स्वच्छ भारत मिशन पर बोले पीएम मोदी

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर देश को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है. अहमदाबाद में साबरमती रिवर फ्रन्ट पर उन्होंने स्वच्छ भारत दिवस के कार्यक्रम में सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा ग्रामीण भारत ने वहां के गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है.

पीएम मोदी ने इस महाबदलाव और महापरिवर्तन के लिए देशवासियों, गांवों में रहने वालों और सरपंचों को बहुत बहुत बधाई दी. स्वेच्छा, स्वप्रेरणा और जनभागीदारी से चल रहे स्वच्छ भारत अभियान को सफलता का स्रोत बताया.

दरअसल स्वच्छ भारत मिशन के तहत अबतक 10 करोड़ टॉयलेट्स बनाए जा चुके हैं. 2014 में सिर्फ 39 फीसदी लोग टॉयलेट का इस्तेमाल करते थे लेकिन आज 5 साल बाद 98 फीसदी भारतीय इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. डिपार्टमेंट ऑफ ड्रिंकिंग वाटर एंड सेनिटेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक इस मिशन के तहत 3 लाख बच्चों की जिंदगी बचाई गई है. इसे दुनिया में आदत परिवर्तन का अबतक का सबसे बड़ा कामयाब प्रयोग माना जा रहा है.

आज से ठीक पांच साल पहले जब 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन का ऐलान किया था तो एकबारगी ये लग रहा था कि इतना कठिन लक्ष्य हासिल कैसे होगा.
लेकिन इस कठिन लक्ष्य को हासिल करने का मंत्र पीएम मोदी ने सार्वजनिक किया. उन्होने कहा कि पांच साल पहले जब लालकिले से उन्होंने स्वच्छ भारत के लिए देशवासियों का अव्हान किया था तो उनके पास सिर्फ जन विश्वास और बापू का अमर संदेश था.

मोदी ने बताया कि बापू कहते थे कि दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं उसे पहले स्वयं में लाना होगा. इसी मंत्र पर चलते हुए हम सभी ने झाड़ू उठाई और निकल पड़े. खुद से बदलाव की शुरुआत हुई तो 130 करोड़ लोगों ने मिलकर देश बदल दिया.

हम आपको बताते हैं कि खुले में शौच से मुक्ति के लिए मोदी सरकार ने कैसे काम किया. दरअसल आम जनता के संकल्प और जन सहयोग के अलावा शौचालय के निर्माण के लिए सरकार पैसा देती है. खुले में शौच से मुक्ति अभियान के लिए 4600 रुपए निर्मल भारत अभियान और 5600 रुपए मनरेगा के तहत दिए जाते हैं. देश के कई राज्य और कई गांव ऐसे हैं जहां कि गांववालों ने पैसे का इंतज़ार नहीं किया और अपने पैसों से शौचालय बनवा डाला.

ये इसलिए भी एक महान परिवर्तन की बड़ी करवट है कि इसने महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा दी और बीमारियों से बचाया. अंधेरे का इंतज़ार करने वाली महिलाएं आज खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं. पीएम मोदी ने इसका ज़िक्र अपने संबोधन में किया.

देश का पहला खुले में शौच से मुक्त जिला पश्चिम बंगाला का नादिया जिला है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नदिया को देश का पहला खुले में शौच मुक्त ज़िला घोषित किया था जिसे कि यूनिसेफ और वर्ल्ड बैंक ने प्रमाणित भी किया.

अलग अलग राज्यों में अलग नामों से इसे पुकारा जाता है. बंगाल में शौबार शौचागर यानि सबके लिए शौचालय तो राजस्थान में फुटरो घर यानी सुंदर घर.

लेकिन इतने मुश्किल लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं था. सदियों पुराने संस्कार को पांच साल में पीएम मोदी ने बदलकर इतिहास रच डाला है. पीएम मोदी के इस असाधारण दृष्टिकोण और प्रयास के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिला. उनकी पिछले सप्ताह हुई अमेरिका यात्रा के दौरान मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने स्वच्छ भारत मिशन के लिए ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड 2019 से सम्मानित किया. पीएम मोदी ने इस सम्मान को 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित किया था.

इसी तरह पीएम मोदी ने अब सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने के लिए जनता से आव्हान किया है ताकि पर्यावरण की रक्षा की जा सके. इसके अलावा उन्होंने मिशन जलशक्ति का ऐलान किया है और साल 2024 तक हर घर में नल और हर नल में जल के मिशन का आगाज़ किया है.

पीएम मोदी ने कहा कि आज जो हमने हासिल किया है वो पड़ाव भर है…..स्वच्छ भारत के संकल्प का सफर जारी है.बहरहाल, अगर दृढ़ इच्छाशक्ति हो और जागरुकता हो तो जन भागीदारी से नामुमिकन को कैसे मुमकिन किया जा सकता है ये पीएम मोदी से सीखा जा सकता है.

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति