हनी की ट्रैपिंग एमपी में (पार्ट -3)

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हरभजन ने एड़ी चोटी का ज़ोर लगा लिया. अपने हर जानने वाले से पैसे माँगे. लेकिन दो करोड़ का टारगेट इतना आसान नहीं था इन्जीनियर के लिये. लेकिन हर कोशिश नाकाम रही. हर कोशिश दो छूरियों के बीच फंसे इस बकरे की नाकाम रही.

तब मरता क्या न करता. सीधा घर खुदा का. हरभजन ने दिल कड़ा किया और एक सुबह उठ कर सीधे चल दिया पुलिस थाने की तरफ. पंद्रह मिनट की दूरी पर स्थित इस पुलिस थाने में पहुंचने के दौरान इन्जीनियर का दिल एक लाख बार धड़का था. हर कदम चलते हुए ऐसा लगा कि गिर जाउंगा. पर लरजते पैरों और धड़कते दिल से वो थाने पहुंच ही गया.

थाने में जब उसने कहानी सुनानी शुरू की तो प्राथमिकी लिखने वाले पुलिसकर्मी का मुह खुला का खुला रह गया. इस किसम की दर्द भरी दासतान पहली बार लिखी जा रही थी इस थाने में.

इसके बाद शुरू हुआ सिलसिला गिरफ्तारी का. पहले आरती को धर लिया पुलिस ने और फिर आरती का मुह खुला तो श्वेता का नाम सामने आया. श्वेता ऐसी हैरान हुई जैसे उसने सोच रखा था कि वो कभी नहीं पकड़ी जायेगी.

गिरफ्तारी के बाद मीडिया के सामने हनीट्रैप मामले की दोनो प्रमुख आरोपियों आरती और बरखा ने इंदौर के एमवाय अस्पताल में मेडिकल के दौरान पुलिस की कार्य प्रणाली पर उंगली उठाई. दोनो ने कहा कि इस साजिश में कई बड़े लोग शामिल हैं. उन्होंने कुछ नामों का भी खुलासा किया.

सवाल उठाए थे और कई बड़े लोगों पर साजिश में शामिल होने का आरोप भी लगाया था. इसके बाद स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम ने पुलिस अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और मामले की जांच को और अधिक गुप्त रखने की तैयारियां की गईं. दोनो आरोपियों के मीडिया से हर तरह के संपर्क पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

इस हनीट्रैप मामले ने तुरंत तूल पकड़ा. मामले की विशेष टीम से जांच पर प्रभाव डालने की कोशिशें भी हुईं हैं, लेकिन पुलिस पूरे मामले पर पूरी तरह गंभीरता से कमर कसे हुए है. जांच को प्रभावित करने के लिए नौकरशाह कथित तौर पर दिन-रात एक किए हुए हैं. इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई और जांच को राजनीति से प्रेरित भी कहा गया. कहा गया कि इस मामले में कई वरिष्ठ राजनेता फंसे हुए हैं.

पर ये टोटके किसी काम न आये. पुलिस की कटिबद्धता प्रशंसनीय रही. अब प्रदेश के वरिष्ठ नौकरशाहों में टकराव कराने की कोशिश कराकर जांच प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है.

इस मामले की प्रारंभिक पूछताछ में बहुत से नेताओं और अफसरों के नाम भी आये. यही वजह थी कि डीजीपी वीके सिंह द्वारा जांच हेतु एसआईटी का गठन किया गया. लेकिन, विवाद इस मामले से लगातार जुड़ते रहे मजबूरन नौ दिनों के अंदर ही इस टीम के प्रमुख को तीसरी बार बदले गये ताकि जांच पर कोई आक्षेप न आये.

आईपीएस डी श्रीनिवास वर्मा को 23 सितंबर को गठित एसआईटी की जिम्मेदारी सबसे पहले दी गई थी. लेकिन, गठन के 24 घंटे के भीतर ही इस टीम की जिम्मेदारी एडीजी संजीव शमी को दे दिया गया जो कि काफी तेजतर्रार अफसर माने जाते हैं. लेकिन एक हफ्ते बाद ही संजीव शमी को हटा कर राजेंद्र कुमार को एसआईटी जांच की कमान सौंपी गई जो अभी तक इस टीम के प्रमुख हैं.

हनीट्रैप के इस मामले में आरोपियों की मदद करने वाले तीन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई है और क्राइम ब्रांच ने अड़ीबाजी का केस इन पर दर्ज करके इनको गिरफ्तार कर लिया है. इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि ये तीनो आरोपी लड़कियों के इशारे पर लोगों से रुपये वसूलने के लिये उन पर दबाव बनाते थे. तीनों पुलिसकर्मियों के नाम सुभाष गुर्जर, अनिल जाट और लाड़ सिंह बताये गये हैं.

एसआईटी ने मामले की जांच के दौरान नौ लड़कियों, आठ ग्राहकों और तीन दलालों को गिरफ्तार किया. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अगर आरती अपना गुनाह कबूल कर लेगी तो उसे सरकारी गवाह नहीं बनाया जायेगा. लेकिन सच तो ये है कि पुलिस ने पहले ही एक छात्रा को सरकारी गवाह बना लिया है. इंदौर की पलासिया थाना पुलिस इस छात्रा को अपने साथ लेकर भोपाल पहुंची ताकि बाकी पूछताछ भोपाल में हो सके. पुलिस चाहती है कि हनीट्रैप गैंग की चारों महिला आरोपियों के बैंक खाते भी सीज किये जायें और इसके लिए उन्होंने भोपाल की बैंकों को पत्र भी लिखे हैं.

पुलिस का कहना है कि अभी आरोपियों के पांच खातों की जानकारी ही मिल पाई है. एक टीम को इन चारों महिलाओं की वैध और अवैध संपत्तियों की जानकारी जुटाने के लिए लगा दिया गया है. वहीं समानांतर तौर पर पुलिस को पांच कंपनियों और कुछ एनजीओ के नामों की जानकारी भी मिली है जो आरोपियों के द्वारा चलाये जा रहे थे.

पांच प्रमुख आरोपियों के अतिरिक्त इस हनीट्रैप मामले में बीस किरदार और भी शामिल हैं और ये वो बीस लडकियां हैं जिनको मुख्य आरोपी श्वेता विजय जैन के अनुसार अफसरों के पास भेजा जाता था. एसआईटी से पूछताछ के दौरान श्वेता ने बताया कि ये सभी लडकियां मध्यवर्गीय परिवारों से सम्बंधित हैं.

श्वेता ने एक और अहम बात का भी खुलासा किया है. उसके अनुसार सिर्फ ब्लैकमेलिंग पैसे के लिए नहीं होती थी. इन आरोपियों की ब्लैकमेलिंग के लक्ष्यों में सरकारी ठेके प्राप्त करना, एनजीओ को फंडिंग करवाना और वीआईपी लोगों को निशाना बनाना भी था. श्वेता का कहना है कि उसने कई बड़ी कंपनियों को ठेके दिलवाने में मदद की है. और उसके हर काम में उसके साथ प्रमुख सहयोगी भूमिका में उसकी सखी आरती दयाल ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती थी.

यहीं नहीं श्वेता ने एसआईटी को ये भी बताया कि आईपीएस और आईएएस अफसर कॉलेज की छात्राओं की मांग करते थे. इस कारण श्वेता ने कॉलेज गोइंग गर्ल्स को भी अपने रैकेट में शामिल किया और उनको अफसरों की मांग पूरी करने के लिए भेजना भी शुरू कर दिया था. इन अधिकारियों में बहुत से इन छात्राओं के पिता की आयु के हुआ करते थे. श्वेता ने एक छात्रा मोनिका यादव का भी ज़िक्र अपने बयानों के दौरान किया.

मोनिका से बात हुई तो उसने एसआईटी को बताया कि श्वेता ने उसे बड़े कॉलेज में एडमिशन कराने में मदद करने का वायदा करके उसे ऐसा करवाया था. श्वेता के बड़े अफसरों के साथ श्वेता के खास रिश्ते हुआ करते थे जो उसकी गिरफ्तारी के बाद अब डावांडोल हो गए लगते हैं. मोनिका ने बताया कि श्वेता मुझे विश्वास दिलाने के लिए मंत्रालय भी मुझे लेकर गई थी. वहां पर उसने सचिव स्तर के तीन आईएएस अफसरों से मोनिका की मुलाकात करवाई थी. पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि श्वेता ने मोनिका को इंदौर-भोपाल आने-जाने के लिए महंगी ऑडी कार भी मुहैया कराई थी.

एमपी पुलिस के स्पेशल डीजी साइबर क्राइम और एसटीएफ पुरुषोत्तम शर्मा ने हनीट्रैप मामले की जांच कर रही एसआईटी को लेकर प्रदेश पुलिस के मुखिया वीके सिंह पर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तौर पर सवाल खड़े किये थे. उन्होंने एक पत्रकार वार्ता में ये मांग भी की थी कि हनी ट्रैप मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी के सुपरविजन से डीजीपी को हटाया जाए. इस मांग को गंभीरता से लिया गया और सरकार ने कार्रवाई करते हुए उनका तबादला कर संचालक, लोक अभियोजन संचालनालय बना कर उनको भेज दिया.

एसआईटी की नजर मध्यप्रदेश के कई आईएएस अफसरों पर भी टेढ़ी है. ये अफसर मामले के आरोपियों के घर में आते जाते देखे गए हैं. इसकी पूरी संभावना है कि गुप्त रूप से इन अधिकारियों से भी पूछताछ चल रही हो सकती है. गिरफ्तार आरोपियों ने हनी ट्रैपिंग हेतु अश्लील वीडियो तैयार करने के लिए स्वदेशी तरीकों से लिपस्टिक, चश्मों और यहां तक सामान्य मोबाइल में छिपाए गए कैमरों को भी अपना औजार बनाया था. इस वजह से ही उनके शिकारों ने कभी उन पर शक नहीं किया और उनका काम बड़े आराम से चलता रहा.

हनी ट्रैपिंग के मामले के सामने आने से लोग यूँ ही परेशान नहीं हैं. आरोपियों के कब्जे से कई नामी-गिरामी शख्सियतों की सैकड़ों आपत्तिजनक वीडियो क्लिप भी बरामद हुई हैं. इंदौर पुलिस अधिकारी रुचि वर्द्धन मिश्रा ने आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मीडिया को बताया था कि ये आरोपी स्पाई कैमरे की मदद से अपने ऑपरेशंस को अंजाम दिया करते थे.

जांच में शामिल सूत्रों के माध्यम से इन स्पाई कैमरों का विवरण सामने आया. ये दूसरी बात है कि हमें जानकारी मिलने तक इसकी पुष्टि करने के लिए रूचि मिश्रा या उनके साथ जांच में सहयोग कर रहे क्राइम ब्रांच के अपर पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र सिंह से संपर्क नहीं हो पाया था.

इसी दौरान अजीब सी बात ये सामने आई कि एमपी पुलिस की सायबर सेल का गाजियाबाद के एक पॉश इलाके में एक फ़्लैट ले रखा था जो कि सरकारी अनुमति के बिना लिया गया था. प्रदेश पुलिस महानिदेशक वीके सिंह को जब ये जानकारी हुई तो उन्होंने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फटकार लगाईं थी. उन्होंने उनसे पूछा भी था कि इतनी दूर सायबर सेल के लिए फ्लैट लेने की कौन सी ख़ास वजह है? इसके ही तुरंत पश्चात पुलिस ने अपने सायबर सेल से ये फ्लैट खाली कराने में ज़रा भी देर नहीं की.

पुलिस पर भी उंगलियां उठीं जब इस मामले की एक आरोपी महिला ने पुलिस हिरासत में कांच से अपनी कलाई काटने की कोशिश की. पीड़िता के वकील ने पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए आरोप लगा दिया है कि टॉर्चर से दुखी हो कर उनकी मुवक्किल ने ये कदम उठाया है. दूसरी तरफ जिला अभियोजन अधिकारी ने इससे असहमति ज़ाहिर की और किसी भी महिला के घायल होने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि ऐसा दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है.

जब रिमांड की अवधि पूरी हो गई तो पुलिस ने पांचो प्रमुख महिला आरोपियों, श्वेता स्वप्निल जैन (48), श्वेता विजय जैन (39), आरती दयाल (29), मोनिका यादव (19) और बरखा सोनी (34) को जुडिशियिल मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) मनीष भट्ट की अदालत में पेश किया जहां से इन पांचों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया.

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