पूछता है देश: Joe Biden कैसे हैं, अभी कुछ कह नहीं सकते!

Share on facebook
Share on twitter
Share on google
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email

 

अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बनने पर जो बाइडन को बधाई और उनके साथ कमला हैरिस को पहली महिला और वो भी अश्वेत महिला को उपराष्ट्रपति बनने के लिए भी बधाई !

अमेरिका में आज़ादी मिलने के 100 वर्ष बाद महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला था और उसके 108 वर्ष बाद आज किसी महिला को इतने बड़े पद पर बैठने का मौका मिला जबकि हमारे देश में आज़ादी मिलने के बाद पहले ही दिन से महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला और आज़ादी के मात्र 20 वर्ष बाद एक महिला प्रधान मंत्री बन गई थी.
अभी बाइडन की टीम ने जो करना है, वो देखना होगा मगर जो काम ट्रम्प ने किये उन्हें भी विस्मृत नहीं किया जा सकता और बाइडन को उसी कसौटी पर खरा उतरना पड़ेगा -वैसे पेरिस जलवायु समझौते में शामिल हो कर बाइडन ने पहली मात ट्रम्प को दी है.
ट्रम्प ने आतंकवाद का धर्म दुनिया को बताने का साहस किया और “इस्लामिक आतंकवाद” कह कर उससे युद्ध छेड़ा –ऐसा साहस अमेरिका का कोई राष्ट्रपति नहीं कर सका बल्कि सभी पाकिस्तान जैसे आतंकी सांप को दूध पिलाते रहे जबकि ट्रम्प ने भारत का खुला समर्थन किया और लिया भी इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने के लिए जबकि 9/11 से पहले अमेरिका भारत में पाकिस्तान के परोसे हुए आतंक को कानून व्यवस्था की समस्या बताते रहे थे.
ट्रम्प शायद काफी समय के बाद पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जो भारत तो आये मगर पाकिस्तान नहीं गये, जबकि पहले के राष्ट्रपतियों की हज-यात्रा बिना पाकिस्तान जाये पूरी नहीं होती थी.
ट्रम्प ने चीन की आँखों में आँखे डाल कर कोरोना को चीनी वायरस कहने का साहस किया और चीन पर अनेक प्रतिबन्ध लगाए जबकि भारत के साथ खड़ा रहा चीन के खिलाफ.
इस्लामिक आतंकवाद का पाठ पढ़ाते हुए ट्रम्प ने 8 देशों के लोगों पर अमेरिका आने पर प्रतिबन्ध लगाया.
ईरान के कासिम सुलेमानी को ठिकाने लगाया और ईरान को ठोंक कर रखा जिससे ईरान अपने एटॉमिक कार्यक्रम में सफल ना हो. इतना ही नहीं ट्रंप ने UAE, बहरीन,सूडान और मोरक्को जैसे इस्लामिक देशों को इजराइल के करीब ला कर उनमे संधि कराई जो अभी सऊदी अरब से भी होनी थी.
देखते हैं बाइडन इस कदम को कितना आगे बढ़ाते हैं और चीन के प्रति कैसा रुख अपनाते हैं -साथ ही ताइवान, तिब्बत और हांगकांग पर उनका क्या नजरिया रहता है.
बाइडन की टीम में 20 अमेरिकन भारतीय लिए गए हैं,-देखना होगा ये कितना भारत के पक्ष में रहते हैं, क्यूंकि अमेरिकन भारतीय तो प्रमिला जयपाल और रो खन्ना भी हैं जो भारत के खिलाफ ही रहते हैं. प्रमिला और खन्ना वामपंथी गिरोह के लोग हैं और बर्नी सेंडर्स की टीम में शामिल हैं.
वामपंथ आज अमेरिका में घुस चुका है, जिसे रोकना बाइडन की जिम्मेदारी होगी. चुनाव जीतने के लिए तो उनकी मदद ले ली मगर उन्हें ठिकाने लगाना होगा जो अमेरिका के हित में होगा.
भारत के प्रति बाइडन टीम का असली टेस्ट कश्मीर को ले कर होगा और पाकिस्तान को भीख में कितने टुकड़े दिए
जाते हैं, ये बताएगा कि बाइडन भारत के लिए कितने समर्पित हैं. जहां तक हथियारों का प्रश्न है, वो भारत को बाइडन देने के लिए मजबूर होंगे.
-सुभाष चन्द्र
(मैं वंशज श्री राम का!)
————————————————————————————————
Disclaimer: उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं जिनसे न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल की सहमति हो यह आवश्यक नहीं.
————————————————————————————————

ट्रेंडिंग

काम की खबरें

देश

विदेश

मनोरंजन

राजनीति