उपनिषद का ज्ञान अब सभी के लिये सुलभ, अटेन्ड कीजिये कक्षायें

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“जीवन दर्शन का स्वतंत्र ज्ञान ही उपनिषद है|”
आज मैं फेसबुक पर कोई जानकारी ढूंढ रही थी तो अचानक मेरी आँखों के आगे एक विज्ञापन आ गया। उपनिषदों के विषय में था, गर्व हुआ।
उपनिषदों की पढ़ाई कराई जा रही है जिसके लिए आप ऑनलाइन नामांकन करा सकते हैं। गुरुकुल परंपरा के समाप्त होने के बाद यह एक अच्छी पहल होगी| इच्छुक लोग इ लिंक का उपयोग करके इन कक्षाओं की सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
https://www.bhishmaindics.org/upanishad-lp
पूरा कोर्स 3600 रुपए में करवाया जा रहा है । पुणे से ऑनलाइन कक्षाएं सवा घंटे के लिए ली जाएंगी और ज़ूम पर व्यवहारिक कक्षाएं भी समय-समय पर 25 घण्टे तक चलेंगी जिसका अभ्यास काल लगभग एक मास तक चलेगा |
आज के संदर्भ में इस प्रकार की कक्षाओं की आवश्यकता है । गुरुकुल परंपरा के समाप्त  होने के कारण हमारा अपनी संस्कृति और सभ्यता से जो नाता टूट चुका है वह इन कक्षाओं के माध्यम से फिर से जुड़ेगा। इसके पश्चात हम जब किसी से चर्चा करेंगे तो उचित जानकारी का अभाव नहीं होगा | यह एक सार्थक व सराहनीय कार्य है।    अभी तो हमारे पास जानकारी का अभाव होने से हम अपने बालकों को भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते हैं| इससे  लाभ होगा और हम अपने ज्ञान और जिज्ञासाओं की पूर्ति कर पाएंगे।
इसी प्रकार की एक अन्य संस्था देहरादून में है , “मानव कल्याण केंद्र|” यहाँ कन्याओं को संस्कृत के साथ अन्य विषय भी पढ़ाये जाते हैं इंग्लिश और कंप्यूटर भी| जिससे कन्याओं का सर्वांगीण विकास हो सके| पीएचडी करने तक वे यहाँ रह सकती हैं | फिर किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या गैर – प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा उत्तीर्ण कर इच्छानुसार जीवन-पथ पर अग्रसर हो सकती हैं|
यहाँ आप सभी को बताना चाहूँगी कि बहुमुखी प्रतिभा की धनी हमारी पूर्व विदेश मंत्री सुश्री सुषमा स्वराज जी (स्वर्गीय) ने संस्कृत में व्याख्यान देकर विश्व रिकॉर्ड बनाया  था जो जस का तस है| दक्षिण भारत के मात्तुर गांव में केवल संस्कृत ही सवांद की भाषा है|
संस्था की प्राचार्या डॉ अन्नपूर्णा जी समर्पित महिला हैं जो मूल रूप से उड़ीसा की हैं| वे उड़ीसा,बंगाल व बिहार से गरीब परिवारों की बच्चियों को भविष्य बनाने हेतु प्रयासरत हैं|
लगभग इससे मेल खाती एक संस्था के बारे में लखनऊ में,गुजरात स्थित साबरकांठा के योग विद्यालय व  मध्यप्रदेश में भी सुन चुकी हूँ |
सभी के प्रयास सराहनीय हैं , ईश्वर से प्रार्थना है कि हमारी संस्कृति और संवाहक संस्थाओ की शाखाएँ सम्पूर्ण विश्व में खुले जिससे सनातन का परचम एक बार फिर से लहराए |