PAK Army की चुप्पी टूटी! ब्रह्मोस अटैक पर 7 अहम सच सामने आए

पाकिस्तान की सेना यानी PAK Army ने आखिरकार चुप्पी तोड़ दी है। सात महीने पहले जो हमला रहस्य बनकर रह गया था, अब उस पर पाकिस्तान ने पहली बार खुलकर बात की है। बताया जा रहा है कि भारत की सुपरसोनिक BrahMos Missile Strike ने रावलपिंडी स्थित Noor Khan Airbase को निशाना बनाया था। इस स्ट्राइक का कोड नाम था — “ऑपरेशन सिंदूर”, जो अब धीरे-धीरे चर्चा में आ रहा है।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भले ही नया नहीं हो, लेकिन इस बार की घटना ने दोनों देशों के बीच के सुरक्षा समीकरण को फिर से हिला दिया है। भारत ने जहां इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, वहीं पाकिस्तान की सेना की यह मान्यता अपने आप में बड़ा संकेत है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
सूत्रों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक गुप्त सैन्य कार्रवाई थी, जो जून 2025 में की गई थी। इसका उद्देश्य था पाकिस्तान की सीमा के भीतर मौजूद कुछ आतंकवादी ठिकानों और अवैध हथियार भंडार को खत्म करना। भारत ने इस मिशन को इतनी सटीकता और तकनीकी कुशलता से पूरा किया कि PAK Army को इसका अंदाजा तक नहीं हो पाया जब तक कि मिसाइलें अपने लक्ष्य पर नहीं पहुंच गईं।
कहा जा रहा है कि ब्रह्मोस मिसाइल को राजस्थान सेक्टर से लॉन्च किया गया था और यह कुछ ही मिनटों में अपने लक्ष्य तक पहुंच गई। मिसाइल ने Noor Khan Airbase के जिस हिस्से को निशाना बनाया, वो पाकिस्तान एयर फोर्स का एक अहम ऑपरेशनल जोन था। इस हमले में कुछ विमान और सैन्य सामान नुकसान की चपेट में आए।

पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया
उस समय पाकिस्तान की ओर से कहा गया था कि एयरबेस पर “तकनीकी गड़बड़ी” के कारण विस्फोट हुआ। इस बयान पर किसी ने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन अब जबकि PAK Army के प्रवक्ता ने पहली बार माना है कि “बाहरी मिसाइल” ने एयरबेस को निशाना बनाया था, सच्चाई सामने आने लगी है।
यह स्वीकारोक्ति पाकिस्तान के भीतर हलचल मचा रही है। वहां की विपक्षी पार्टियां अब पूछ रही हैं कि सेना ने इतने महीनों तक जनता से यह सच क्यों छिपाया। वहीं सोशल मीडिया पर #PAKArmyExposed और #BrahMosStrike2025 जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।
भारत की रणनीतिक चुप्पी
भारत ने इस पूरे मामले पर न तो स्वीकार किया है और न ही कोई बयान जारी किया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने इस हमले की जिम्मेदारी न लेकर एक समझदार रणनीति अपनाई है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत की नीति रही है — “कहने से ज्यादा करने की।”
भारत के रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वास्तव में यह ब्रह्मोस स्ट्राइक थी, तो यह एक बड़ा संदेश है कि भारत अब अपनी सीमाओं में नहीं, बल्कि उनके पार जाकर भी कार्रवाई करने में सक्षम है।
नूर खान एयरबेस क्यों अहम था?
Noor Khan Airbase, पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों में से एक है। यहां से VVIP मूवमेंट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट ऑपरेशन संचालित किए जाते हैं। इसी आधार पर यह हमेशा भारत की निगरानी में रहता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस एयरबेस के करीब कुछ ऐसे ठिकाने थे जहां आतंक से जुड़े तत्व प्रशिक्षण और हथियार सप्लाई का काम करते थे। यही कारण था कि भारत की खुफिया एजेंसियों ने इसे संभावित निशाने के रूप में चिह्नित किया।
PAK Army की प्रतिष्ठा पर सवाल
PAK Army News Today बताता है कि इस घटना के बाद पाकिस्तानी सेना की साख पर गहरा असर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगे हैं कि पाकिस्तान अपनी सीमा की सुरक्षा किस हद तक कर सकता है।
आम जनता के बीच भी अब गुस्सा देखा जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग सैन्य नेतृत्व से सवाल पूछ रहे हैं कि अगर भारत की मिसाइलें आपके देश तक बिना रोके पहुंच सकती हैं, तो आपकी रडार सिस्टम की उपयोगिता क्या है?
कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना पाकिस्तान के एयर डिफेंस नेटवर्क की बड़ी विफलता है।
मीडिया का रुख और राजनीतिक हलचल
Pakistan News Today Live के अनुसार, संसद में अगले हफ्ते इस मुद्दे पर बहस होनी तय है। विपक्ष का कहना है कि अगर हमला हुआ था, तो सरकार और सेना ने इसे जनता से छिपाकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के नाम पर उन्हें गुमराह किया।
इसी बीच कुछ मीडिया चैनलों ने “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ी उपग्रह तस्वीरें और विश्लेषण प्रकाशित किए हैं, जिनमें एयरबेस पर हुए नुकसान के निशान दिखाई दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान का अप्रत्यक्ष समर्थन किया है। जबकि अमेरिका और रूस दोनों ने “स्थिति की निगरानी” की बात कही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत की कूटनीतिक सफलता है कि उसने बिना बयान दिए ही अपना संदेश दुनिया तक पहुंचा दिया।
दक्षिण एशिया में अब शक्ति संतुलन साफ तौर पर भारत की ओर झुकता दिखाई दे रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर “ऑपरेशन सिंदूर” वास्तव में भारत का मिशन था, तो इसका लक्ष्य सीमित लेकिन सटीक था। इसने पाकिस्तान को बिना बड़े युद्ध में उलझे सैन्य संदेश दे दिया।
यह वही रणनीति है जिसे आधुनिक देश “डिनायल स्ट्राइक” कहते हैं — यानी ऐसी कार्रवाई जो स्पष्ट रूप से स्वीकार ना की जाए लेकिन जिस का प्रभाव पूरी तरह महसूस हो।
आगे क्या?
अब सवाल यह है कि पाकिस्तान इसका जवाब कैसे देगा। अतीत में जब जब पाकिस्तान पर ऐसे हमले या दबाव आए हैं, उसने बातचीत का रास्ता अपनाया है। मगर इस बार की स्थिति अलग है। जनता अब सरकार और PAK Army दोनों से जवाब चाहती है।
वहीं दूसरी ओर भारत अपने रुख पर कायम है — कोई बयान नहीं, बस परिणाम।
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