आगरा में 80 साल के बुजुर्ग ने बेटों को सिखाया सबक, बेटों ने ठुकराया तो पिता ने DM के नाम की करोड़ों की प्रॉपर्टी

आगरा के गणेश शंकर ने कलेक्ट्रेट जाकर जनता दर्शन में डीएम प्रतिपाल चौहान के नाम की करोड़ों की वसीयत

उत्तर प्रदेश का आगरा वैसे तो ताज महल की वजह से दुनिया जहां में जाना जाता है लेकिन इन दिनों आगरा की चर्चा 80 वर्षिय बुजुर्ग के कारण हो रही है. आगरा में अपने बेटों से नाराज गणेश शंकर पांडेय ने अपनी तीन करोड़ की संपत्ती डीएम के नाम कर दी है. वैसे तो पिता की संपत्ति पर बच्चों का मालिकाना हक होता है. लेकिन दो बेटों और तीन बेटियों के एक बुजुर्ग पिता ने अपने बच्चों के दुर्व्यवहार से तंग आकर अपनी सारी संपत्ति रजिस्टर्ड वसीयत के जरिए आगरा के डीएम के नाम कर दी है. बुजुर्ग ने कहा कि बेटे उनका खयाल नहीं रखते इसीलिए वे उन्हें अपनी संपत्ती का उत्तराधिकारी नहीं बनाएंगे.

बुजुर्ग की संपत्ती की कीमत 3 करोड़

गणेश शंकर पांडे थाना छत्ता के पीपल मंडी में अपने भाईयों के साथ रहते हैं. गणेश शंकर पांडे चार भाईयों में सबसे बड़े हैं. उन्होंने साल 1983 में अपने भाई नरेश शंकर पांडे, रघुनाथ और अजय शंकर के साथ मिलकर 1 हजार गज जमीन पर आलीशान घर बनवाया था. जिस मकान की कीमत अब लगभग 13 करोड़ है. चारों भाइयों में बंटवारे के बाद गणेश शंकर के हिस्से में मकान का चौथाई हिस्सा आया, जिसकी कीमत आज के वक्त में करीब 3 करोड़ रुपए है. गणेश शंकर के फैसले से उनके भाई भी सहमत हैं. फिलहाल वो अपने भाईयों पर ही आश्रित हैं.

गणेश शंकर के मरने के बाद ही DM को मिलेगी वसियत 

गणेश शंकर ने बेटों से परेशान होकर ही ये कदम उठाया है. उनका कहना है कि बेटे उनका ख्याल नहीं रखते यहां तक की उन्हें घर से भी निकाल दिया था. इसी के बाद व्यथित गणेश शंकर ने अपनी संतान को संपत्ती से बेदखल करने का फैसला ले लिया था और अगस्त 2018 में ही जिलाधिकारी आगरा के नाम मकान की रजिस्टर्ड वसीयत कर दी थी. उन्होंने  अपनी वसीयत में लिखा है कि जब तक वह जिंदा हैं तब तक वह अपनी चल और अचल संपत्तियों के मालिक और स्वामी रहेंगे. वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और किसी प्रकार के मानसिक रोग से पीड़ित नहीं हैं. मरने के बाद मेरे हिस्से की जमीन डीएम आगरा के नाम हो जाएगी.

DM  को वसीयत प्राप्त हुई

गणेश शंकर ने कलेक्ट्रेट जाकर जनता दर्शन में सिटी मजिस्ट्रेट प्रतिपाल चौहान को रजिस्टर्ड वसीयत सौंपी है दी है. सिटी मजिस्ट्रेट प्रतिपाल चौहान ने बताया कि उन्हें वसीयत प्राप्त हो गई है. वसीयत की एक कॉपी उनके भाइयों के पास भी है और भाइयों को इस बात से कोई ऐतराज नहीं है.

बुजुर्ग ने पेश की मिसाल

हर माता पिता की ख्वाहिश होती है कि बेटा बुढ़ापे में उसकी लाठी बनेगा. लेकिन बदलते दौर में समाज इतना तेजी से बदल रहा है कि जीवन देने वाले माता पिता ही बच्चों के लिए बोझ बन गए हैं. बेघर हुए बुजुर्गों के लिए एक ही आश्रय स्थल है, वृद्धाश्रम. देश में वृद्धाश्रमों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन मां-बाप को बोझ समझने वाले बच्चों को आगरा के बुजुर्ग पिता ने करारा जवाब दिया है. आज हर कोई गणेश शंकर की हिम्मत की मिसाल दे रहा है.