CDS Bipin Rawat air-crash: क्या यह सुरक्षा चूक थी या एक गहरी साजिश ?

अगर यह दुर्घटना, जिसमे देश के सुरक्षा प्रमुख के प्राण चले गए, एक सुरक्षा चूक है तो यह सुरक्षा चूक भी सवालों के घेरे में है और यह घटना किसी गहरी साजिश का परिणाम हो सकती है..
प्रधानमंत्री मोदी के विश्वसनीय और भारत राष्ट्र के सुरक्षा प्रमुख जनरल विपिन रावत नहीं रहे. इस समाचार पर विश्वास नहीं होता. ऐसा लगता है कि ऐसा कैसे हो सकता है. पर ऐसा हुआ है ..और ऐसा हुआ है इसका अर्थ ये है कि भारत में एक गहरा षड्यंत्र सफल हुआ है जिसने देश की सुरक्षा पर सेंध लगाईं है.

देश के मनोबल को गिराने का प्रयास

जनरल विपिन रावत एक शानदार सेनाधिकारी थे और एक जानदार व्यक्तित्व के स्वामी भी, जिन्हे देख कर ही लगता था कि वे भारत के सेनापति हैं. प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, प्रधान सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख जनरल विपिन रावत – ये चार नाम भारत की सुरक्षा की पहचान थे जिनमे से एक स्तम्भ अब धराशायी हो गया है. भारतवर्ष की सेना और देश की प्रजा के मनोबल को गिराने का षड्यंत्र हो सकती है यह वायु-दुर्घटना.

जनरल रावत के भीतरी शत्रु

देशभक्तों के इस देश में तो शायद जनरल रावत का कोई शत्रु नहीं था, पर देश के भीतर देशद्रोहियों की भी एक बड़ी जमात सक्रिय है जिनका निशाना जनरल रावत हो सकते हैं. कारण स्पष्ट है राष्ट्र की सुरक्षा के उपरोक्त चार स्तम्भों में कदाचित रावत को ही कुछ आसानी से निशाना बनाया जा सकता है इसकी आशंका शेष तीन की तुलना में कुछ कम ही दिखाई देती है. सम्भव है कि इसी तथ्य का लाभ लेते हुए देश के भीतर के लोगों द्वारा इस षड्यंत्र में भूमिका निभाई गई हो.

जनरल रावत के बाहरी शत्रु

जनरल रावत के बाहरी शत्रुओं की बात की जाए तो सीधे-सीधे दो ही शत्रु नज़र आते हैं जिनकी आँख की किरकिरी हो सकते थे भारत के सुरक्षा प्रमुख. दोनों देश भारत के दुश्मन हैं और यह दुनिया जानती है. पाकिस्तान और चीन नामक भारत के ये पड़ौसी देश भारत को किसी भी तरह हानि पहुंचाने की ताक में रहते हैं परन्तु मोदी, शाह, डोभाल और रावत का चतुर्भुज उनके नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए हमेशा सजग भी रहा है और सन्नद्ध भी.

जनरल रावत के घातक बयान

जनरल रावत के कुछ बयान कुछ बाहरी ताकतो्ं के लिये घातक ही थे. ये घातक बयान इतने जोरदार थे कि बाहरी बुरी नजरों पर गहरे घाव कर गये थे. जनरल रावत के इन बयानों को जोरदार हम इसलिए भी कहना चाहेंगे कि उन्होंने देश की सुरक्षा का उत्तरदायित्व लेते हुए देश के स्वाभिमान को सर्वोपरि रखा. उन्होंने पकिस्तान जैसे पापिस्तान को और चीन जैसे नामचीन दगाबाज़ को आड़े हाथों नहीं लिया बल्कि सीधे हाथों लिया और सीधे-सीधे शब्दों में सीधे सीधे ललकारा. चीन और पकिस्तान दोनों को जनरल रावत की ये अदा पसंद नहीं आई. और हो सकता है इन देशों की ही यह कोई चाल हो जिसमे देश के भीतर के गद्दारों ने इस षड्यंत्र में बाहरी ताकतों का साथ दे कर देश के सेनापति के प्राण ले लिए हों.
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