अनसुनी अनुराधा-2 : अगर तुम न होते (Story)

आज फिर अनुराधा आ गई आपके बीच.. सबको सादर नमस्कार,,, आज फिर एक नई मंजिल एक नयी दास्तान…
  “हमे और जीने की चाहत न होती..  अगर तुम न होते, अगर तुम न होते….”
     ये खूबसूरत कहानी है उन दिनों की  जब राजेश खन्ना , शर्मिला टैगोर, शशि कपूर.. पर्दे से ज्यादा लोगों के दिलों पर राज करते थे।  एक गाना, एक फिल्म क्या हिट हो जाती, हर नौजवान खुद को हीरो, और हर लड़की खुद को हीरोइन समझने लगती थी.
सारे माहौल मे एक दौड़ सी लगती खुद को  किरदार मे दिखने की,, पैंट, जो मोहरी से चौड़ी, बड़ी सी बक्कल वाली बेल्ट, हल्की छींटदार कमीज़, और ऊंचे ऊँचे ऐड़ी वाले जूते… बस, बन गए  .. जैसे कपूर खानदान के ही वारिस हों..
 वही लड़कियाँ….कह तो दे कोई कि कुछ कमी है.. आज की विद्या बालन भी क्या कर दिखाएगी,, जो नीतू सिंह थी अपने ज़माने मे.. साइड से यू कट वाली शर्ट..और बैल बॉटम…
खैर, आज की कहानी है एक अस्पताल में चल रही है.. सांवले रंग वाली, उलझे घुंघराले लम्बे बालों वाली,  जल्दी से न समझ आने वाली हिंदी बोलने वाली.. जी हां, एक दक्षिण भारतीय लड़की की कहानी है ये…अपर्णा की…जिसने एक मध्यम परिवार में तो जन्म लिया लेकिन विद्या-धन की घर में कोई कमी न थी।अपर्णा के छोटे भाई , बहन भी ऐसे ही प्रतिभाशाली थे।
     आज बाबा के साथ पहली बार देश की राजधानी , दिल्ली आई थी, यहाँ की रफ़्तार देख कभी वो डर सी जाती थी तो कभी रुक जाती। लेकिन बाबा का मजबूत हाथ जो था अपर्णा के साथ। उसकी हिम्मत कभी टूट नहीं सकती थी।
   अपर्णा ने आज दिल्ली के मशहूर मिलेट्री हॉस्पिटल मे ज्वाइन किया था।  अभी कुछ महीनो की ट्रेंनिंग ही बाकी थी । बाबा हॉस्टल के कमरे मे अपनी अपर्णा को छोड़ कर जा रहे थे बहुत सारे आशीर्वाद और प्यार के साथ .अपर्णा को भी पता था बाबा की आय बहुत कम है परन्तु  उसे जीवन में वो बात याद नहीं जो कभी अधूरी रही हो। अपर्णा बाबा को जाते देख कुछ चुप हो गई और ये नया शहर भी अभी कुछ बोलने नहीं देता था।
 ‌    अपर्णा बहुत ही समझदार , शालीन, विचारों की थी, धीरे-धीरे  सब की चहेती बन गई। और अपने काम से  हर सीनियर का दिल भी जीत लिया था।
‌      आज ओटी मे ऑपरेशन चल रहा था । अपर्णा डॉ अनिल श्रीवास्तव को असिस्ट कर रही थी। ऑपरेशन लम्बा चलने वाला था। ऑपरेशन कराने वाला पेशेन्ट उम्र मे कुछ ज़्यादा था इसलिए और ज़्यादा एहतियात बरतनी थी।  बीच बीच मे कुछ ऐसे पल भी आये थे जहाँ डॉ खुद घबरा रहे थे लेकिन अपर्णा ने सही समय पर  समझदारी दिखा कर  परस्थिति को संभाल लिया।
‌‌   आज अपर्णा का जन्मदिन था. सुबह ही हॉस्पिटल के लैंडलाइन फोन पर माँ बाबा का प्यार और अशीर्वाद मिल गया था।
 ‌  अपर्णा बहुत खुश थी कि सही समय पर  अपनी ड्यूटी पर पहुंच गई थी और ये देख कर हैरान थी,, जैसे सब को आज अपर्णा का इन्जार था,, हॉस्पिटल पहुँचते ही शुुरू हो गई बधाइयों की बारिश, और पार्टी की मांग.. अपर्णा कुछ समझ नहीं पा रही थी. शायद, ऐसा बर्थडे उसका पहले कभी नहीं मना था.
‌लेकिन आज एक अलग तोहफा भी अपर्णा के इंतजार कर रहा था
‌ ‌  सामने से आते हुए डॉ अनिल श्रीवास्तव बोले- .Happy birthday ….. अपर्णा हँसती हुई .बोली-..Thank you, Dr. आप अगर अभी बिज़ी न हो्ं तो  मेरे कैबिन मे आओ, कुछ बात करनी थी…डॉ अनिल ने अनुरोध किया तो मना नहीं कर पाई अपर्णा. और दोनों डॉ अनिल के कैबिन की और  बढ़  गए…
‌ और  बताइये, अपर्णा जी … आज  बात हुई घर पर?-  डॉ अनिल के चेहरे पर कुछ अलग सी मुस्कुराहट थी आज..
‌  बस कुछ सामन्य सी बातचीत कर …डॉ साहब ने सही नब्ज पकड़ ली – अपर्णा  बात ऐसी  है …मैं तुम्हें  कुछ कहना चाहता था अपर्णा..
जी कहिये. डॉक्टर साहब- अपर्णा कुछ रूक कर बोली..‌
‌ Actually अपर्णा तुम…तुम…मतलब ऐसी कोई जल्दी नहीं …मतलब… I mean take your time- डॉक्टर कुछ साफ कह नहीं पा रहे थे..
डॉक्टर,  क्या कहना चाहते है आप …plz…बताइये..
‌   अब डॉक्टर साहब ….एक ही सांस मे सब कुछ कह गये – सुनो अपर्णा …मै  तुम से शादी करना चाहता हूँ…  अपर्णा को लगा जैसे अभी उसे स्ट्रेचर की जरूरत हो… अपर्णा  का  महुँ खुला रह गया…  और वो उठ कर बाहर चली गई ,, लेकिन डॉ साहब को कोई जवाब मिल गया था,,जो उनकी उम्मीद के मुताबिक था शायद..
‌अपर्णा बहुत मन लगा कर काम करती थी..डॉ साहब भी अपनी प्रैक्टिस पर  पूरा ध्यान देते..लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक दूसरे से कभी ध्यान थोड़ी देर के लिए भी हटा हो उनका.. अपर्णा भी अब अपना जॉब ही कर रही थी,,
‌ आज  अनिल  के लिए उनके घर बहुत बड़े घर से रिश्ता आ रहा था,, बहुत ही धनी परिवार की इकलौती संतान थी वो.. डॉ साहब  शहर के नामी डॉक्टरों मे गिने जाते थे,,  और परिवार से भी संम्पन थे..  तो हो भी  क्यूं न..  लेकिन डॉ साहब तो अपना फैसला ले चुके थे,, बस घर पर बताना ही तो मात्र रह गया था। तो आज जब सब साथ खाना खाने  बैठेंगे..तो वो साफ-साफ़ बोल देंगे, उन्होंने सोच लिया था..
‌‌  और हुआ भी बिलकुल वेसे ही जैसा डॉ साहब ने सोचा था, मम्मी पापा अपनी कुर्सी पर बैठ  चुके थे.. डॉ साहब की पसन्द के कोफ्ते बने थे.. लेक़िन डॉ साहब को लेने की आज कोई जल्दी न थी ,, दाल तो खाते हीनहीं थे पर आज दाल भी ले ली थी..   ये आज  कुछ  नया  था टेबल पर.. तभी पापा बोले-
Hi young man…is every thing fine…???  मगर डॉ साहब ख़ामोशी से चुप  बैठे थे,, लेकिन आज अगर चुप रह गया तो…तभी मम्मी बात काटती हुई बोल पड़ी – अरे हाँ मै आपको बताना भूल गई आज… जयपुर से पिंकी का फ़ोन आया था…भई, मेने तो सब खुल कर बता दिया अपनी बहन को..कि बहुत अच्छा रिश्ता आया   है .. बहुत खुश हो रही थी,, बोली दीदी, शॉपिंग मेरे बिना नहीं करना…
   पापा मम्मी हँस रहे थे,, तभी अनिल ने हिम्मत करते हुए,,  मम्मी …मम्मी मुझे कुछ बताना थाआपको और पापा को…मम्मी फिर जल्दबाज़ी दिखाती हुई बोली – अरे डेट्स की प्रॉब्लम है क्या..तो कर लेंगे आगे पीछे एडजस्ट.. डॉक्टर साहब इस बार पानी का घूंट भरते हुए नजर आये… जैसे अपने अन्दर हिम्मत इकट्ठी कर रहे थे, फिर बोल पड़े – मम्मी सुनिये.. और एक साँस मे सारी बात बोल गये –  मै ये शादी नहीं कर सकता… पापा , मम्मी को लगा कि शायद कुछ गलती से निकल गया है अनिल के मुँह से.. पापा बीच में उनको रोक कर बोले -नहीं कर सकता मतलब?
जी पापा, मै.. मै किसी और से…-और अनिल चुप हो गया.. बस खाना भी  सब ने  उतना ही खाया  जो अभी तक खाया गया था.. अब मम्मी की बारी थी – अनिल तुम क्या बोल रहे हो..ऐसी बात थी तो बताना था न पहले… डॉ साहब ..अपनी बात बोलते हुए..मम्मी आप एक बार मिल लीजिए..और फिर उन्होंने सारी बात बोल डाली..
  घर की लाइट आज जल्दी बंद हो गई थी..  आज सुबह तो हो चुकी थी लेकिन किसी को किसी बात की जल्दी नहीं थी,, आज शाम को अपर्णा आने वाली थी.. और फिर शाम भी आई और अपर्णा भी,,
  कल तक जोर जोर से हँसने वाली मम्मी आज बस मुस्कुरा भर रही थी..और पापा टाइम से तो घर आ गए थे पर बिलकुल खामोश बैठे थे.  बस मम्मी इतना ही बोल पाई – ठीक है अपने पेरेन्ट्स को बुला लो इस हफ्ते.
  आज शनिवार था अपर्णा के बाबा, और माँ  दोनों डॉ अनिल के घर आये थे,, माँ तो जैसे ऊपर देख ही नहीं पा रही थी और बाबा  तेज़ रोशनी वाले चमकते घरों से अनजान एक छोटे से गांव के निवासी,, वो क्या जाने काँटा छूरी पकड़ना,, बस बड़ी मुशिकल से चाय ही पी पाये थे,,  बात बस इतनी ही हुई ..  आप लोगो से मिलना था,, वैसे खाना तैयार है, खा कर जाते … मम्मी ही बोल रही थी.. अपर्णा के बाबा ने बड़े सम्मान वाले स्वर मे हाथ जोड़ कर अस्वीकार किया – जी नहीं, बस, फिर कभी..अभी रात की ट्रेन भी पकड़नी है हम लोगो को… और मेहमान चले गए…
   पापा अपनी टाई खोलते हुए…  ये स्टैंडर्ड है तुम्हारा,, एक बार छुट्टी लो और जरा शहर का चक्कर लगा के आओ कितनी इज़्ज़त है तुमारे बाप की,,  ये इज़्ज़त, पैसा , रईसी  सब्ज़ी मंडी मे थोक के भाव नहीं मिलती,,  तीन टाइम कभी आराम से रोटी नहीं खाई मैने यहाँ तक पहुँचने के लिए,,  दीवाली पर रात को एक बज जाता था,, घर आने मे ताकि तुम्हें कोई कमी न हो,,  और तुम  ….  जिस स्कूल मे तुम लोग पढ़े हो, लोग सपने देखते है वहाँ अपने बच्चों के एडमीशन के, जिस ब्रांड के तुम कपडे पहनते हो ,, एक जोड़े की कीमत के बराबर तनखा होती है लोगों की,,बस आज ये बात यहीं अभी खत्म हो जानी चाहिये..
  आज फिर घर की लाइट  समय से पहले बंद हो गई थी,,  अनिल को कुछ समझ न आ रहा था,, अगले दिन हॉस्पिटल तो पहुंचे पर अपने कैबिन मे ही रहे डॉ साहब,, अपर्णा हिम्मत कर के अन्दर तो आई पर बिना कुछ कहे सुने बहार चली गई,, तीन रोज़ गुजर गए.. आज अनिल कोई फैसला लेने वाला था. अपर्णा से कहा- अपर्णा अन्दर आओ ..तुम से कुछ बात करनी है…
  सुनो अपर्णा, चलो हम मंदिर मे शादी कर लेते है .. हमारे पेरेन्ट्स नहीं मानेंगे..अपर्णा एकटक अनिल की और देख रही थी..  हाँ अपर्णा धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा बाद मे .. मै तुम्हारे बिना कैसे रहूंगा,, क्या तुम रह सकती हो.. अपर्णा  सोच मे पड़ गई,, पलक झपकते ही उसे माँ, बाबा और अपने छोटे भाई बहन नज़र आ रहे थे.. और दूसरी  और अनिल  के भीतर कुछ सोचने समझने की  शक्ति जैसे रही नहीं.. आनन-फानन मे दोनों ने शाम को ही  शादी कर ली ..और आज दोनों एक होटल के रूम मे थे..कल कोई रेन्ट पर मकान देखते है..
   डॉ अनिल अपने घर फोन कर सारी बात बता चुके थे,, अपर्णा अभी कोई फैसला नहीं ले पा रही थी,,  आज तीन दिन से डॉ साहब अपने घर नहीं गए थे,,  अभी शाम को दोनों हॉस्पिटल से होटल आये ही थे कि डॉ साहब का ड्राइवर हरिराम होटल के रेस्पेक्शन पर पहुंचा.. और रिसेप्शन पर अनुरोध किया कि उसे डॉ साहब से मिलने दिया जाये. रिसेप्शन से रूम मे फोन जाता है और डॉ साहब नीचे आते हैं.. हरिराम बहुत घबराया हुआ था – साहब, जल्दी घर चले मालकिन को दिल का दौरा पड़ा है बॉम्बे ले कर जाना है बड़े डॉक्टर के पास.. हालत बहुत ख़राब है.. बड़े साहब ने मना किया था आपको बताने के लिए.. लेकिन मै रुक नहीं पाया ..जल्दी चलिए साहब…और अनिल अब एक भी पल बिना गवाँये … अपर्णा ,,अपर्णा,, चिलाते हुए अपने कमरे मे गए … उन्हीं कपड़ों और बाथरूम स्लीपर मे ही सीधे निकल गए ..साथ ही ये वादा भी कर गये कि सब ठीक होते ही आता हूं वापस…
      आज  18 साल साल बीत गए …अपर्णा इसी हॉस्पिटल मे बिना कोई छुटी लिये अपनी सेवा से न जाने कितने लोगों को रोगमुक्त कर चुकी है… उसका बेटा 11वीं कक्षा का छात्र है..  साइंस का बहुत अच्छा सब से ज्यादा अंक लेने वाला मात्र एक विद्यार्थी है वह स्कूल में..  आज शाम दिल्ली मे ही विज्ञानं भवन मे एक समारोह है जिसमे देश के अलग अलग कोनो से होनहार  छात्र आ रहे थे.. आज अपनी माँ अपर्णा के साथ उसे वहाँँ जाना था.. समारोह बहुत बड़ा था , तो वैज्ञानिक, और कुछ जाने माने डॉक्टर भी आने वाले थे..
  शाम के 7.30 बज रहे थे । समारोह अपनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा था. एनाउन्समेन्ट हुआ कि अब समय आ गया है कि सभी उपस्थित छात्र अपनी अपनी प्रतिभा का परिचय दें.. जो भी जिसने मॉडल बनाये हैं उनके विषय में बतायें.  अपर्णा पीछे की एक पंक्ति मे बैठी जाने क्या सोच रही थी,, आंखे बार-बार नम हो रही थी..और अंतिम घड़ी..अब फैसला होना था.. तीन ऐसे होनहार छात्रों का जो पुरस्कार के हकदार थे..
   और जोरदार तालियों के साथ  जो नाम हॉल मे गूंज रहा था..वो था…मयंक श्रीस्वातव का.. यानि अपनी अपर्णा का बेटा.. जिसे पुरस्कार दे रहे थे जानेमाने डॉक्टर साहब ..डॉ अनिल श्रीवास्तव ..
 मयंक ने डॉ साहब के पैर छुए और पुरस्कार लिया..
  और साथ ही ये गुजारिश भी कि ..सर, मेरी माँ को भी स्टेज पर बुलाया जाये … मेरे हर प्रोजेक्ट में वो बराबर मेरे साथ जागती है..  अपर्णा अपना नाम डॉ सहाब के मुँह से सुन कर जैसे सुन्न पड गई…कदम अपनी जगह पर जम से गये थे उसके…
 लेकिन बार बार बुलाने पर जब वो स्टेज पर गई ..तो दोनों तरफ एक चुप्पी थी.. डॉ साहब 18 साल बाद आज अपर्णा को सामने देख रहे थे.. मतलब मयंक उनका बेटा है.. मयंक श्रीवास्तव उनकी अपर्णा का बेटा था..अपर्णा शास्त्री का..
  दुनिया घूमने लगी आँखों के सामने ..18 साल पहले एक होटल के कमरे मे छोड़ कर गए थे.. आज एक हॉल मे दुबारा मिले..  अपर्णा वो हर दिन याद कर रही थी कैसे आपके इन्जार मे काटा,, माँ बाबा से रिश्ता तोड़ आपके बेटे को जन्म दिया.. उसे बाहर जाने का चांस मिला था मगर वो नहीं गई …कही आप ढूँढ़ते हुए न आ जायें ..हर आंसू अपर्णा की कहानी कह रहा था..जिसे सिर्फ डॉक्टर साहब की जिन्दगी ने सुना था..बाकियों के लिये ये कहानी थी अनसुनी बिलकुल..