अब योगीराज है उत्तर प्रदेश में, गुन्डाराज नहीं !

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यह सोशल मीडिया पोस्ट हमारी आंखें खोलने के पर्याप्त है कि यूपी में पहली बार सरकार-राज है, गुन्डाराज नहीं! 
दरअसल यूपी और योगी जी को लेकर जितनी भी अफवाहें और भ्रम फैलाया जा रहा इसके पीछे विरोधी गैंग का डर है, उन्हें डर है कि यदि इस बार योगी जी दोबारा ताबड़तोड़ बहुमत से यूपी की सत्ता पर बैठ गए तो आने वाले समय में वे PM पद के सबसे मजबूत दावेदार बन जाएंगे और किसी में हिम्मत नहीं होगी कि ऐसे में उनसे पार पा सकें…
वरना सोचिये…जिस भगवाधारी ने पिछले 4 सालों में यूपी को 30 मेडिकल कॉलेज की सौगात दी हो उसकी चर्चा न होना क्या बतलाता है?
लॉक डाउन के बावजूद पिछले दिनों में यूपी में निवेशकों ने 66 हज़ार करोड़ निवेश किये…निवेश का अर्थ समझते हैं? वहाँ अब अपराधियों का ख़ौफ़ नहीं रह गया, हफ्ता वसूली गैंग लापता हो गयी है…सर्वविदित है कि कोई भी निवेशक किसी जगह तभी पैसा लगाता है जब वहां व्यापार की सुगमता और सुरक्षा पुख़्ता हो..
किसी दौर में पुलिस आज़म खान की भैंस खोजा करती थी…आज आज़म खान खोजे नहीं मिल रहे…यह किया है योगी जी ने..
चीनी वायरस के प्रकोप से आरंभिक दिनों में मची अफरा तफ़री को यदि छोड़ दें तो इस महामारी से लड़ने में भी योगी जी देश के सबसे सफल CM रहे…आँकड़े बोलते हैं।
ट्रांसफर, पोस्टिंग, अवैध ठेके आदि में भी योगी जी ने ही लगाम लगाई है जिससे उनकी ही पार्टी के कुछ नेता चिढ़े बैठे हैं…
2022 में यूपी में योगी की वापसी क्यों महत्वपूर्ण है वह आपको 2024 के चुनावों के समय पता चलेगी…
बिसात बिछ चुकी है…अब यूपी वालों के ऊपर है कि वे जातियों में बंटकर अपना बंटाधार करते हैं या समझदारी का परिचय देते हुए एकजुट होकर उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाते हैं..
हिन्दुओं को बाटने कि कोशिश शुरू हो चुकी है, भेड़ की खाल में भेड़िये मैदान में उतर चुके है
सावधान रहे, हर भगवा धारी सनातनी नहीं होता खास तौर पर वह जो अभद्र भाषा का उपयोग  करता हो-
“Language is the blood of the soul into which thoughts run and out of which they grow.”

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