Afghanistan : तालिबानी सरकार का सरदार बनेगा अब्दुल गनी बरादर

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चुनी सरकार से सत्ता छीन कर बन रही Afghanistan की कटटर और कठोर सरकार अब अपने सरकारी आकार में सामने आने जा रही है. इसके बाद अब आने वाले दिनों में तख्ता पलट का तरीका कैसा भी हो, किसी देश में जबरन सरकार बना लेने वालों को दुनिया चुपचाप समर्थन दे देगी जैसा तालिबान को मिल रहा है. चुप्पी का एक अर्थ हाँ भी होता है और वास्तविकता में तो प्रायः हाँ ही होता है. उम्मीद के मुताबिक़ मुल्ला अब्दुल गनी बरादर (Mullah Abdul Ghani Baradar) ने अफगानिस्तान की सरकारी बागडोर अपने हाथ में थाम ली है.

कोई विवाद नहीं हुआ

कट्टरपंथी ताकतों की एक खासियत ये भी है कि वे दुनिया के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाते हैं लेकिन आपस में एक रहते हैं. इस बार सत्ता नामका सबसे बड़ा लालच भी इस खून-कतल करने वाली गैंग को आपस में नहीं लड़ा पाया. पैसा और पद, सत्ता या शोहरत -तालिबानियों को किसी चीज़ का लालच आपस में एक-दूसरे से भिड़ा नहीं सकता. इस एक खासियत ने ये तो जाहिर कर दिया है कि जिस तरह से तालिबान ने तख्ता-पलट किया है इस देश में वैसा तख्ता-पलट कोई दूसरा उनके खिलाफ नहीं कर पायेगा.

मीडिया पर भी है तालिबानी लगाम

ज़ाहिर सी बात है कि तालिबान में जहां हर चीज़ पर लगाम है तालिबान की वहां मीडिया कैसे मुँहजोरी कर सकता है. गुलाम मीडिया अब तालिबानी मीडिया कहलायेगा. विदेशी मीडिया अब इस मुल्क से बारह पत्थर बाहर कर दिया गया है. और जो रह गया है वो वही बोलेगा जो तालिबान बोलेगा. ऐसे में अफगानिस्तान से सूत्रों ने खबर दी है कि मुल्ला बरादर है अब तालिबान की सरकारी बटालियन का अफसर.

लागू हो गया है शरीया

अब कट्टरपंथी शरीया वाले अफगानिस्तान में अब चौवन साल का मुल्ला बरादर राष्ट्रपति पद पर काबिज होने जा रहा है. मुल्ला उमर के साठ तालिबान के सह-संस्थापकों में से एक था मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को साल 2010 में दक्षिणी पाकिस्तानी शहर कराची में सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया था. बाद में अभी लगभग दो साल से अमेरिका के साथ दोहा में शांतिवार्ता के लिए तालिबानी दल का नेतृत्व बरादर के हाथ में ही रहता था.

अखुन्जादा बनेगा देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता

ईरान में भी यही होता है. देश का सर्वोच्च धार्मिक नेता देश में भी सर्वोच्च होता है और सरकार में भी. कहने को तो राष्ट्रपति को सर्वोच्च दर्जा मिलता है पर धार्मिक नेता की हैसियत उससे भी बड़ी होती है. नई सरकार में 60 वर्षीय मुल्ला अखुंदजादा तालिबान सरकार का सर्वोच्च धार्मिक नेता बनाया जा रहा है. नेतृत्व की तर्ज पर की गई इस व्यवस्था में जहां सर्वोच्च नेता देश का सबसे बड़ा राजनीतिक और धार्मिक अधिकारी होता है, उसे राष्ट्रपति से ऊपर की इज्जत हासिल होती है. देश की सेना, सरकार तथा न्याय व्यवस्था के प्रमुखों की नियुक्ति वही करता है. इसी तरह राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य मामलों में देश के इस सर्वोच्च धार्मिक नेता का फैसला आखिरी होता है.

मुल्ला अखुन्जादा की काबिलियत

अखुन्जादा की काबिलियत ये है कि वो पिछले साढ़े चार सालों से अफगानी तालिबानी फ़ौज का नेतृत्व कर रहा है और उसने सभी बिखरते जा रहे तालिबानियों को एकजुट कर दिया था. उसकी बात की बहुत इज़्ज़त है और तालिबान में ऊपर से लेकर नीचे तक सभी उसके आगे सर झुकाते हैं. अलकायदा के नए मुखिया ने भी अखुन्जादा के आगे सर झुकाया है और उसे अपना संरक्षक घोषित किया है. आज भी अक्सर मुल्ला अखुन्जादा की इस्लामी तकरीरें अफगानी तालिबानी श्रद्धा से सुना करते हैं.

तालिबानी प्रवक्ता ने भी लगाई मुहर

अखुन्जादा के देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता होने पर तालिबान के प्रवक्ता समांगनी ने भी सहमति जताई है. उसने कहा है कि “मुल्ला अखुंदजादा अफगानिस्तान की नै सरकार के सर्वोच्च नेता होंगे और इस पर कोई सवाल नहीं खड़ा होना चाहिए.” उन्होंने दरअसल लोगों की राय नहीं मांगी बल्कि उनको सूचित किया है. समांगनी ने ये भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति बरादर अखुंदजादा के अधीन रह कर ही काम करेंगे.

राज्यपालों, पुलिस अधिकारियों हो गए हैं नियुक्त

तलिबान इसके पहले कि अपनी नई सरकार का ऐलान करें, प्रांतों और जिलों के लिए राजयपालों, अर्थात गवर्नरों, पुलिस प्रमुखों और पुलिस कमांडरों की नियुक्ति कर चुके हैं. समांगनी ने ये भी बताया कि नई प्रशासन प्रणाली का नाम, राष्ट्रीय झंडा और राष्ट्र गान पर आखिरी फैसल अभी होना है. इस बीच दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय में उप नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकजई ने बृहस्पतिवार को विदेशी मीडिया चैनलों को बताया कि नई सरकार में अफगानिस्तान के सभी कबीलों के सदस्यों और महिलाओं को शामिल किया जाएगा.