Bihar Election 2025: पहले चरण की 5 अहम सीटें, कौन होगा विजेता?

On: November 5, 2025 6:28 PM
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Bihar Election 2025 के पहले चरण (Phase 1) में 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान तय है। इस पहले चरण को इसलिए विशेष महत्व दिया जा रहा है क्योंकि इन सीटों पर दोनों बड़े गठबन्धन — National Democratic Alliance (NDA) और Mahagathbandhan (MGB) — बराबर दाव लगाये हुए हैं।
इस लेख में हम उन 5 हॉट सीटों पर विशेष नज़र डालेंगे जहाँ प्रतिद्वंद्विता सबसे कड़ी मानी जा रही है और परिणाम आने पर राजनीतिक दिशा तय हो

सकती है।

पहले चरण

किन 5 सीटों पर सबकी नजरें हैं?

यहाँ हम पाँच सीटों को चुन रहे हैं जिनपर इस पहले चरण में सबकी निगाहें लगी हैं:

1.अलीनगर (Alinagar)
इस सीट ने इसलिए सुर्खियाँ बटोरीं क्योंकि यहाँ नए-चेहरे और परंपरागत नेताओं का मुकाबला देखने को है। एक्टर्स, बाहुबली, स्थानीय नेता सभी सक्रिय हैं।
इस तरह की सीटें अक्सर चुनावी नतीजों को अप्रत्याशित बना देती हैं।

2.राघोपुर (Raghopur)
यह सीट विशेष रूप से चर्चित है क्योंकि यह तेजस्वी यादव का पारिवारिक गढ़ मानी जाती है। पिछली बार 2020 में उन्होंने बड़ी बढ़त से जीत दर्ज की थी। इस बार विरोधी धड़े ने भी मजबूत दाव लगाया है। 13 उम्मीदवार मैदान में हैं और मत विभाजन का खतरा है।
अगर तेजस्वी हार गए, तो यह महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका होगा।

3.लखीसराय (Lakhisarai)
इस सीट पर चल रहा है जाना-माना मुकाबला क्योंकि यह क्षेत्र भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट है: विजय कुमार सिन्हा (भाजपा) यहाँ से लड़ रहे हैं। पिछली बार उन्होंने अच्छी बढ़त से जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार विपक्ष के दबाव, बेरोजगारी के मुद्दे और जातिगत समीकरण ने इस सीट को और पेचीदा बना दिया है।

4.महुआ (Mahua)
इस सीट पर देखने लायक है कि कैसे छोटे दल और नए चेहरे मैदान में उतर रहे हैं। उदाहरण के लिए, इस क्षेत्र में बाहुबलियों का प्रभाव, जातिगत समीकरण और पारंपरिक पार्टीयों की चुनौती मुख्य बात है।
यहाँ राजनीतिक माहौल बेहद गतिशील दिख रहा है।

5..टारापुर (Tarapur)
यह सीट उस इलाके में आती है जहाँ डिप्टी सीएम स्तर का असर माना जा रहा है। यदि यह सीट विपक्ष को मिल जाती है, तो एनडीए के लिए बड़ी सियासी परेशानी हो सकती है।
इसलिए यह पहले चरण में सबसे कड़ी टक्कर मानी जा रही है।

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मुख्य मुद्दे और रणनीतियाँ

  • बेरोजगारी: बिहार में युवा बेरोजगारी बड़ी समस्या है — 15-29 आयु वर्ग में करीब 9.9 % बेरोजगार पाए गए। इसे विपक्ष बेहद इस्तेमाल कर रही है।
  • वोटर लिस्ट विवाद: काफी नाम हटने की खबर आई है जिससे मतदाता नाराज़ भी दिख रहे हैं।
  • विकास vs सामाजिक न्याय: NDA का एजेंडा विकास-इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जबकि महागठबंधन (और अन्य नए दल) सामाजिक/वित्तीय मदद और नौकरी-उम्मीद पर जोर दे रहे हैं।
  • गठबंधन समीकरण: NDA में सीट-बंटवारे की रणनीति पहले से तय दिख रही है, जबकि महागठबंधन में सीट-मंझोड़ (seat-sharing) के मसले अभी खुले हैं।
  • मीडिया एवं सोशल प्लेटफॉर्म: इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय खबरें भी इन सीटों पर असर डाल रही हैं — खासकर युवा वोटर्स के लिए।

ये सीटें राज्य-चित्र को कैसे प्रभावित करेंगी

पहला चरण जीतने वाला गठबंधन न केवल मनोबल बढ़ाएगा बल्कि उसकी पॉलिटिकल स्टोरीलाइन बन जाएगी – दुसरे चरण में दूसरे दलों को दुविधा में डाल सकती है। यदि महागठबंधन इन हॉट सीटों में से कुछ पार कर लेता है तो यह संकेत होगा कि बदलाव की लहर है। वहीं, यदि NDA इन में से एक-एक सीट भी सुरक्षित कर लेता है, तो उनके लिए राज्य में सरकार बनाना सहज हो जाएगा।
सर्वे यह भी बता रहे हैं कि NDA को 133-143 सेट मिल सकती हैं, जबकि महागठबंधन को 90-100 के आसपास रहने का अनुमान है। इस लिहाज़ से इन पांच सीटों का महत्व और बढ़ जाता है।

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