बीजेपी में घुसे RPN Singh कहीं पार्टी को नुकसान न पहुंचा दें!

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RPN Singh किसे मजबूत करने आये हैं – उत्तर प्रदेश को या स्वयं को ? गाँधी परिवार से आज क्यों मोहभंग हुआ ?

आज अंततः RPN Singh ने कांग्रेस का साथ तब छोड़ा जब सोनिया गाँधी की लाडो अपने चेहरे को एक बार मुख्यमंत्री का चेहरा बता गई.

इनके बारे में चैनल्स बार बार कह रहे थे कि ये पूर्वांचल के वजनदार नेता हैं जिनका अपने क्षेत्र में बहुत प्रभाव है –सिंह ने भाजपा में आते हुए बार बार कहा कि वो पार्टी में आ कर उत्तर प्रदेश को मजबूत करेंगे.

व्यक्ति कितना ही प्रभावशाली हो, अगर जड़ें ही खोखली हो जाएं, तो उसका प्रभाव किसी काम नहीं आता –ऐसा ही सिंह के साथ हुआ लगता है.

कांग्रेस में रह कर वो कोई करिश्मा कर दिखाने की स्थिति में नहीं थे और ऐसा ही कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ भी था –ज्योतिरादित्य और जितिन प्रसाद जैसे नेताओं ने भांप लिया था कि कांग्रेस में रह कर कोई भविष्य नहीं है –यही सोच कर वो भाजपा में आये.

रीता बहुगुणा जोशी भी 2017 से पूर्व भाजपा में आई थी और ना आई होती तो कांग्रेस के जीतने वाले 7 विधायकों में शायद ही उसका नाम होता.

सच तो ये है कांग्रेस में अब अनेक लोग समझ चुके हैं कि गाँधी परिवार किसी को आगे नहीं बढ़ने देगा और अस्तित्व की रक्षा के लिए वो भाजपा में शामिल हो रहे हैं.

इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि RPN Singh भी उत्तर प्रदेश को मजबूत करने के लिए नहीं, अपितु अपने को मजबूत करने के लिए कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आये हैं.

सिंह के आने से बस एक शंका मुझे हो रही है –इनकी पत्नी सोनिया सिंह प्रणय रॉय के NDTV में Editorial Director है और इस चैनल पर कई केस चल रहे हैं –इनके भाजपा में आने से चैनल को बचाने की अंदर ही अंदर मुहिम न शुरू हो जाये .

वैसे इसमें कोई संदेह नहीं है कि कांग्रेस में अनेक लोग होंगे जो गाँधी नाम का फायदा उठाने वाले राष्ट्रीय परिवार के वर्चस्व से परेशान पार्टी में घुटन महसूस करते होंगे मगर हिम्मत नहीं कर रहे विद्रोह करने की.

एक G-23 भी बना था जिसके नेता कभी कभी बरसाती मेंढक की तरह टर-टर कर देते हैं मगर खुल कर कुछ नहीं करते और कपिल सिब्बल जैसे लोग करें भी कैसे जब हिंदुत्व के खिलाफ झंडा बुलंद किये रहते हैं.

लेकिन भाजपा को भी कांग्रेस के लोगों को सोच समझ कर पार्टी में शामिल करना चाहिए –इनकी वजह से कहीं पार्टी के अपने ही लोग हाशिये पर जाते महसूस ना करें -बंगाल में अनुभव सुखद नहीं रहा -वैसे जो मोदी जी करेंगे, ठीक ही करेंगे, ऐसा भरोसा है.