अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सबसे बड़ी खबर, मुस्लिम पक्ष ने माना – प्रभु श्रीराम का जन्म वहीं हुआ लेकिन…

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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वो ये मानता है कि विवादित जगह भगवान राम का जन्मस्थान है. लेकिन उसने ये भी कहा कि मुस्लिम पक्ष को वहां से पूरी तरह से बाहर नहीं किया जाना चाहिए.

सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दलील पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राजीव धवन ने कहा, ‘हम इस दलील को मान लेते हैं कि वहीं पर भगवान राम का जन्म हुआ था. लेकिन पूरी जमीन को एक न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं मिल सकता.’

राजीव धवन ने  कहा, ‘इस बात में कोई शक नहीं कि भगवान राम का सम्मान होना चाहिए. विविधता से भरे इस महान देश की बुनियाद राम और अल्लाह के सम्मान पर टिकी है. अगर इस सम्मान को हटा दिया गया तो देश की छवि पर असर पड़ेगा.’

राजीव धवन की दलील  थी कि जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नहीं दिया जा सकता. उनका कहना था कि मंदिर में रखी गई मूर्ति को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा मिलता है. ऐसा ही दर्जा कई बार एक स्वरूप रखने वाली प्राकृतिक रचना को भी मिलता है. जैसे कैलाश पर्वत को एक न्यायिक व्यक्ति का दर्जा दिया जा सकता है. हिंदू उस जगह पर भगवान राम के जन्म की मान्यता होने की बात कहते रहे. अभी यह साफ नहीं हुआ कि सही मायनों में वह कौन सी है. 1989 में पूरी जमीन को पूजा स्थल बताते हुए याचिका दाखिल कर दी गई. यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि दूसरे पक्ष के लिए वहां कोई जगह न बचे.

दरअसल रामलला विराजमान की तरफ से जिरह करते हुए वरिष्ठ वकील के परासरन ने कहा था कि पूजा स्थल का बंटवारा नहीं हो सकता है और विवादित ज़मीन पर हिंदू सैकड़ों साल से परिक्रमा करते आ रहे हैं. जिस पर धवन ने कहा कि,’परिक्रमा की जगह को लेकर कई गवाहों के बयान अलग-अलग थे. अगर इस तरह से किसी जगह को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा मिलने लगा, तो देश में ऐसे मामलों की बाढ़ आ जाएगी. कोर्ट को इसकी इजाजत नहीं देनी चाहिए.’

साथ ही धवन ने कहा कि विवादित इमारत में मुसलमानों का आना जाना और नमाज पढ़ना लंबे अरसे तक चलता रहा. लेकिन उन्हें जोर जबरदस्ती से वहां जाने से रोक दिया गया जिससे नमाज़ पढ़ने में रुकावट आई.इसके बाद गैरकानूनी तरीके से वहां मूर्तियां रखी गई. लेकिन इससे उस जगह पर वक्फ बोर्ड का मालिकाना हक खत्म नहीं हो जाता है. वैसे भी इस्लाम के नियमों के मुताबिक मस्जिद हमेशा मस्जिद रहती है. उसे बदला नहीं जा सकता.

आज कोर्ट ने कहा कि वह रोज़ाना सुबह 10.30 से शाम 5 बजे तक सुनवाई करेगा. सिर्फ शुक्रवार को दोपहर 1 बजे तक सुनवाई होगी. मामले की सुनवाई के लिए तय टाइमलाइन के मुताबिक 18 अक्टूबर को बहस पूरी हो जानी है. मुस्लिम पक्ष यह कह चुका है कि इस हफ्ते उसकी तरफ से दलीलें पूरी हो जाएंगी. बाद में वह हिंदू पक्ष की बातों का जवाब देना चाहेगा.

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