AIIMS: ऐसे चमत्कार ऐम्स में ही हो सकते हैं !

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चमत्कार नहीं होते, ऐसा नहीं है. चमत्कार होते हैं और शायद भाग्यशालियों के साथ ही होते हैं. ऐसा ही हुआ है दिल्ली के एम्स अस्पताल में. इसकी साक्षी रही है दिल्ली एम्स अस्पताल की न्यूरो एन्स्थेटिक टीम जिन्होंने एक लड़की के ब्रेन ट्यूमर(ग्लियोमा) की सर्जरी बिना बेहोश किये की. क्या आपको लगता है ये संभव है?
इसी टीम में से किसी मेडिकल स्टॉफ ने आपरेशन का वीडियो बना लिया जो कि इन दिनों खूब वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है.
मरीज़ लड़की जिसकी सर्जरी हो रही थी उस दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करती रही. इस सफलता का सेहरा न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के सर बंधा जिन्होंने ये आपरेशन किया. ब्रेन की सर्जरी बेहद जटिल प्रक्रिया मानी जाती है फिर भी एम्स के एनेस्थेटिक टीम ने यह चैलेंजिंग निर्णय लिया और मरीज़ को बिना बेहोश किये ही सर्जरी की. इस दौरान लड़की हनुमान चालीसा का पाठ करती रही.
सूत्रों के अनुसार गुरूवार को दिल्ली के एम्स में दो “विक क्रैनियोटॉमी” की गई जिसमें एक चौबीस वर्षीय युवती पर इसी प्रकार की सर्जरी हुई जिसे ब्रेन के बायीं ओर एक बड़े आकार का ब्रेन ट्यूमर(ग्लियोमा)था.यह युवती पेशे से एक स्कूल टीचर है. आपरेशन के दौरान युवती को पूरी तरह बेहोश नही किया गया और वो पूरे समय हनुमान चालीसा का पाठ करती रही. ऐसे करिश्मे को देख कर विश्वास और भी मज़बूत हो जाता है कि ईश्वर है.
किसी भी सर्जरी से पहले मरीज़ को एनेस्थीसिया दिया जाता है. यह मेडिकल साइंस की एक शााखा है. इसे दिये जाने से पूर्व मरीज़ की कई प्रकार की जाँच होती है और तब ही डॉक्टर ये तय करते हैं कि किस रोगी को कितनी मात्रा में एनेस्थीसिया दिया जाना चाहिये.एनेस्थीसिया देते समय डॉक्टर काफी सतर्क रहते हैं.
पर सोचने वाली बात ये भी है कि क्या एनेस्थीसिया से पहले लोगों की सर्जरी चिकित्सा नही होती थी?
पहले सर्जरी के दौरान अफीम या शराब जैसी चीज़ों की सहायता ली जाती थी ताकि मरीज़ को अवचेतन अवस्था में रखा जा सके और आपरेशन के वक्त उसे किसी प्रकार का दर्द या तकलीफ न हो. हालांकि ये तरीका ज़्यादा कारगर सिद्ध नही हुआ.मरीज़ को आपरेशन की प्रक्रिया में दर्द से तो गुज़रना ही पड़ता था तब भी.
राजधानी दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स ) के न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट ने एक महिला का बेहोश किए बिना ही ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी की. महिला भी आपरेशन करवाते समय हनुमान चालीसा का पाठ लगातर करती रही. आपरेशन के बाद सर्जरी से बेखबर वह ऑपरेशन थियेटर से मुस्कुराते हुए बाहर आई.
सही एनेस्थीसिया देखभाल और अन्य मेडिकल उपकरणों की मदद से डॉक्टरों ने इस जटिल कार्य को सफल बनाया. न्यूरो सर्जरी विभाग द्वारा पूरी तरह बेहोश किए बिना सर्जरी जिसे जागृत क्रैनियोटॉमी भी कहते हैं साल 2002 से की जा रही है। इस प्रकार की सर्जरी की प्रक्रिया बहुत कुछ मरीज की सहनशक्ति और आराम पर निर्भर करती है.