Bhopal Hospita Fire: हमीदिया अस्पताल में आग लगने से 4 बच्चों की मौत, हादसे के पीछे बड़ी लापरवाही, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दिये जांच के आदेश

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया अस्पताल परिसर में बने सरकारी कमला नेहरु बाल अस्पताल में आग लगने से 4 बच्चों की मौत हो गई. एसएनसीयू में कुल 40 बच्चे भर्ती थे जिसमें से 36 बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया. हादसे में कई और बच्चों के झुलसने की भी खबर है. हादसा शार्ट सर्किट की वजह से हुआ. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हादसे की हाईलेवल जांच के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना पर दुख जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है. हादसे की जांच अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान द्वारा की जाएगी. साथ ही मुख्यमंत्री ने मृतक बच्चों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है.

शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ हादसा

अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी. तीसरी मंजिल पर आग लगने के चलते अस्पताल के अन्य फ्लोर पर भी धुआं भर गया, जिससे वहां पर मौजूद मरीजों को भी अन्य जगह पर शिफ्ट कर अस्पताल की इमारत को तेजी से खाली कराया जा रहा है. बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर मिलाकर आठ मंजिल के कमला नेहरू अस्पताल में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे.

7 अक्टूबर को भी लगी थी आग

हमीदिया अस्पताल कैम्पस में आग की ये दूसरी घटना है. इससे पहले 7 अक्टूबर को भी नई बिल्डिंग में दूसरे तल पर ठेकेदार के स्टोर रूम में आग लग गई थी. फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियों ने एक घंटे में इस आग पर काबू पाया था. अगर प्रशासन पहले सतर्क हो जाता तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता.

अस्पताल में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं

आठ मंजिल के कमला नेहरू अस्पताल में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं. अस्पताल में लगे ऑटोमेटिक हाईड्रेंट भी खराब पड़े हुए हैं. हर फ्लोर पर फायर एक्सटिंग्विशर तो मौजूद थे लेकिन सिर्फ दिखावे के लिए. यहां तक की कमला नेहरू अस्पताल ने 15 साल से NOC भी नहीं लिया. बिल्डिंग के निर्माण के समय लगे सिस्टम को चालू भी नहीं किया.

अस्पताल के बाहर परिजन परेशान

कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल में सोमवार रात 9 बजे आग लग गई थी. उसके बाद से ही अस्पताल परिसर में परिजनों की भीड़ लगी हुई है. परिजनों की शिकायत है कि उनके बच्चे कैसे हैं उन्हें कहां शिफ्ट किया गया है इस बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है.