किसानों को कर्ज माफ़ी : अंदर की असल कहानी!

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उत्तरप्रदेश के एक बहुत बड़े भूभाग में यह मुहावरा “उठाई जुबान दै मारी” उस लफ्फाज की लफ्फाजी के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है जो बिना सोचे समझे हुए उल्टे सीधे दावे या वायदे करता है।

अब बात मुद्दे की. ध्यान रहे कि किसी भी कर्ज़ माफ़ी की प्रक्रिया में कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पारित करने के पश्चातआदेश जारी किया जाता है। पारित किए गए प्रस्ताव में माफ किये गए कर्ज की राशि, कर्ज़ माफ़ी का लाभ लेने वाले की पात्रता के नियम, कर्ज़ माफ़ी के लाभार्थियों की संख्या तथा कर्ज़ माफ़ी की रकम के प्रबंध के स्त्रोत का विस्तृत विवरण होता है। इसमें मुख्य भूमिका राज्य के वित्तमंत्री की होती है। प्रस्ताव वही तैयार करता है।

कर्ज़ माफी तब होती है। जबकि अभी मप्र छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वित्तमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिमंडल का गठन तो दूर, चुने गए विधायकों का शपथग्रहण तक नहीं हुआ है लेकिन तीनों मुख्यमंत्रियों ने अपनी #उठाईजुबानदैमारी_ और कर्ज माफी का ऐलान कर दिया। यह नहीं बताया कि कर्ज़ कैसे और कहां से माफ़ करेंगे.? क्योंकि केवल 6 माह पूर्व राजस्थान के किसानों का 8 हज़ार करोड़ का कर्ज माफ करने के लिए वसुंधरा राजे सरकार ने बैंकों से 6 हज़ार करोड़ का कर्ज मांगा था जो बैंकों ने नहीं दिया था।

इसी वर्ष सितम्बर/अक्टूबर में मप्र के हर अखबार में यह समाचार प्रमुखता से प्रकाशित हुए थे कि इस वित्तीय वर्ष में सरकार के पास कोष में केवल इतना धन है कि वो केवल कर्मचारियों का वेतन दे सकेगी। सम्भवतः इसीलिए आरपार की चुनावी लड़ाई लड़ रहे शिवराज सिंह ने कर्ज़ माफ़ी का चुनावी वायदा नहीं किया था। हालांकि उनकी यह ईमानदारी उनको भारी पड़ गयी।

अतः राजस्थान में अशोक गहलौत किसानों की कर्ज़ माफ़ी के लिए लगभग एक लाख करोड़ रूपये की रकम तथा मध्यप्रदेश में कमलनाथ लगभग 60 हज़ार करोड़ की रकम कहां से और कैसे लाएंगे – इसका कोई जिक्र दोनों मुख्यमंत्रियों के आदेशों में नहीं है। बस दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपनी #जुबानउठाकरदैमारीहै

अन्त में अपनी बात एक उदाहरण देकर समझाता हूँ –

उप्र में 19 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 15 दिन पश्चात हुई अपने मंत्रिमंडल की पहली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पारित होने के पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तरप्रदेश के किसानों का कर्ज माफ़ करने का आदेश जब दिया था तब उस प्रस्ताव में उस कर्ज़ माफ़ी की प्रक्रिया का हर सूक्ष्म विवरण भी दर्ज था। इसीलिए लगभग 86 लाख किसानों को तत्काल उसका लाभ मिला था। एक महीने में उनकी कर्ज़ अदायगी का पैसा सीधे उनके कर्ज़ खाते में पहुंच गया था।

शपथग्रहण करने के पश्चात यह घोषणा करने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 दिन लगाए ही इस कारण थे ताकि पूरा अध्ययन कर के, समस्या के समाधान के विकल्प तलाशने के बाद ही घोषणा की जाए। इसीलिए शपथग्रहण के कुछ घण्टों बाद ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने #उठाईजुबानदैमारी_ वाली शैली में कर्ज माफी की लफ्फाजी नहीं की थी। इसी के परिणामस्वरूप कहीं कोई विरोध की आवाज़ सुनाई नहीं दी थी। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि चुनाव अभियान के दौरान जो घोषणा/वायदा किया गया था, कर्ज़ माफ़ी उसी के अनुसार की गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कर्ज़ माफ़ी का आदेश देते समय उसमें दर्जन भर नईं शर्तें नहीं थोपीं थी।

(सतीश चंद्र मिश्रा)

—————————————————————————————————————–(न्यूज़ इंडिया ग्लोबल पर प्रस्तुत प्रत्येक विचार उसके प्रस्तुतकर्ता का है और इस मंच पर लिखे गए प्रत्येक लेख का उत्तरदायित्व मात्र उसके लेखक का है. मंच हमारा है किन्तु विचार सबकेहैं.)                                                                                                                               ——————————————————————————————————————