70 साल के तानाशाह चीन को टूटने की चेतावनी

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आज चीन 70 वर्ष पुराना वो तानाशाह देश है जिसने तानाशाही कायम करने के लिए अपने ही 5 से 10 करोड़ लोगों का खून बहा दिया था. दुनियां भर में अपना वर्चस्व स्थापित करना अब चीन का लक्ष्य बन चूका है .

मसूद अज़हर को बचा कर चीन पूरी तरह आतंक के साथ खड़ा हो गया है –ऐसा लगता है मसूद और पाकिस्तान के आतंकी गुट चीन में आतंक का तांडव मचा सकते जिससे डर कर वो मसूद को बचा रहा है .

जनवरी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (सीपीसी) के प्रभावशाली नेता हू डेपिंग ने अपनी पार्टी को सोवियत संघ के विघटन से सीख लेने की नसीहत दी है -डेपिंग ने आगाह किया कि उसी तरह की गलतियां ना दोहराई जाएँ जिनके चलते 1991 में सोवियत संघ ख़त्म हो गया था –डेपिंग का बयान ऐसे समय में आया जब अमेरिका के साथ जारी कारोबारी जंग के बीच चीन लगातार धीमी होती अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर जूझ रहा है.

हू डेपिंग ने कहा कि “सोवियत संघ की ओर से की गई घातक गलतियों में एक थी कि उन्होंने बेहद केंद्रीकृत सत्ता वाली सियासी व्यवस्था का पालन किया –हर समाजवादी ऐसा नहीं कर सकता –दूसरी गलती थी कि उन्होंने आर्थिक व्यवस्था सख्त रखी –इस तरह हर समाजवादी देश योजनाबद्ध अर्थ-व्यवस्था पर अमल नहीं कर सकता .

76 वर्षीय हू डेपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी को चेताया कि वो सक्रियता के साथ राजनितिक सुधार की संभावनाओं की तलाश करे -उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि मौजूदा हालात को ले कर पार्टी के अंदर असंतोष उभर रहा है —

हू डेपिंग सीपीसी के दिवंगत सुधारवादी महासचिव हू याओबांग के पुत्र हैं – डेपिंग पार्टी में सुधारवादी धड़े से ताल्लुक रखते हैं -लेकिन चीन उनकी बात सुनेगा ऐसा कम ही लगता है क्यूंकि उनके पिता की मौत पर हुआ था थियानमैन स्क्वेयर हत्या कांड जब 1989 में हज़ारों छात्र सड़कों पर उतर आये थे जिन पर बुलडोजर चढ़ा कर चीनी साम्यवाद सरकार ने दमनकारी कार्रवाई की थी – चीन ने उनके पिता की नहीं सुनी तो उनकी क्या सुनेगा.

तानाशाह हुकूमत का अंत होता जरूर है चाहे देर से ही हो –आज चीन और रूस के बाद उनकी नक़ल पर दमन करते हुए जितने भी देश कम्युनिस्ट बने, उनमे अधिकांश में अब कम्युनिज्म का खात्मा हो चूका है और अधिकांश अमेरिका के नेतृत्व वाली NATO के सदस्य हैं.

शी जिंगपिंग जिस महत्वकांशा के साथ भागने की कोशिश कर रहे हैं,उसे देख कर लगता है उसके कार्यकाल में चीन विखंडित हो जायेगा — जिंगपिंग को सत्ता की बागडोर आजीवन मिली हुई है -ये सबसे बड़ा सत्ता का केन्द्रीकरण  है जिसके खिलाफ डेपिंग आगाह कर रहे हैं –

चीन की बस 2 कमजोरियां हैं जो मैं पहले भी लिख चूका हूँ -उसका व्यापार और ताइवान –अभी अमेरिका ने उसके व्यापार में टांगअड़ाई है जिससे वो हिल गया है –अगर अन्य देश भी इस मार्ग पर चल पड़े तो चीन का अस्तित्व खतरे में पड़ जायेगा –दूसरा, जिस दिन विश्व के कुछ देश ताईवान से हाथ मिलाने आगे आ जायेंगे तो चीन के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है .

अब इन दोनों के अलावा एक कमजोरी और बन गई है चीन की और वो है उसका बुढ़ापा –मतलब चीन में 50 साल तक एक बच्चे की नीति के चलते चीन में अब युवाओं की संख्या बहुत कम है और चीन के लिए ये सबसे बड़ी चिंता का विषय है — भारत को युवा जीवित रखेंगे और चीन बुढ़ापा मारेगा .

(ये लेख 19/1/2019 के एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट पर आधारित है)

( सुभाष चन्द्र)

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