बालाकोट और सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत चाहिये कांग्रेस को!

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जो लोग सेना से बालाकोट और सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगते हैं –वही लोग आज किस मुह से सैनिकों के बलिदान की दुहाई दे रहे हैं – कोई कांग्रेसी कभी गया है क्या, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ?

कांग्रेस के नेता आज जम कर विलाप कर रहे हैं कि अमर जवान ज्योति को “बुझा” दिया गया यानि एक और झूठ का प्रचार शुरू कर दिया गया है.

आज मोदी सरकार ने 2 मुख्य निर्णय किये, एक में कहा गया कि इंडिया गेट पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति लगेगी और दूसरा इंडिया गेट पर जल रही अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति में विलीन कर दिया जायेगा.

राहुल गाँधी ने ट्वीट किया — “बहुत दुःख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जायेगा.

कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते –कोई बात नहीं –हम अपने सैनिकों के लिए अमर जवान ज्योति एक बार फिर जलाएंगे”

ये नरेंद्र मोदी को देशप्रेम और सैनिकों का बलिदान सिखा रहे हैं कांग्रेस के 52 वर्ष के युवा नेता –इन्हें देशप्रेम की
इतनी चिंता होती तो ये जवानों द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक में दिखाए पराक्रम के सबूत न मांगते.

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने की मांग तो सेना 70 साल से कर रही थी मगर कभी कांग्रेस सरकारों ने सेना की बात नहीं मानी जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2019 को पूरा किया.

क्या आज तक राहुल गाँधी या कोई भी कांग्रेस का नेता सेना के शहीद  जवानों को श्रद्धांजलि देने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में गया है जो आज जवानों के बलिदान और देशप्रेम के लिए टसुए बहा रहे हैं –

इंडिया गेट तो ब्रिटिश काल में 1931 में बना था और उस पर अंग्रेज़ों के लड़े  युद्धों में हुए शहीदों के नाम अंकित हैं – 1972 में बांग्लादेश युद्ध में हुए शहीदों के नाम भी लिखे गए.

मगर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में 25,942 उन शहीदों के नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखे गए जिन्होंने 1947 से लड़े गए गए सभी युद्धों में बलिदान दिया और अंग्रेज़ों के कालखंड में भी शहीद हुए –

राहुल गाँधी ने प्रतिज्ञा की है कि वो अमर जवान ज्योति फिर से जलाएंगे – फिर तो ये भी प्रतिज्ञा करते कि सत्ता में आने पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को भी तोड़ दिया जायेगा.

कांग्रेस ने तो जलियाँवाला संग्रहालय का भी रखरखाव नहीं किया और उसे जर्जर हालत में रखा मगर जब मोदी ने उसका पुनरूद्धार किया तो राहुल ने उसकी भी निंदा की.

कहीं ऐसा तो नहीं है कि दादी की जलाई हुई अमर जवान ज्योति को नई जगह ले जाने से समस्या हो रही हो.

दादी के काम से इतना लगाव है क्या? तो मोदी क्या देश में एक बार इंदिरा जी की तरह फिर से इमरजेंसी भी लगा दे, तब क्या बेहतर रहेगा ?

(सुभाष चन्द्र)