Cancer: जानये सब कुछ कैन्सर के बारे में

Share on facebook
Share on twitter
Share on pinterest
Share on telegram
Share on whatsapp
Share on email
कैंसर का नाम सुनते ही दिमाग़ सुन्न हो जाता है.  दिल  की धड़कने तेज़ हो जाती है. जी हाँ कैंसर एक ऐसा रोग है जो पूरी तरह  साध्य नही है. हालांकि विज्ञान  ने इसे साध्य बनाने में कुछ हद तक सफलता अवश्य प्राप्त की है परन्तु अब भी ये एक ऐसा रोग है जिसने तुलनात्मक दृष्टिकोण से करोना को मात दे दी है जो एक वैश्विक महामारी है और क्या राजा, क्या रंक सबको हिला रखा है.
ऐसा इसलिये क्योंकि करोना का उपचार सम्भव है परन्तु कैंसर के उपचार के पश्चात भी जीवन की निश्चितता को लेकर आप निश्चिंत नही हो सकते.

कैंसर पर गलतफहमी

आइये जानते हैं कि  आखिर कैंसर कैसे हो जाता है? एक पूर्ण रूप से स्वस्थ इंसान जिसने न कभी मदिरापान किया हो, न सिगरेट फूँकी हो और न ही गुटका खाया हो . चूँकि ये सभी पदार्थ कैंसर जैसी जान लेवा बीमारी को आमंत्रण देने में सहायक हैं परन्तु इन सबका सेवन न करने वाले लोग भी कैंसर से पीड़ित कैसे हो जाते हैं?  इन्हीं सब प्रश्नों के उत्तर हम जानेगें.

सामान्य क्षमताओं का असामान्य तरीके से बढ़ना

हमारा शरीर विभिन्न  कोशिकाओं से बना है.  कैंसर की शुरुआत इन्हीं कोशिकाओं से होती है जबकि यह मानव जीवन का Base Unit है. सवाल अब भी  ये है कि आखिर सामान्य कोशिकाएँ कैंसर कोशिकाओं में परिणत क्यों हो जाती हैं?

क्यों बढ़ती है असामान्य  रूप से कोशिकाएँ

मानव शरीर विभिन्न कोशिकाओं से बना होता है. ये कोशिकाएँ शरीर को पूर्ण रूप से स्वस्थ  रखने के लिये वृद्धि करती हैं और Balanced way में विभाजित होती हैं. ये कोशिकाएं जब क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या फिर पुरानी हो जाती है तो वे मर जाती हैं और उनका स्थान नई कोशिकाएँ ले लेती हैं.  कभी कभी  विधिवत प्रक्रिया में बदलाव आ जाता है जिससे किसी भी CELL का DNA Damage हो जाता है औरMutatio  की उत्पत्ति  होती है, जो कि सामान्य कोशिकाओं के विकास और विभाजन पर प्रतिकूल प्रभाव  डाली है. दूसरे शब्दों में नई कोशिकाए जन्म तो लेती हैं पर क्षतिग्रस्त कोशिकाएँ मरती नहीं जबकि शरीर को इसकी आवश्यकता नहीं होती है. इससे अतिरिक्त कोशिकाओं के ऊतक रूप  धारण  कर लेने की संभावना बढ़ जाती हैं जिसे ट्यूमर कहते है. सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते न ही घातक होते हैं.
सौम्य ट्यूमर में कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते और सफलतापूर्वक इनसे निजात पाई जा सकती है जो दोबारा उत्पन्न भी नही होते.
कुछ ट्यूमर घातक हो सकते हैं जो कैंसर का रूप धारण  कर लेते हैं. ये कोशिकाएं अपने ऊतकों पर भी हमला करती  हैं और शरीर के अन्य भागों में भी इसका विस्तार हो सकता है.  कैंसर के शरीर में इस प्रकार  फैलने की प्रक्रिया को मेटास्टेसिस कहते हैं.
ल्युकेमिया अस्थिमज्जा और रक्त का कैंसर है इसमें ट्यूमर नही होता.

क्या है कैंसर के लक्षण

एक आम आदमी के लिये ये समझना बेहद मुश्किल  है कि उसके शरीर में कैंसर जैसे रोग ने जन्म ले लिया है और जब तक उसे यह ज्ञात होता है तब तक वह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दूसरी या तीसरी स्टेज की दहलीज़ पर पहुँच जाता है. सामान्यत: कैंसर को 1 से 4 स्टेज तक विभाजित  किया गया है. इसलिये ये आवश्यक  है कि हम सभी को इस रोग के लक्ष्णों की जानकारी  होनी चाहिए  ताकि हम या हमारे जानकार इस गंभीर स्थिति में न पड़े.
(a) स्तन पर गाँठ या कड़ापन हो जाना. ऐसा शरीर के किसी अन्य भाग पर भी हो सकता है.
(b) शरीर में मौजूद तिल में परिवर्तन होना या नए तिल का उभर आना
(c) कोई ऐसी ख़राश जो लगातार  बनी रहे.
(d) आवाज़ का बैठ जाना
(e) खाना निगलने में परेशानी होना
(f)  भोजन के पश्चात Uneasy feel करना,उल्टी आना कभी-कभी खून की उल्टी होना.
(g) मलमूत्र करने में असुविधा व परिवर्तन
(h) अकस्मात वजन में गिरावट या वृद्धि होना
(i) असामान्य तरीके से रक्तस्राव होना
(j) कमजोरी या लगातार थकावट महसूस करना
यह  आवश्यक  नही कि ये लक्षण कैंसर की वजह से ही हों . इसकी सही जानकारी सिर्फ डॉक्टर ही दे सकते हैं. इसलिये यदि इन लक्षणों के साथ शरीर के Regular  System में परिवर्तन नज़र आए तो शीघ्र डॉक्टर को दिखाना उचित है. यह भी बताना आवश्यक है कि  शुरुआती दौर में कैंसर दर्द नहीं देता परन्तु यदि ऐसे कुछ लक्षण देखें तो दर्द होने की प्रतीक्षा  न करते हुए  डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिये.

कैंसर होने के अन्य कारण

– आज का तनाव भरा जीवन
-Balanced Diet न लेना
-FAST Food और JUNK Food खाना
-READY TO EAT भोजन खाना जिसमें हानिकारक  Preservatives होते हैं.
-तंबाकू, मदिरा और धूम्रपान करना
-अधिक  FAT FOOD और RED MEAT का सेवने , SMOKING भी इस कैंसर के कारण हैं.
-POPCORN, Microwave Food, Preserved Food कैंसर को बढ़ावा देते हैं.

कैंसर के प्रकार

ब्लड कैंसर
-शरीर की Blood Cells में कैंसर फैलने लगता है.
– शरीर में खून की कमी होने लगती है
-यह इंसानों में सबसे अधिक फैलने वाला कैंसर है.

स्किन कैंसर

-यह कैंसर बहुत लंबे समय तक  तेज धूप में रहने से
-और सही पोषण ना लेने से
– ज़ीरो फीजिकल ऐक्टिविटीे जैसे कारणों से होता है
-किसी भी आयु के इंसान को हो सकता है.

ब्रेस्ट कैंसर

-यह कैंसर ज़्यादातर महिलाओं में होता है पुरुषों की अपेक्षा.
– इस कैंसर में महिलाओं के स्तन में शुरुआतमें एक गांठ जैसी दिखता है जो धीरे-धीरे फैलकर घातक हो  जाती है.
-इसलिये ब्रेस्ट चेकअप कराते रहना आवश्यक  है.

सर्वाइकल कैंसर

-यह कैंसर भी महिलाओं में पाया जाता है.
– सर्वाइकल कैंसर महिला के गर्भाशय की कोशिकाओं में अनियमित वृद्धि होने की वजह से होता है.

ब्रेन कैंसर

– यह कैंसर व्यक्ति के दिमाग के हिस्से में होता है. इसे ब्रेन कैंसर या ब्रेन ट्यूमर के नाम से भी जाना जाता है.-ब्रेन में एक ट्यूमर उत्पन्न  हो जाता है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति  के पूरे शरीर पर प्रभाव  डालता है.

बोन कैंसर

-यह हड्डियों का कैंसर है.
– शरीर की हड्डियों पर आक्रमण करता है
– कैल्शियम की कमी भी इस प्रकार के कैंसर पनपना की मुख्य वजह हैं. इसमें हड्डियां कमजोर होने लगती हैं
-बच्चों व बुज़ुर्गों में अधिकतर पाया जाता है ये कैंसर

प्रोस्टेट कैंसर

– यह कैंसर पुरुषों में तेजी से फैल रहा है.
 – इस कैंसर की पहचान काफी देर से हो पाती है जिसकी वजह से पहचान  होते-होते काफी मुश्किल  हो जाता है  इसका उपचार

फेफड़ों का कैंसर(लंग कैंसर)

– फेफड़ों की स्थिति बहुत अधिक खराब हो जाती है. – – श्वांस लेने में दिक्कत, हर समय कफ की समस्या, हड्डियों और जोड़ों में दर्द भूख ना लगना, अत्यधिक कमजोरी, थकान जैसे लक्षण दिखता हैं.
-दूसरी वजह प्रदूषण और Smokoing भी है.

पैनक्रियाटिक कैंसर

-यह अग्नाशय में होनेवाले कैंसर है
 -भूख कम हो जाती है, लगातर कमजोरी, मन ठीक न रहना, उल्टियां होना , पेट मेंजलन आदि समस्याएँ होती है

कैंसर की जाँच के तरीके

शारीरिक SYSTEM में परिवर्तन से कैंसर होने की आशंका  हो तो तुरंत अपने नज़दीकी  अस्पताल  के डॉक्टर से संपर्क करें और कैंसर की जाँच हेतु कुछ आवश्यक टेस्ट डॉक्टर द्वारा Prescribed
करने पर करवाएं जो  ये भी सुनिश्चित  करता है कि यदि कैंसर है तो वो किस प्रकार का कैंसर है और कौन-सी स्टेज का कैंसर है. ऐसे ही कुछ टेस्टिंग की जानकारी  यहाँ  दी जा रही है…..

सीबीसी और ड्ब्लूबीसी

-इस टेस्ट से कैंसर की पक्की जानकारी नहीं मिलती – -उपचार को किस दिशा में ले जाना ह बस  ये ज्ञात होता है
-यह टेस्ट महंगा नही.
ड्ब्लूबीसी– WBC यानि श्वेत रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर कोProtect करनेवाली Guard की तरह कार्य करती हैं
– शरीर का बचाव करती है.
– स्वस्थ शरीर में 1 CUBIC ML BLOOD में इसकी संख्या 4 Thousand से लेकर 11 Thousand तक होती है.

सीटी स्कैन और एमआरआई

– सीबीसी टेस्ट के से यदि उपचार में उचित मार्ग-दर्शन के अभाव में डॉक्टर रोगी को सीटी स्कैन और एमआरआई (MRI) की सलाह देते हैं.
-यह टेस्ट महँगे हैं और लगभग 5 हज़ार से 7 हज़ार तक का खर्च बैठता है.

हीमोग्लोबिन टेस्ट

-यह शरीर में ऑक्सिज़न को संभालता है.
 60 वर्ष से अधिक आयु वाले के शरीर में हीमोगलोबिन की मात्रा 10 से कम नहीं होनी चाहिए
 -60 साल से कम आयु वालेमें हीमोग्लोबिन की मात्रा पुरुषों में 14 से 17 और महिलाओं में 12 से 15 के बीच होनी चाहिए.
– हीमोग्लोबिन इससे कम या बहुत ज्यादा है तो शीघ्र डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बायोप्सी

– कैंसर की संभावना को पक्का करने के लिए यह एक विश्वसनीय टेस्ट है.
– रोगी के शरीर से एक सैंपल लेकर उसका टेस्ट किया जाता है.
 -इसकाखर्च भी  5 हजार से 7 हजार के बीच का होता है.
कैंसर की पक्की जानकारी होने और किस प्रकार का, किस स्टेज का कैंसर है इसी के आधार पर डॉक्टर ट्रीटमेंट की प्रक्रिया आरंभ करते हैं.
रोगी को कैसे और रेडिएशन कितने लगने हैं ये सब उसके रोग की स्टेज पर ही निर्भर करता है.
कैंसर एक ऐसा रोग है, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर में पनपता है और समय के साथ-साथ भयंकर रुप ले लेता है परंतु यदि समय पर इसके लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो इसपर काबू पाया जा सकता है

कैंसर के उपचार

इसमें रोगी की उनके केस की गंभीरता के अनुसार कैसे,  रैडिएशन और सर्जरी की जाती है.

कीमोथेरेपी

-कैंसर के लिये यह एक आम उपचार  है.
-चार से छह महीने तक यह ट्रीटमेंट जारी रहता है
– थैरेपी  के दौरान और उसके पश्चात आहार संबंधी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.
-कीमोथेरेपी  होने के पहले दिन और एक-दो दिन बाद तक भूख कम लगती है. जी मिचलाना, उल्टी भी आती है. उल्टी से बचने की दवाइयां दी जाती हैं.
– आहार में अधिक मात्रा में ऐसे तरल और नर्म खाद्य पदार्थो  देना चाहिए ताकि तुरंत एनर्जी  मिल पाए

रेडियोथेरेपी

-इस रेडियोथेरपी  जो कि चेहरे और गर्दन से संबंधित है Sensitivity और Ulcer (फोडे)हो सकता है. जिसके कारण खाना निगलने में समस्या आती है.
– तरल व हल्की डाइट लेना उचित होताहै
 -Oily,Spicy food से परहेज करना चाहिए.
-severe Pain  हो तो डॉक्टरी परामर्श से दर्द दूर करने की दवा नियमित रूप से लेनी चाहिये.

सर्जरी

 -सर्जरी के उपरांत जितना संभव हो मुंह से आहार देना चाहिए. जिसमें भरपूर Calorie, Protein, Vitamins हों
-इससे घाव जल्दी भरते हैं.

कैंसर के उपचार  के दौरान क्या खायें?

कैंसर के मरीज़ों में पोषण की कमी हो जाती  है इसलिये उनको पोषक आहार देना ज़रूरी है.  कार्बोहाइड्रेट  से भरपूर आहार दें जो अनाज, फल एवं साग-सब्जियां मसलन आलू कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोत हैं.
 मीठे खाद्य पदार्थ भी कार्बोहाइड्रेट के स्रोत हैं. डायबिटीज के रोग से पीड़ित लोगों को इससे परहेज करना चाहिए.

प्रोटीन

मांसपेशियों के विकास और काम के लिए ऊर्जा प्राप्त करने के लिए PROTEIN खिलाएँ जोअंडा, मीट, मसूर की दाल, मटर, बींस, सोया और नट्स आदि में मिलते हैं.
घाव भरने, बीमारी से लडने और खून के थक्का जमने जैसी  क्रियाओं के लिए भी PROTEINज़रूरी है.

विटमिंस व मिनरल्स

कैंसर Patient के लिए उचित आहार के साथ-साथ बेहतर पोषण में VITAMIN और MINERAL की अहम भूमिका होती है.

तरल पदार्थ

 पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए. तली-भुनी, बहुत मसालेदार चीज़े नही खानी चाहिए.  जिसे पचाना आसान न हो और पेट भी भारी  लगता है.

सावधानी, परवाह और भावनात्मक जुड़ाव

इन सभी सावधानियों को बरतते हुए  कैंसर के रोगी का भावनात्मक स्तर पर पूरा ख्याल  रखे क्योंकि कीमोथेरेपी  के बाद उसके शरीर में परिवर्तन  आते हैं जैसे बाल उड़ना,  नाखूनों के काले हो जाने की समस्या. इसलिये उस वक्त उसे अपना भरपूर विश्वास,  साथ और प्रेम दें ताकि उसका आत्म विश्वास  बना रहे. ट्रीटमेंट के पश्चात  भी रोगी के केस के अनुसार  Under MEDICATION रहना होता है तथा शरीर में कुछ बदलाव जैसा हाथ, कमर, पैरों में दर्द की समस्या रहती है.  ऐसे समय पर उसका ध्यान  रखें. वैसेे तो रोगी  एक सामान्य जीवन जीने लगता है.  रेडिएशन के बाद बाल ज्यों के त्यों उग आये हैं . परन्तु कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो इंसान  को भीतर से खोखला कर देती है.
इसलिए उपचार से बेहतर सदैव बचाव है, है ना!