Chaturmas : जानिये क्या है सनातन धर्म का चातुर्मास

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सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इसमें आने वाले चार महीने जिसमें सावन, भादौ,आश्विन और कार्तिक का महीना आता है। चातुर्मास के चलते एक ही स्थान पर रहकर जप और तप किया जाता है।
आज भी जैन मुनि चातुर्मास में एक ही स्थान पर बैठकर जप, तप, साधना व प्रवचन करते हैं। रामचरितमानस में एक प्रसंग है जिसमें भगवान श्रीराम वनवास के समय चिंता व्यक्त करते हैं कि चौमासा भी बीत चुका है,अब हमें लंका की ओर प्रस्थान कर देना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान यानी 4 माह में विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं। चातुर्मास के इस काल में व्रत-पूजन का विशेष लाभ मिलता है. आइए जानते है इन विशेष 4 माह का महत्व एवम उनके अनुसार पूजन क्रम।।
चातुर्मास में भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए विश्राम करते हैं ऐसे में सृष्टि का संचालन भगवान शिव अपने हाथों में लेते हैं। भगवान शिव को सावन का महीना सबसे प्रिय है।।
भाद्रपद महीने में भगवान गणेश और विष्णु जी के कृष्ण अवतार की पूजा का विधान है। इसी महीने में सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माने जाने वाले गणेश जी का अवतरण दिवस,गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है।।
चातुर्मास का तीसरा महीना मां दुर्गा की उपासना के लिए समर्पित है। इस महीने में मां दुर्गा के शारदीय नवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाता है।।
चातुर्मास का आखिरी महीना कार्तिक मास हिन्दू धर्म में अत्यधिक पवित्र महीना माना जाता है। इसी माह से देव तत्व मजबूत होते हैं। एकादशी की तिथि, जिसे देवउत्थान एकादशी भी कहते हैं, पर मान्यता अनुसार भगवान विष्णु योग निद्रा त्याग कर अपना कार्यभार संभालते हैं और सभी मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाते हैं।

 

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