Parakh ki kalam se: ताश के पत्तों की भांति गिरता हुआ दिखाई देगा Pakistan!

संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर जी एक महान दूरदृष्टा भी थे, जब 1971 में भारत की विजय और 93000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण का समाचार नागपुर पहुँचा तो स्वयंसेवकों ने जीत का उत्सव मनाना शुरू कर दिया।
गुरुजी उस समय मुंबई में थे उन्होंने वही से दिल्ली में श्रीमती गांधी को बधाई पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने एक बात विशेष लिखी की अब पाकिस्तान शायद ही प्रत्यक्ष युद्ध लड़ेगा और 50 वर्षो में आपको पाकिस्तान ताश के पत्तो की भांति गिरता हुआ दिखाई देगा।
इसका कारण है कि पाकिस्तान एक देश नही है वह एक सोच है जिसका आधार भारत मे फिर से मुगल सल्तनत को स्थापित करना था। पाकिस्तान के लोग ना सही मगर इनके अफसर अब ये जान चुके होंगे कि वे ना तो युद्ध करने योग्य है ना ही देश चलाने योग्य।
उस समय श्रीमती गांधी ने कोई विशेष टिप्पणी नही की बस गुरु जी को भी बधाई पत्र भेज दिया था। दिसम्बर में गुरुजी के उस पत्र को 50 वर्ष हो जाएंगे और पाकिस्तान ने आज ही घोषणा की है कि यदि जल्द से जल्द करीब 50 अरब डॉलर का उधार नही मिला तो अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।
पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के अनुसार 50 अरब कितना होता है ये आप इससे समझ लीजिये की दो महीने पहले पाकिस्तान ने आईएमएफ से एक अरब डॉलर का उधार मांगा था जिसे आईएमएफ ने मना कर दिया। पाकिस्तान इस समय FATF की ग्रे लिस्ट में है।
इसलिए इसे बाहर से उधार नही मिल रहा सिवाय चीन के और चीन की खासियत यह है कि चीन पाकिस्तान को ये उधार मित्रता नही अपितु व्यापारिक शर्तो पर देता है जिसका ब्याज इतना ज्यादा होता है कि पाकिस्तान मूल से ज्यादा ब्याज की मार झेल रहा है।
FATF की ग्रे लिस्ट में होने का अर्थ है कि आपके देश का काला धन सफेद करना आसान है और आपकी सरकार इसमे सहयोग करती है। ऐसे देश को कर्ज मिलना मुश्किल होता है, अभी तो पाकिस्तान सिर्फ ग्रे लिस्ट में है हमे इसे ब्लैक लिस्ट में भेजना है।
इसके लिये आप सभी के सहयोग की आवश्यकता होगी, हमे रॉ, सीआईए समेत विश्व की सभी बड़ी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट निकालनी है जो उन्होंने पाकिस्तान में टेरर फाइनैंसिंग पर प्रकाशित की हो। हमे ये सारी रिपोर्ट्स की टूलकिट बनाकर ईमेल के माध्यम से FATF के बड़े सदस्य जैसे अमेरिका, भारत, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के विदेश मंत्रालयों को भेजनी होगी।
फ्रांस को भी शामिल कीजिये, क्योकि वही तो पाकिस्तान का नया नया दुश्मन है। ऊपर से चुनाव आने वाले है हो सकता है इमैनुअल मैक्रोन ईसाई राष्ट्रवादियों को लुभाने के लिये पाकिस्तान की बैंड भी बजा दे।
उपरोक्त जानकारी इकट्ठा करके हमे पाकिस्तान के विरुद्ध मोर्चा खोलना ही चाहिए, क्योकि उसके काले पैसों का एक बड़ा हिस्सा आतंकवाद में प्रयोग होता है। बिना हाथ मे बंदूक पकड़े भी हम एक युद्ध लड़ सकते है और जीत भी सकते है।
मुझे यह सब मिलेगा तो मैं इसे अपने टेलीग्राम चैनल के माध्यम से आप तक अवश्य पहुँचा दूंगा। पाकिस्तान जितना जल्दी ब्लैक लिस्ट में पहुँचेगा चीन का गुलाम बन जायेगा। मुसलमान और कम्युनिस्ट कभी साथ नहीं चल सकते दोनों की बर्बादी तय है।
पाकिस्तान को तो बीजिंग खुद ही खा जाएगा दिल्ली को टैंकर उतारने की जरूरत ही नही पड़ेगी बशर्ते हम पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट की तरफ धकेल दे।
बहरहाल गुरु गोलवलकर जी का ऐसा कहने का एक ही कारण था वो यह कि पाकिस्तान बनाने वालों को सिर्फ दंगे करना आता था सरकार चलाना नही इसलिए गुरुजी जानते थे ये कोलैप्स कर जाएंगे और वही हो रहा है।