छठ मैया को प्रणाम !!

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छठ महापर्व के अवसर पर छठ पूजा तीन दिन लगातार चलती है और इस दौरान पूजा के साथ साथ पूजा से जुड़े गीत गाये और सुने जाते हैं. यूपी औऱ बिहार में लोग घरों में तरह-तरह के पकवान बनाते हैं, एक-दूसरे को छठ की बधाइयां देते हैं और छठ मइया की कहानी सुनते हैं. साथ ही छठ पर्व की पौराणिक कथा भी सुनते हैं.

आज देश के दोनो उत्तरी प्रदेशों – उत्तरप्रदेश और बिहार में छठ महापर्व की धूम देखी जा रही है. लोग आज षष्टी की शाम सूर्य को अर्घ्य देने वाले हैं और कल सप्तमी की सुबह उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के साथ छठ पर्व का समापन किया जाएगा. इस वर्ष छठ पर्व की तिथियाँ इस प्रकार हैं:

31 अक्टूबर – नहाय-खाय
1 नवंबर – खरना
2 नवंबर – शाम का अर्घ्य
3 नवंबर – सुबह का अर्घ्य

आइये पहले समझ लें छठी मइया के विषय में

जैसा कि एक पौराणिक कथा में बताया गया है, बहुत पहले एक प्रियव्रत नामके राजा हुआ करते थे. उनकी पत्नी का नाम मालिनी था. वे संतानहीन थे, इस चिंता में राजा और रानी दोनों दिन रात घुला करते थे. अंत में पुरोहितों की सलाह पर राजा ने महर्षि कश्यप से जा कर प्रार्थना की. तब कश्यप ऋषि की सलाह पर उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. यह यज्ञ सफल हुआ और रानी गर्भवती हो गयी.

लेकिन दुर्भाग्य ने उनका साथ नहीं छोड़ा और रानी ने जिस पुत्र को जन्म दिया, उसने मृत रूप में जन्म लिया. यह देख कर राजा रानी शोक के सागर में डूब गए और उन्होंने फिर कभी पुत्र प्राप्ति की आशा को त्याग दिया. राजा तो इतने विव्हल हुए कि आत्महत्या पर उतारू हो गए. किन्तु जैसे ही वो खुद को मारने के लिए आगे बड़े षष्ठी देवी उनके सामने प्रकट हो गईं.

दयालु षष्ठी देवी ने राजा से कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी सच्चे मन से पूजा करता है मैं उन्हें पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. यदि तुम भी मेरी पूजा करो तो तुमको पुत्र रत्न की प्राप्ति हॉग. राजा ने देवी को प्रणाम किया और उनकी बात मान कर कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की. पूजा ह्रदय से की गई थी जिसने देवी को प्रसन्न कर दिया और तब से हर वर्ष इस तिथि को छठ पर्व मनाया जाने लगा.

कार्तिक मास की षष्टी के दिन छठ उत्सव मनाया जाता है. इस दिन पूजे जाने वाली देवी को षष्ठी मैया के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि छठ मैया सूर्य भगवान् की सहोदरा अर्थात बहन हैं. अतएव लोग सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैया को प्रसन्न करते हैं. वहीं, पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप याने कात्यायनी माँ को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है.

छठ मइया की भक्त महिलायें अधिक होती हैं क्योंकि उनको संतान देने वाली माता के नाम से भी जाना जाता है. जैसा कि हमने ऊपर छठ मैया की कथा से जाना, कि यह छठ पर्व संतान के लिए मनाया जाता है. विशेषकर वे दम्पति जिन्हें संतान का प्राप्ति नही हुई है, वो छठ का व्रत रखते हैं, बाकि सभी अपने बच्चों की सुख-शांति और सुरक्षा हेतु छठ पर्व मनाते हैं.

(अर्चना शैरी)