भारत की Vaccine डिप्लोमेसी से चीन को हुई तकलीफ, Covishield पर शुरू किया दुष्प्रचार

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एक तरफ चीन के कोरोना वायरस से जूझ रही दुनिया को कोरोना वैक्सीन का इंतज़ार है दूसरी तरफ चीन वैक्सीन का धंधा दुनिया में चमकाने के लिए हर तरीका आज़मा रहा है. जब चीन को पता चला कि भारत अपने करीब 10 पड़ोसी देशों को वैक्सीन सप्लाई (Vaccine Maitri) करने जा रहा है तो चीन को बेहद तकलीफ पहुंची है और उसने भारत की वैक्सीन को लेकर झूठ फैलाना शुरू कर दिया है.

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर सवाल उठाये

चीन किसी भी तरह भारत का कोरोना वैक्सीन का बाज़ार कम से कम करना चाहता है. इसके लिए उसने भारत की कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर दुष्प्रचार शुरू कर दिया है. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सीरम इंस्टीट्यूट में आग लगने की घटना की बात करके भारत की वैक्सीन (Covid-19 Vaccination) की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है. ग्लोबल टाइम्स का ये भी दावा है कि चीन में रहने वाले भारतीय लोग चीन की वैक्सीन को ही प्राथमिकता दे रहे हैं.

दस देश ले रहे हैं वैक्सीन

भारत की वैक्सीन की सफलता का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि दस देशों ने ये वैक्सीन लेने में दिलचस्पी दिखाई है और भारत उन्हें वैक्सीन सप्लाई भी कर रहा है. दूसरी तरफ भारत में भी कोरोना वायरस के खि‍लाफ युद्धस्तर पर टीकाकरण (COVID-19 Vaccination) का काम चल रहा है. भारत ने अपने पड़ोसी देशों की ओर मदद का हाथ बढ़ते हुए लगभग दस पड़ोसी देशों को वैक्सीन सप्लाई (Vaccine Maitri) करने का काम शुरू कर दिया है. इन देशों में बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव, सेशेल्स और म्यांमार शामिल हैं. इसके अलावा अफगानिस्तान, श्रीलंका और मॉरिशस से भी भारत की बातचीत चल रही है.

‘ब्रिजिंग स्टडी भी अपूर्ण है’

ग्लोबल टाइम्स ने न केवल सीरम इंस्टीट्यूट में आग लगने की घटना पर ज़ोर देते हुए भारत की वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दुर्बल बताया है बल्कि ये भी कहा कि भारत के ही पेशेंट्स राइट्स ग्रुप ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क का कहना है कि सीरम ने कोविशील्ड को लेकर ब्रीजिंग स्टडी को पूरा नहीं किया है.

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