का बेटा (शम्सुद्दीन) वैध है और पिता की संपत्ति में हिस्सा पाने का हकदार है.

उसके सौतेले भाइयों ने ये कहते हुए विरोध किया था कि वलीलयम्मा शादी के समय हिन्दू थी,और क्यूंकि उसने मुस्लिम धर्म स्वीकार नहीं किया था इसलिए उसके पुत्र शम्सुद्दीन का इलियास की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है – इलियास की मौत के बाद शम्सुद्दीन ने उसकी संपत्ति में हिस्सा माँगा था.

अगर हिन्दू महिला की मुस्लिम पुरुष के साथ शादी अवैध है तो उन अनगिनत शादियों का क्या, जो हो चुकी हैं –बॉलीवुड के तो 90% मुस्लिम पुरुष ऐसे हैं जिनकी शादियां हिन्दू लड़कियों से हो रखी हैं – शायद इसीलिए अदालत ने फैसला दिया है कि मुस्लिम पुरुषों द्वारा तलाक़ देने के बाद या उनकी मौत के बाद भी हिन्दू लड़कियों से पैदा हुई संतानों का अधिकार उनकी संपत्ति पर बना रहेगा -बेशक उनकी शादियां अवैध हैं सुप्रीम कोर्ट के अनुसार.

अदालत ने कहा कि मुस्लिम कानून के अनुसार शादी कोई धार्मिक बंधन ना हो कर नागरिक अनुबंध ( Civil Contract) है जिसमे 3 तरह की शादी होती है –वैध, अनियमित और अमान्य ( Valid, Irregular and Void).

जाहिर है वैध शादी तो मुस्लिम समुदाय में करने से ही मानी जाएगी. अदालत ने कहा –उनका मानना है कि किसी मुस्लिम पुरुष की मूर्ति-पूजक या अग्नि की पूजा करने वाली महिला से शादी ना तो वैध (Valid) है और ना अमान्य (Void) है बल्कि ये शादी एक अनियमित (Irregular) शादी है –लेकिन इस शादी से पैदा होने वाली संतान का अपने पिता की सम्प्पति में हिस्सा पाने का हक़ है –

.अदालत ने व्याख्या दी कि अनियमित शादी का कानूनी प्रभाव ये है कि पत्नी मेहर की हकदार तो होती है मगर पति की संपत्ति में कोई हक़ नहीं होता लेकिन उसके बच्चे का पिता की संपत्ति में हक़ होता है

अदालत ने आगे व्याख्या दी कि “अमान्य (Void) शादी में दीवानी का कोई दावा ही नहीं बनता इस तरह की शादी से पैदा हुआ बच्चा भी अवैध होता है” — अमान्य शादी दरअसल शुरू से ही गैरकानूनी होती है और इसे तोड़ने के लिए कोई औपचारिकता की जरूरत नहीं होती – कई तरह से शादी अमान्य मानी जाती है.

ये फैसला लव जिहाद का खेल खेलने वालों के लिए चेतावनी है क्यूंकि अगर वो मुस्लिम पुरुष हिन्दू लड़की से शादी कर लेते हैं बहका फुसला कर या प्रेम जाल में फंसा कर और फिर इस्लाम कुबूल करवाते हैं तो उनकी शादियां अमान्य ही मानी जाएँगी –इस फैसले के बाद हिन्दू लड़कियों को सावधान हो जाना चाहिए और शादी के लिए किसी हालत में इस्लाम कुबूल नहीं करना चाहिए.

ये इतना गंभीर निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने दिया जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं मगर किसी चैनल ने इस पर बहस करवाने की जरूरत नहीं समझी क्यूंकि वो आज सब प्रियंका वाढरा के कांग्रेस महासचिव बनने पर पगलाए हुए हैं.

(सुभाष चन्द्र)
23/01/2019

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