Nepal: चीन के चंगुल में फंसे देश को अमेरिका ने लगाया टीका

नेपाल में कोरोना से डरी हुई आम जनता टीकों की कमी से जूझ रही है। टीका लगवाने के लिये आम लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है| स्थिति ये है कि किसी को टीके की एक डोज़ लगी है तो वो दूसरे डोज़ की उम्मीद लगाये बैठा है जिसका दूर-दूर तक अता-पता नही | देश की अधिकांश आबादी को तो अभी सिंगल डोज़ भी नही लगी है|

अमेरिका ने बढ़ाया मदद का हाथ

इस चिंताजनक समस्या से उबरने मे संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने नेपाल की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है| कोवाक्स योजना के तहत अमेरिका ने नेपाल को 15,34,850 खुराक भेजी है | अमेरिकी राजदूत रैंडी बेरी द्वारा स्वास्थ्य मंत्री कृष्ण गोपाल श्रेष्ठ को सोमवार को 15 लाख टीकों की सौगात मिली |

मिलेंगे पंद्रह लाख टीके

रैंडी बेरी ने ट्वीट पर बताया कि “आज हम नेपाल को कोवाक्स के माध्यम से पर्याप्त जेएनजे (जॉनसन एंड जॉनसन) कोविड-19 टीके दे रहे हैं, जिससे 15 लाख लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया जा सके। मुझे गर्व है कि अमेरिका नेपाल को कोविड-19 सहायता देने वाला एकमात्र सबसे बड़ा देश है।”

कोवाक्स के टीके हैं ये

यह प्रशंसनीय है कि अमेरिका ने नेपाल की ऐसे समय में सहायता की जब वह टीकाकरण की गंभीर समस्या से गुज़र रहा है| नेपाल को अमेरिका से जॉनसन एंड जॉनसन टीके की 15 लाख से ज़्यादा वैक्सीन मिली है | देश में इस समाचार से खुशी की लहर फैल गई है वहीं लोगों में अब टीके लग जाने की उम्मीद भी लगी है |

नेपाल अब अमेरिका का भी साथी

ज्ञातव़्य है कि ऊपरी तौर पर अमेरिका द्वारा टीके की खुराक भेंट स्वरूप भेजे जाने के पीछे का महत्वपूर्ण अभिप्राय सिर्फ और सिर्फ मानव जीवन की रक्षा और कल्याण है किन्तु राजनीतिक दृष्टि से दक्षिण एशिया में यह नेपाल को अपना बनाने की रणनीति भी है।
पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने अमेरीकी सरकार के इस मित्रतापूर्ण व्यवहार के प्रति नेपाल सरकार की ओर से आभार भी व्यक्त किया है जो अब नये प्रधानमंत्री देउबा की तरफ से भी अमेरिका में आपेक्षित होगा|
-अंजू डोकानिया
(काठमांडू ब्यूरो प्रमुख, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)

 

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