आज का चतुर भारत सुनहरे भविष्य की ओर

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भारत दुनिया का एकमात्र चतुर देश है जो 15 फरवरी को अरब देशों को कम्युनल कहता है और 16 फरवरी को उनके साथ व्यापारिक समझौता कर लेता है।
मुस्लिम देशों का एक संगठन है OIC, इसमे दादागिरी दो देशों की मुख्य रूप से चलती है एक सऊदी अरब दूसरा संयुक्त अरब अमीरात।
मैं अमीर और गरीब मुसलमान पर विस्तार से लिख चुका हूं उसका लिंक नीचे है। फिलहाल आप ये समझ लीजिये कि अमीर मुसलमान वो है जिसे इस्लाम से कोई लेना देना नही है लेकिन वो इस्लाम का मास्क पहनता है उदाहरण सऊदी, अमीरात, ओमान के शेख। वही गरीब मुसलमान वो है जिसके पास पैसे और शिक्षा का अभाव है मगर वो इस्लाम को ही सबकुछ मानता है उदाहरण पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश के मुसलमान।
अमीर मुस्लिम देश यह जानते है कि शरिया पर चलकर समृध्दि नही मिलेगी, इसलिए उन्होंने टैक्स लगाने शुरू कर दिये महिलाओ को अधिकार देने आरंभ किये है। लेकिन ये मुस्लिम देशों का प्रतिनिधित्व करना चाहते है क्योंकि क्लास का मॉनिटर कौन नही बनना चाहता।
इसलिए ये देश जब भी OIC की मीटिंग होती है तो थोड़ी अमेरिका, भारत और इजरायल की बुराई कर देते है। इससे गरीब मुसलमान खुश हो जाता है कि चलो हमारे आका ने कौम की बात की। फिर जैसे ही ये शेख OIC की बेंच से खड़े होते है ये वाशिंगटन, दिल्ली और येरुशलम को प्रेमपत्र लिख देते है।
ये वो देश है जो जान गए है कि तेल पर देश नही चलेगा कुछ ही वर्षो में इलेक्ट्रिक कारें दौड़ेंगी, वही गरीब मुसलमान सोच रहा है कि ऊपरवाला टेस्ला और रतन टाटा को असफल कर देगा और इनके आका अमीर बने रहेंगे। ये शिक्षा और सोच का अंतर है।
ये अरब देश तेल का विकल्प निकाल चुके है, सन 2000 से 2010 के बीच इन्होंने न्यूयॉर्क में जमकर होटल खरीदे, 2011 से 2020 तक इन्होंने लंदन के इंफ्रास्ट्रक्चर में पैसे लगाए और अब 2021 से 2030 के लिये इनकी नजर दिल्ली मुंबई पर है।
दुबई के एमार ग्रुप ने कश्मीर में सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल बनाने का कॉन्ट्रैक्ट किया है, सऊदी अरब भारत की तेल कंपनियों से साझेदारी में लगा है, सऊदी अरब और ओमान के सेनाध्यक्ष पिछले दो महीनों में बारी बारी दिल्ली के चक्कर लगा चुके है। सबको दिल्ली से कुछ ना कुछ चाहिए या फिर राजनाथ सिंह और सुब्रमण्यम जयशंकर का थोड़ा समय चाहिए।
जब भी OIC की मीटिंग होती है तो संयुक्त अरब अमीरात कश्मीर के मुद्दे पर एक दो बयान देता है फिर दो दिन बाद राष्ट्रीय स्तर पर अबु धाबी से किसी डेलीगेट को दिल्ली भेजकर एक कॉन्ट्रैक्ट बना लेते है। भारत ने 15 फरवरी को OIC को पहले साम्प्रदायिक कहकर ठेंगा दिखा दिया और फिर अगले ही दिन संयुक्त अरब अमीरात से 100 अरब डॉलर की डील का प्रस्ताव रख दिया।
इसके अलावा भारत यूएई और ब्रिटेन दोनो से ही फ्री ट्रेड अग्रीमेंट के प्रोजेक्ट में लगा है। इस वर्ष आप देखेंगे कि भारत का निर्यात 600 अरब डॉलर क्रॉस करेगा, यदि लंदन और आबू धाबी से डील पक्की हुई तो आप 2023 मे देखेंगे कि हम बड़ी आसानी से 700 अरब डॉलर पार कर जाएंगे।
उस पर मैं कोई अन्य लेख लिखूंगा फिलहाल यूएई और अरब देशों के तथाकथित दोगलेपन को समझिये की भूराजनीति किस तरह फंक्शन करती है। भारत का दुश्मन गरीब मुसलमान है अमीर मुसलमान के लिये तो भारत एक सट्टा बाजार है।
अमीर मुसलमान को दिल्ली मुंबई में किसी तरह निवेश करना है और लाभ में हिस्सेदारी लेनी है हिजाब, सूर्यनमस्कार, योग दिवस, राम मंदिर इन सभी से इस्लाम की देखभाल करने के लिये गरीब मुसलमान पहरेदारी कर रहा है।