चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ एक्शन में CBI, 2020 में बच्चों के खिलाफ 400% बढ़े साइबर क्राइम के मामले

बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के मामलों में 400% की बढ़ोतरी हुई है. देश में बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो (Objectionable Video) बनाने और उन्हें शेयर करने के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 14 राज्यों में छापेमारी की है. पुलिस के मुताबिक, चाइल्ड पोर्नोग्राफी का खेल 100 देशों से जुड़ा है, जिसकी जांच में सीबीआई जुटी हुई है. राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 के मुकाबले साल 2020 में बच्चों के खिलाफ साइबर क्राइम के मामलों में 400% की बढ़ोतरी हुई है. CBI ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और शोषण से संबंधित आरोपों पर अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं.

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ एक्शन में CBI

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) चाइल्ड पोर्नोग्राफी के खिलाफ काफी एक्टिव है और लगातार छापेमारी कर रही है. सीबीआई ने इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी यानी विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसईएम) को फैलाने के मामले में 14 राज्यों के 76 ठिकानों पर छापेमारी की है. अधिकारियों के मुताबिक सीबीआई ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण एवं उत्पीड़न के मामले में शामिल 83 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए हैं.

100 देशों से जुड़े तार

देश भर में CBI की छापेमारी में बड़ी मात्रा में अलग अलग ठिकानों से गैजेट्स, पैन ड्राइव, लैपटॉप जब्त किए गए हैं, जिनसे बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं. शुरुआती जांच और पूछताछ में  ये सामने आया है कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी के तार 100 देशों से जुड़े हुए हैं. ऐसे में पुलिस मामले में 100 देशों के कई नागरिकों की भूमिका की भी जांच कर रही है. एफआईआर के मुताबिक विभिन्न भारतीय शहरों और कई दूसरे देशों में स्थित आरोपी, चाइल्ड पोर्नोंग्राफी से जुड़े सिंडिकेट का हिस्सा हैं, जो सीएसईएम को एकत्रित करने, प्रसारित करने में लिप्त हैं.

चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में यूपी टॉप पर

एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों के मामले में टॉप 5 राज्यों में यूपी टॉप पर है. उत्तर प्रदेश (170), कर्नाटक (144), महाराष्ट्र (137), केरल (107) और ओडिशा (71) शामिल हैं. एनसीआरबी के 2020 के आंकड़ों से पता चलता है कि 2019 की तुलना में बच्चों के खिलाफ हुए साइबर अपराधों (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत पंजीकृत) में 400% से अधिक की वृद्धि हुई है. इसके मुताबिक 2019 में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों के 164 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2018 में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों के 117 मामले सामने आए थे. इससे पहले 2017 में ऐसे 79 मामले दर्ज किए गए थे.