नेपाल ने भारत को छोड़ा, अब चीन में छपेगी नोट लगने लगा ‘made in China’ का ठप्पा

On: November 14, 2025 6:05 PM
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नेपाल ने भारत को छोड़ा

नेपाल ने भारत को छोड़ा दशकों तक अपनी करेंसी छपवाने के लिए भारत पर निर्भरता रखी थी, लेकिन अब उसके नोटों पर ‘मेड इन चाइना’ का ठप्पा लगना एक बड़ा राजनीतिक और आर्थिक विषय बन गया है। साल 2015 तक नेपाल की करेंसी भारत में छपती थी, लेकिन कुछ कारणों से उसने यह फैसला बदल दिया। सबसे बड़ी वजह थी चीन द्वारा टेंडर में कम बोली और उन्नत तकनीक का प्रस्ताव, जिससे नोट छपाई सस्ती और अधिक सुरक्षित हो गई।

नेपाल की करेंसी पर चीन के ‘मेड इन चाइना’ का ठप्पा लगने का सबसे बड़ा राजनीतिक कारण सीमा विवाद है। नेपाल ने अपने नए मुद्रा नोटों पर भारत के सीमावर्ती इलाकों जैसे लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपने में दर्शाया, जो भारत के लिए स्वीकार्य नहीं था। इस विवाद के कारण भारत ने अपनी सुरक्षा प्रेस में नोट छापने से इनकार कर दिया। नेपाल ने विकल्प के तौर पर चीन को चुना, जिसने इसकी छपाई का ठेका कम कीमत और बेहतरीन सुरक्षा तकनीक के साथ हासिल कर लिया।

चीन की सरकारी संस्था, चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन (CBPMC), अब नेपाल की करेंसी के डिजाइन, प्रिंटिंग, और सप्लाई का जिम्मा संभाल रही है। यह कंपनी पूरी दुनिया में करेंसी प्रिंटिंग की सबसे बड़ी और उन्नत तकनीक वाली कंपनियों में से एक है। नेपाल ने CBPMC को हाल ही में लगभग 430 मिलियन नोट छापने का ठेका दिया, जिसका मूल्य लगभग 17 मिलियन डॉलर है। इस कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में नेपाल के लिए कुल करीब 2.38 बिलियन नोट छापे हैं।

नेपाल की अपनी नोट छपाई की क्षमता बहुत सीमित है, इसलिए वह बड़ी विदेशी कंपनियों पर निर्भर है। चीन ने इस काम में सुरक्षा फीचर्स जैसे कि होलोग्राम, माइक्रो प्रिंटिंग, कलर शिफ्टिंग इंक आदि का इस्तेमाल किया है, जो नोटों को नकली बनाना मुश्किल बनाते हैं। चीन की तकनीक और सस्ते दाम नेपाल के लिए इसे सबसे बेहतर विकल्प बनाते हैं।

यह बदलाव भारत-नेपाल के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव और चीन की बढ़ती वैश्विक मुद्रा छपाई से जुड़ी ताकत का संकेत है। नेपाल जैसे छोटे देशों के लिए चीन जैसे बड़े और तकनीकी रूप से उन्नत देश पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे चीन की दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ रहा है।

यह तथ्य स्पष्ट करता है कि नेपाल की करेंसी पर ‘मेड इन चाइना’ क्यों लग रहा है — यह सिर्फ आर्थिक बचत और तकनीकी उन्नति का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और क्षेत्रीय रणनीति का भी हिस्सा है। इससे भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियां और बदलाव देखे जा रहे हैं, जबकि चीन अपनी मुद्रा प्रिंटिंग क्षमता के जरिए क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा रहा है।

इस संबंध में नेपाल की मुद्रा छपाई की पूरी कहानी आर्थिक, राजनीतिक, और सुरक्षा कारणों से गूढ़ और दिलचस्प है, जो आने वाले वक्त में भी रणनीतिक महत्व रखेगी।

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