भारत क्यों नहीं लगाता झूठी पत्रकारिता पर प्रतिबन्ध? – Poochta Hai Desh

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पूछता है देश कि भारत क्यों नहीं लगाता झूठी पत्रकारिता पर प्रतिबन्ध?

रूस से भाग निकले बड़े तीसमारखां मीडिया हाउस – क्योंकि उनकी “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” खतरे में डाल दी पुतिन ने – काश हमारे सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच मास्को में होती – पुतिन का जीना मुश्किल कर देती –

रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान पुतिन सरकार के गज़ब का निर्णय लिया है कि झूठ फैलाने वाले पत्रकारों के लिये 15 साल की जेल का इंतजाम कर दिया.

इसके पहले रूस ने फेसबुक, ट्विटर, यू टूयब और इंस्टाग्राम पर प्रतिबंध लगाया था -इनकी दुकान बंद होने पर भी इन संस्थाओं को
समझ नहीं आएगी जो ये आये दिन भारत में साधारण यूज़र्स के खाते ब्लॉक करते फिरते हैं –

15 करोड़ की आबादी वाले रूस में इन संस्थाओं पर बैन लगने से कमाई पर कितना असर पड़ेगा और सोचो कभी इन पर भारत में बैन लग गया तो क्या होगा –

रुसी संसद ड्यूमा के पास किये गए कानून के बाद BBC, CBC, CNN और ब्लूमबर्ग जैसे दिग्गज संस्थानों ने रूस में काम करना बंद कर दिया

बी बी सी के महानिदेशक टिम डेवी ने विधवा विलाप करते हुए कहा है कि रूस द्वारा बनाया गया कानून स्वतंत्र पत्रकारिता
में बहुत बड़ी बाधा साबित हो सकता है –उसका मतलब है, झूठ फ़ैलाने की पत्रकारिता में बाधा है –

रूस ने इन मीडिया संस्थानों को काम बंद करने के लिए कुछ नहीं कहा –सत्य ये है कि उन्हें डर है रुसी प्रशाशन उनकी फेक न्यूज़ को बर्दाश्त नहीं करेगा और उन्हें जेल में डाल दिया जायेगा –

CNN Afghanistan ने खबर दी थी 2021 में कि उनके एक पत्रकार “Bernie Gores” की हत्या तालिबान ने कर दी है –

अब CNN Ukraine ने खबर दी है कि रुसी माईन ब्लास्ट से “Bernie Gores” की मौत हो गई –ये 2022 में यूक्रेन युद्ध में खबर दी गई है उसी CNN द्वारा –अब इसे 15 साल की जेल होगी या नहीं ?

वो देश भारत नहीं है और हमारे देश का कानून भी वहां नहीं है जो पत्रकारों को फेक न्यूज़ लाने और प्रधानमंत्री या देश को गाली देने की आज़ादी देता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर –

रूस में तो भुगतना पड़ेगा और अपने पर संयम रखना होगा -वो भारत नहीं है जिसके खिलाफ आप किसान आंदोलन हो या हिजाब हो या कुछ और, तुरंत विषवमन शुरू कर देते हो —

मुझे ख़ुशी हुई ड्यूमा द्वारा बनाये गए कड़े कानूनों को देख कर -सबसे पहले देश होना चाहिये, बाद में झूठ बेईमानी और मक्कारी की पत्रकारिता के लिये जगह देखी जाये !