CBI पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हैरान करने वाला है!

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सुप्रीम कोर्ट के CBI चीफ अलोक वर्मा की बहाली को लेकर दिए फैसले को उचित नहीं कहा जा सकता –पहले देखते हैं फैसले की मुख्य बातें क्या हैं –

कोर्ट ने वर्मा को पद पर बहाल कर दिया और वर्मा से अधिकार छीनने और  छुट्टी पर भेजने के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया — अलोक वर्मा के खिलाफ जो भी कार्रवाई करेगी वो हाई पावर समिति करेगी जो  CBI डायरेक्टर का चयन और नियुक्ति करती है ( इसकी मीटिंग एक हफ्ते में होगी) —- सरकार को कानूनी रूप से बिना हाई पावर समिति को पूछे बिना CBI चीफ से अधिकार छीनने का कोई अधिकार नहीं है — पद  सम्हालने के बाद भी अलोक वर्मा को नीतिगत फैसले लेने का  कोई अधिकार नहीं होगा —- कोर्ट ने सरकार के उस फैसले को भी रद्द कर दिया जिसके अनुसार एम् नागेश्वर राव को CBI का अंतरिम चीफ बनाया गया था.

यानि सुप्रीम कोर्ट ने CBI को एक तरह से बिना प्रमुख की संस्था बना दिया क्यूंकि नागेश्वर राव भी अंतरिम चीफ नहीं रहे और वर्मा को भी कोई फैसला लेने का अधिकार नहीं हैं –

इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे और CBI में प्रभुत्व (Supremacy)की लड़ाई भविष्य में और गहराएगी — आज जैसे CVC, जिसकी निगरानी में CBI काम करती है, की रिपोर्ट पर भी सरकार को कोई निर्णय लेने के  अधिकार को नहीं माना गया –उससे तो कल को कोई भी CBI चीफ पूरी तरह तानाशाह बन कर सरकार की नाक में दम कर सकेगा क्यूंकि उसे पता होगा कि सरकार बिना चयन समिति से पूछे उसके खिलाफ कुछ कार्रवाई नहीं कर सकती.

अब मौजूदा चयन समिति में प्रधान मंत्री हैं, खड़गे जी है. कांग्रेस के नेता और चीफ जस्टिस हैं गोगोई साहब जिन्होंने फैसला दिया है –जाहिर है वो चयन समिति की मीटिंग में भी यही रुख रखेंगे और खड़गे तो हैं ही वर्मा के साथ -फिर वर्मा को किस बात का डर होगा जब 3 में 2 सदस्य उसके साथ होंगे.

अगर हर मामले में चयन समिति में जाना जरूरी हुआ तो कोई भी सरकार होगी वो पंगु हो कर रह जाएगी – सुप्रीम कोर्ट के इस नज़रिये से मैं सहमत नहीं हूँ –चयन समिति का काम केवल चयन कर अनुशंषा करना होता है और उसके बाद वो सरकार के नियम कायदों  के अनुसार काम करते हैं –
दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने से पहले क्या कपिल सिबल ने कॉलेजियम से इज़ाज़त मांगी थी –UPSC बड़े बड़े अधिकारियों की नियुक्ति की अनुशंषा करता है उसके बाद क्या सरकार को उससे पूछना चाहिए कि अनुशानात्मक कार्रवाई की जाये या नहीं –ऐसा नहीं होता -वो सरकार के कंडक्ट रूल्स के मुताबिक काम करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला निश्चित रूप से सरकार को मुसीबत में डालने वाला है जिसको देते हुए सभी पहलुओं पर विचार नहीं  किया गया लगता है -आज कांग्रेस खुश है कल वो भी परेशान हो सकते हैं अगर वो सरकार में हुए तो.

एक बात प्रमुख है इस फैसले के बारे में –सरकार ने भी कहा था कि वर्मा अभी भी CBI चीफ हैं, उन्हें पूरी सैलरी मिलती है बस सरकार उनसे काम नहीं ले रही –कोर्ट ने उसे बहाल नहीं किया –वो तो पहले से CBI चीफ हैं, कोई नई बात तो नहीं कर दी गई और कोर्ट ने भी उसे काम करने की इज़ाज़त तो नहीं दी — ये अभी भी सरकार पर निर्भर करेगा उससे ऑफिस में क्या काम ले –ले भी या ना ले –कोई फाइल उसे भेजी जाये या नहीं.

राहुल गांधी ने आज कहा है –कुछ न्याय तो हुआ –हाँ, इस विषय में तो कुछ न्याय हो गया –बस राफेल में कोर्ट ने न्याय नहीं  किया था -अलोक वर्मा अब भी,  राहुल जी, राफेल की शिकायत पर कुछ नहीं कर सकेगा 

(सुभाष चन्द्र)

—————————————————————————————————————–(न्यूज़ इंडिया ग्लोबल पर प्रस्तुत प्रत्येक विचार उसके प्रस्तुतकर्ता का है और इस मंच पर लिखे गए प्रत्येक लेख का उत्तरदायित्व मात्र उसके लेखक का है. मंच हमारा है किन्तु विचार सबकेहैं.)                                                                                                                               ——————————————————————————————————————