Rahul Gandhi के हालिया घोषणा-वाक्य — जिसे कांग्रेस ने प्रचार के रूप में “हाइड्रोजन बम” बताया — सोशल मीडिया और सर्च ट्रैफिक में अचानक बढ़ोतरी कर दी। कई पाठक यह जानना चाहते हैं कि असल में Hydrogen Bomb (हाइड्रोजन बम) क्या होता है, इसकी ताकत कितनी है और राजनीति में इस तरह के रूपकों का क्या असर होता है। नीचे तथ्यों के साथ एक संक्षिप्त लेकिन विस्तृत व्याख्या दी जा रही है।
हाइड्रोजन बम, जिसे थर्मोन्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, एक परमाणु हथियार है जो नाभिकीय फ्यूज़न (nuclear fusion) पर आधारित होता है। सूर्य और तारों में जो ऊर्जा निकलती है, उसका मूल कारण भी हाइड्रोजन-नाभिकों का एक साथ जुड़कर हीलियम बनना है — इसी प्रक्रिया की नकल बम में की जाती है। हालांकि यह प्रक्रिया बेहद उच्च तापमान और दबाव मांगती है, इसलिए थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस में इसे शुरू करने के लिए पहले एक परमाणु (फिशन) विस्फोट की ज़रूरत होती है, जो ट्रिगर का काम करता है।

तकनीकी तरीका — स्टेप बाय स्टेप
- ट्रिगर (फिशन) विस्फोट: छोटे स्तर का परमाणु बम (जैसे प्लूटोनियम या यूरेनियम आधारित) फटता है और अत्यधिक ताप व दबाव पैदा करता है।
- फ्यूज़न ईंधन: इस ताप के प्रभाव से हाइड्रोजन के आइसोटोप्स — ड्यूटेरियम और ट्रिटियम — एक दूसरे में मिलकर फ्यूज़न प्रक्रिया शुरू कर देते हैं।
- अनुक्रमिक प्रतिक्रियाएँ: फ्यूज़न के दौरान निकलने वाली ऊर्जा और न्यूट्रॉन अन्य घटकों को सक्रिय कर और बड़े पैमाने पर विनाश पैदा कर सकती है।
इस संयोजन के कारण थर्मोन्यूक्लियर हथियार की शक्ति अक्सर पारंपरिक परमाणु हथियारों से कई गुना अधिक होती है।
ताकत और प्रभाव
हाइड्रोजन बम की शक्ति को आमतौर पर TNT के बराबर टन में मापा जाता है — इसकी मक़ान दर कई किलोटन (kt) से लेकर मेगाटन (Mt) तक हो सकती है। उच्च-यील्ड थर्मोन्यूक्लियर हथियार बड़े शहरों को तुरंत नष्ट कर सकते हैं, और इसके तुरंत बाद गर्मी-तरंग, दबाव-तरंग, और रेडिएशन (आयनकारी विकिरण) के व्यापक मानवीय-अपरिवर्तनीय प्रभाव सामने आते हैं। क्षेत्रीय और वैश्विक पर्यावरणीय प्रभाव, रेडिएशन फैलाव और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ भी गंभीर रहती हैं।
https://youtu.be/e6jr01ZISVY?si=vAgiQykFp9iLtoII
राजनीति में ‘हाइड्रोजन बम’ शब्द का उपयोग — क्या होता है?
राजनीति में जब कोई नेता या पार्टी “हाइड्रोजन बम” जैसा रूपक इस्तेमाल करती है तो उसका आशय आम तौर पर किसी बड़े, चौंकाने वाले खुलासे या बेहद प्रभावशाली राजनीति कदम से होता है — न कि वास्तविक हथियार-प्रयोग से। ऐसे शब्द शक्तिशाली प्रतीकात्मक असर पैदा करते हैं और मीडिया-ध्यान खींचते हैं, लेकिन वास्तविक सुरक्षा या सैन्य सक्षमताओं के साथ इनका मेल नहीं होता। हालिया मामलों में भाजपा और विपक्ष ने इस तरह के बयानबाज़ी पर तीखी प्रतिक्रियाएँ भी दी हैं, जिससे शब्द-युद्ध तेज़ हुआ।






