पूछता है देश: क्यों रहना चाहिये अवसरवादी नेताओं को वक्त से डर कर?

“आदमी को चाहिए वक्त से डर कर रहे, कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज” आज की राजनीति यही समझा रही है.
यही सत्य है,समय कब पलट जाये, कोई नहीं जानता और दूसरों के लिए कही बातें, खुद कब भुगतनी पड़ जाएं, पता भी नहीं चलता -कुछ उदहारण देता हूं.
कभी समय था इंदिरा गाँधी अपने समय में कांग्रेस की निर्विवाद नेता थी और प्रधानमंत्री होते हुए अक्सर जनसंघ का मजाक उड़ाते हुए उनसे पूछती थीं –तुम्हारा प्रधानमंत्री कौन बनेगा?
जनसंघ और RSS को एक समय भारतीय राजनीति में “अछूत” कहा और समझा जाता था –हर पार्टी जनसंघ और बाद में भाजपा के साथ संबंध रखना अभिशाप मानती थी –RSS का बस एक ही परिचय दिया जाता था –सांप्रदायिक ताकत और गाँधी के हत्यारे.
आज कांग्रेस की हालत भी एक “अछूत” पार्टी जैसी बनती जा रही है –ममता बनर्जी ने मुहिम चला दी माँ-बेटे और पूरी कांग्रेस को राजनीति में अलग-थलग करने की.
और आज समूचे विपक्ष के सामने वही सवाल है -आपका प्रधानमंत्री कौन बनेगा -वो सवाल जो इंदिरा जी जनसंघ से पूछा करती थीं.
राममंदिर का आंदोलन शुरू होने के बाद 30 साल तक सभी विपक्षी दल भाजपा के मंदिर निर्माण के संकल्प का मजाक उड़ा कर वस्तुतः मंदिर विरोध ही करते रहे, पर आज सब पर राम का भक्त होने का भूत सवार हो गया.
ऐसे नेता भी अपने को हिन्दू कह कर, कुर्ते पर जनेऊ दिखा कर मंदिर जाने लगे जो कहते थे कि मंदिर तो लोग लड़कियां छेड़ने जाते हैं.
नरेंद्र मोदी के सफाई करने को वो कहते थे कि फोटो शूट करा रहे हैं लेकिन एक दिन ऐसा आया कि उनकी खुद की बहन को “झाड़ू” लगाते हुए फोटो निकलवानी पड़ी.
जिनकी नानी कहती थी राम ऐसे मंदिर में खुश नहीं होगा जो किसी मस्जिद को तोड़ कर बनाया गया हो, आज वही पल्टीमार कह रहे हैं, – वो मंदिर इसलिए जाते हैं क्यूंकि वो हिन्दू हैं.
तो फिर मस्जिद में क्यों जाते हैं और इफ्तार पार्टी क्यों देते हैं – वो नेता गणेश चतुर्थी और दीवाली पर पूजन का ढोंग करते हैं मगर कोई उनका मुस्लिम मंत्री या नेता उस पूजा में नहीं आता –जबकि ये खुद जालीदार टोपी पहन कर
नमाज पढ़ने बैठ जाते हैं.
राम जन्मभूमि मंदिर की तरह आज कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का भी नाम सुन कर कुछ नेता भड़क उठे हैं मगर कल जब ये मंदिर बनेगा तो कृष्ण के असली वंशज बन कर खड़े हो जायेंगे.
कल सभी विपक्षी नेता कोरोना वैक्सीन का मजाक उड़ा रहे थे पर फिर सब लगवाने भी खड़े हो गए.
इसलिए सही कहा गया है कि वक्त से डर कर रहना चाहिए. आपको वक्त का कुछ नहीं पता पर वक्त को आपकी औकात मालूम है..