Dhaka Meet: ढाका में पाकिस्तानी स्पीकर और जयशंकर की मुलाकात, यूनुस ने साझा की खास तस्वीरें

दक्षिण एशिया की राजनीति में इन दिनों चर्चा का सबसे बड़ा विषय रही है “Dhaka Meet” — यानी बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई एक ऐतिहासिक मुलाकात, जिसने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्तों में नए संकेत पैदा कर दिए हैं। इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और पाकिस्तान संसद के स्पीकर आमने-सामने आए। इस मुलाकात की तस्वीरें नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने सोशल मीडिया पर शेयर कीं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया और ट्विटर पर #DhakaMeet trend करने लगा।
भारत-पाक संबंध?
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे वक्त से रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन Dhaka Meet 2025 को कई विशेषज्ञ एक “positive diplomatic gesture” के रूप में देख रहे हैं। जयशंकर और पाक संसद स्पीकर के बीच यह मुलाकात किसी औपचारिक सम्मेलन का हिस्सा नहीं थी, परंतु कूटनीति में इस तरह के “informal moments” अक्सर भविष्य के संबंधों को दिशा देते हैं। जयशंकर ने इस दौरान कहा कि “दक्षिण एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी देश सहयोग की भावना से आगे बढ़ें।”
यूनुस की पोस्ट ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय सुर्खियाँ
Bangladesh Nobel laureate Muhammad Yunus ने इस पूरी मुलाकात की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा करते हुए लिखा कि “ढाका में आज इतिहास बनते देखा।” यूनुस की इन viral photos from Dhaka Meet ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींच लिया।
Twitter, Instagram और Facebook पर “Jaishankar with Pak Speaker”, “Dhaka Diplomacy” और “New beginning in South Asia” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
Dhaka Visit में क्या हुआ?
जयशंकर इन दिनों Bangladesh Visit 2025 पर हैं, जहाँ वे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी मुलाकात कर चुके हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग और व्यापारिक समझौतों पर चर्चा करना था। इसी कूटनीतिक दौरे के दौरान Pak Parliament Speaker भी ढाका में मौजूद थे, जहाँ यूनुस के एक आयोजन में दोनों एक साथ नजर आए।
कार्यक्रम का माहौल बेहद सौहार्दपूर्ण रहा। जयशंकर ने भारत की ओर से “नेबरहुड फर्स्ट” नीति पर जोर दिया, जबकि पाक स्पीकर ने भी क्षेत्रीय एकता पर अपने विचार रखे। जिस तरह दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे का हाथ मिलाया, वह तस्वीर अब symbol of peace के रूप में देखी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय: संकेत बदल रहे हैं?
विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि यह Dhaka diplomatic meeting भले ही औपचारिक बातचीत न हो, लेकिन यह “warming signals” भेजती है। यूनिवर्सिटी ऑफ ढाका के प्रोफेसर रहमान का कहना है — “Jaishankar और पाक स्पीकर की यह handshake diplomacy बताती है कि एशिया में अब soft signals की अहमियत बढ़ गई है।”
पाकिस्तानी मीडिया में भी इस मुलाकात को “unexpected yet hopeful moment” बताया गया है। जबकि भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक moments भविष्य में larger dialogues का रास्ता खोल सकते हैं।
ढाका मीट से बांग्लादेश की भूमिका मजबूत
बांग्लादेश इस पूरे परिदृश्य में एक “bridge nation” की भूमिका निभा रहा है। यूनुस की उपस्थिति और पूरी घटना के ढाका में घटने से यह स्पष्ट है कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बांग्लादेश अब एक neutral diplomatic platform बनता जा रहा है।
इस मीटिंग के बाद बांग्लादेशी अखबारों में “Dhaka Meet marks turning point for South Asian diplomacy” जैसी सुर्खियाँ देखने को मिल रही हैं।
क्या बदलेगा आगे का समीकरण?
कूटनीति में handshake या फोटो-ऑप का भी बड़ा महत्व होता है। पिछली बार जयशंकर और पाक प्रतिनिधि एक ही मंच पर 2021 में देखे गए थे, जब दोनों ने ASEAN Summit के दौरान एक-दूसरे को औपचारिक बधाई दी थी।
इस बार की मुलाकात को न केवल স্থানীয় बल्कि वैश्विक मीडिया ने भी कवरेज दिया। कई अंतरराष्ट्रीय पोर्टलों ने लिखा — “Dhaka Meet shows hope for peace in South Asia.”
India Pakistan relations लंबे समय से संघर्षों और वैचारिक मतभेदों से प्रभावित रहे हैं। लेकिन हमारी सीमाओं के पार भी लोग यही चाहते हैं कि संवाद जारी रहे। इस मुलाकात ने यही संदेश दिया है — “Peace through people, not politics.”
“Dhaka Meet 2025” सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई देशों के लिए उम्मीद की एक नई कहानी है। जयशंकर और पाक स्पीकर की तस्वीरें कूटनीति के इतिहास में एक नई लाइन लिख सकती हैं। चाहे यह संयोग हो या संकेत — यूनुस की तस्वीरें अब symbol of dialogue and regional cooperation बन चुकी हैं।
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