तीन महीने पहले दिखने लगते हैं लक्षण – जानिये क्यों करते हैं हम Suicide

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हर दिन हम सभी टीवी और अखबार के माध्यम से आत्महत्या की खबरें पढते रहते हैं | जिनमें अधिकतर मामले विद्यार्थियों के होते हैं। लेकिन कई बार वृद्ध लोगो के भी आत्महत्या करने के मामले सामने आते हैं।
आज का जो परिवेश है उसमें तेज रफ्तार जीवन मे, छोटे परिवार (necular family), अधिक व्यवस्त जीवन शैली,सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताना, जिसके कारण अकेलापन एक बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। हर उम्र के लोगो की अपनी अपनी समस्याएं और कारण हैं आत्म हत्या करने के।

प्रायः बहुत सामान्य से कारण देखे जाते हैं आत्महत्या के। सामान्य का अर्थ हैं कि ये बहुत आम कारण हैं जो आत्महत्या के लिये प्रेरित करते हैं. इनमें से प्रमुख कारण हैं – आत्महत्या की प्रवृत्ति, आत्महत्या का पारीवारिक इतिहास,  पारिवारिक हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, शारीरिक प्रताड़ना, यौन प्रताड़ना (बलात्कार), लंबी शीरीरिक बीमारी, लगातार असफल होना, असफलता से होने वाली बदनामी का भय, अवसाद (Depression), अकेलापन, खुद को अनुपयोगी / गैर जरूरी समझना, आवेश में आकर आत्महत्या करना, इत्यादि.

इनके लक्षण भी समझ लीजिये ताकि आप पहले से सावधान हो जायें कि आपके साथ क्या हो सकता है या आपके सामने क्या हो सकता है. न आप कोई गलत कदम उठाइये न ही किसी को उठाने दीजिये। अपना पूरा प्रयास कीजिये कि किसी ऐसे व्यक्ति को आप समझा कर राह पर ला सकें जो जीवन का सबसे गलत कदम उठाने की गलती करने जा रहा हो.

लक्षणों पर दीजिये ध्यान

आइये नज़र डालते हैं आत्महत्या के लक्षणों पर. यदि आपको कोई असफलता के भय में डूबा नजर आये या गहरी चिंता में रहता दिखे या किसी काम में मन नहीं लगे अथवा सदा निराशावादी बातें करता दिखाई दे या फिर भूख लगनी कम हो जाये या फिर हमेशा खुद को और अपनी किस्मत को कोसता कोई आपको नजर आये तो आप समझ सकते हैं कि ये ही वे लक्षण हैं जो खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं
कुछ और भी लक्षण हैं जो आपको सचेत करने के लिये पर्याप्त हो सकते हैं। यदि आप किसी को  मरने के तरीकों के बारे में बात करते देखें या ऐसे तरीके ढूंढते कोई नजर आये तो आप स्वयं भी सावधान हो जायें और उस व्यक्ति को भी सावधान करने का प्रयास करें.  पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि आत्महत्या करने वाले बहुत से नौजवान लडके- लडकियों ने , गूगल पर मरने के तरीकों की साइट्स खोजी हैं |
इसके अतिरिक्त यदि कोई आपके सामने बार-बार मर जाने या आत्महत्या कर लेने की बात बोल रहा हो तो आप समझ जायें कि ये लक्षण क्या कहते हैं। प्रायः पाया ये गया है कि जो लोग अधिक निराशा, अकेलेपन, अवसाद, असफलता के भय में जीते हैं , वो ती से छः महीने पहले से मर जाने की बातें करने लगते हैं|

मूल समाधान के लिये प्रयत्न करने होंगे। जो व्यक्ति निराशावादी और आत्महत्या के लिये प्रेरित दिख रहा हो, उससे आप कोई अपेक्षा नहीं कर सकते। आपको और ऐसे व्यक्ति के करीबी लोगों को ही स्थिति पर नियंत्रण हेतु प्रयत्न करने होंगे। आप अपने करीबी मित्र या रिश्तेदार जिसमें भी ऊपर बताये लक्शण दिखाई दें , उन्हें नज़र अंदाज ना करें और गंभीरता से लें | ज्याादातर मामलों में व्यक्ति अपने परिवार के सामने कम और मित्रों के सामने मर जाने की अभिव्यक्ति करता है | मित्रों को चाहिये कि वो परिवार वालों को इस बात की जानकारी दें ताकी परिवार उचित सहायता कर सके उस व्यक्ति की।

समाधान बहुत सारे हैं

ऊपर बताये लक्षणों में से जो लक्षण किसी भी व्यक्ति में पायें तो समझलें उस व्यक्ति को सहायता की ज़रूरत है | उसे किसी मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक सलाहकार के पास ले जायें | याद रखिये, समय पर अगर सहायता प्रदान की जायेगी तो आत्महत्या रोकी जा सकती है |
जहां तक बच्चों का प्रश्न है, बच्चों पर पढाई में सफल होने का बोझ ना बढने दें | उनको असफलता के लिये भी तैयार करें – उनको बताइये कि अगर वो इस बार असफल रहा तो अगली बार अधिक प्रयास कर के सफल हुआ जा सकता है। बच्चा अगर पढाई में कमज़ोर हैं , तो उसमें हीनभावना ना आने दें ना ही माता-पिता हीनभावना महसूस करें| हर बच्चे/ व्यक्ति में विशेष गुण और योग्यता होती है , जिसका विकास कर उसमें आगे बढा जा सकता है | असफल व्यक्ति में , उसके गुणों और योग्यता का एहसास करवा कर उसका आत्मविशवास जगायें |
बच्चों के मनोविज्ञान का भी ध्यान रखें। दूसरों के सामने अपने बच्चों या अन्य सद्स्यों की कमियाँ नहीं बतायें | बच्चे बहुत संंवेदनशील होते हैं। इसके साथ ही उनको दूसरों द्वारा की गयी आलोचना को स्वीकार करना भी सिखाइये। उनको बताइये कि परिणाम को अधिक महत्व न देकर अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास करें। उनको ये भी बताइये कि समाज में होने वाली बदनामी का कोई अर्थ नहीं होता, अर्थ होता है अपने जीवन का, अपने जीवन के प्रयत्नों का और अपने जीवन के आनंद का. उनको बदनामी से न डरना भी सिखाइये।
ये भी ध्यान रखें कि कभी कहीं कोई आत्महत्या की खबर सुने और अगर बच्चा सामने हो तो चर्चा करते हुये उस पर उनका विचार जानें और अपना सकारात्मक विचार उसके सामने रखें | इससे बच्चे में परिवार के सामने असफल होने का तनाव और भय दूर होगा |और असफलता जीवन का अंत नही होता बल्कि अपने तरीकों में और मेहनत करके सफलता पाने का अवसर होता है , ये समझेगा |
परिवार में अभिभावन होने की स्थिति में आपका परिवार के प्रति ये भी कर्तव्य होता है कि आप कुछ समय परिवार के हर सदस्य के साथ बितायें , उनके मन की बात जानने की कोशिश करें | अपने बच्चों के और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार , सोच का अवलोकन करते रहें |इतना ही नहीं, उनके मित्रों के सम्पर्क में भी बने रहें |
आपको अपनी तौर पर सदा ही सकारात्मक लोगों के सम्पर्क में रहने का अभ्यास करना होगा और यही अपने बच्चों और परिवार के लोगों को सिखाना होगा। सदा ही सकारात्मक कार्यों को करने का प्रयास करें |
नियमित शारीरिक व्यायाम , प्राणायाम, खुली हवा में टहलना,ध्यान, संगीत सुनना, नृत्य करना, प्रेरक किताबें पढना , परीवार और मित्रों के साथ पीकनिक आदि पर समय बिताना | इनमें से कुछ या सभी चीज़े अपनाने का प्रयास करें जिससे आप शारीरिक- मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें| परंतु  सबसे ज़रूरी बात है – अपनी मानसिक परेशानियों को छुपायें नहीं और समाधान के लिये सहायता लेने में संकोच और विलंब न करें |
अगर किसी दुखी,हताश, निराश,परेशान व्यक्ति के सम्पर्क में आयें तो अपने अच्छे व्यवहार और प्रेरक बातों से उसको धैर्य और हौसला दें | और यदि आप किसी भी तरह की सहायता करने योग्य हों तो संकोच ना करें – आपका छोटा सा प्रयास किसी को जीवन दान दे सकता है |

जीवन अनमोल है 

आपका हर विचार ,हर कर्म आपके जीवन को आकार दे रहा है | सावधानी से अपने विचार और कर्मों का चयन करें |
याद रखें – कोई भी सामान्यत: व्यक्ति मरना नही चाहता है और आत्महत्या करने से पहले बहुत मानसिक द्वंद और संघर्ष से गुज़रता है| अगर सही समय पर उसकी सहायता की जाये तो बढती आत्महत्याओं को रोका जा सकता है |