नहीं रोकूंगी तुम्हें ! – NIG Poetry

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नहीं रोकूंगी तुम्हें
नहीं बांधूंगी तुम्हें किसी बंधन में
न अपने शब्दों से
न अपने प्रेम से
प्रेम बंधन नहीं
एहसास बोझ नहीं
खुले आसमान में तैरते हम दोनों
चमकेंगे दो सितारों की तरह
बंधे हो जब मोह के धागे
तो खामोश प्रेम ही काफी है
एक दूसरे से जुड़ने के लिए
लेकिन तुम्हें टूटते नहीं देख सकती
अपने मोह के लिए
सच्चा प्रेम उठाता है गिराता नहीं
मजबूत सहारा देता है
पांव की बेड़ियां नहीं
खुशी का सबब
होता है गमों का नहीं
हम मिले ना मिले कोई बात नहीं
लेकिन यह इश्क तो
समा चुका है रूह में
गहरे तक कहीं
अब तेरा नाम इश्क
मेरा नाम इश्क
सितारों के जहां में
हमारी पहचान इश्क !!