China के विस्तारवाद का ताजा शिकार, जल्दी हो जायेगा कब्जा इस देश पर

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खबर थोड़़ी चौंकाने वाली मगर सत्य है कि चीन अब मुग़ल-काल और ब्रिटिश-राज्य काल की ज़मीन हथियाने की नीति यानि विस्तारवाद का अनुसरण करता नज़र आ रहा है| पहले ही श्रीलंका और मालदीव की संपत्तियाँ ये रावण रूपी ड्रेगन डकार चुका है| अब बारी है मोंटेनेग्रो (यूरोप)की|

ऊँची ब्याज दर पर ऋण

जिस प्रकार ब्रिटिश-काल में ज़मींदार किसानों को बड़े ब्याज दर पर ऋण देते थे| बेचारे किसान की कमर टूट जाती ब्याज चुकाते-चुकाते परन्तु मूल ज्यों का त्यों खड़ा रहता था और अंत में लालची ज़मींदार उस किसान की ज़मीन हड़प लेता था| यही दोगली नीति चीन ने भी अपनाई है| मोंटेनेग्रो यूरोप का एक छोटा-सा शहर है|

“बेल्ट एंड रोड” परियोजना के तहत अपने देश में हाईवे बनाने के लिये इसने चीन से एक करोड़ डॉलर का ऋण लिया था परन्तु इसका निर्माण कार्य कुछ दूरी तक ही संभव हो पाया है अब तक| अब इसी महीने मोंटेनेग्रो को इस कर्ज की पहली इंस्टॉलमेंट चीनी सरकारी बैंकों को लौटानी होगी| अभी तक इस बात की पुष्टि नही हो पाई है कि मोंटेनेग्रो इस कर्ज़ को लौटा भी पायेगा या नहीं|

सरकारी चीनी कंपनी का दखल

दिलचस्प बात यह है कि एक डेली मेल के अनुसार इस परियोजना में चीन की सरकारी कंपनी चाइना रोड एंड ब्रिज कॉर्पोरेशन का दखल है| यह कंपनी चीन से बुलाए गए श्रमिकों की सहायता से ये पुल बना रही है। ध्यान देने वाली बात ये है कि कंपनी ने अभी तक हाइवे के पहले सेक्‍शन का भी कार्य पूरा नही किया है(सर्बिया के बेलग्रेड तक ) | ये हाईवे 270 मील लंबा बनने वाला है|

इस कर्ज़ की पहली किश्त एक अरब डॉलर मोंटेनेग्रो को चीन के सरकारी बैंक को इसी महीने लौटाना है परन्तु मोंटेनेग्रो द्वारा ऋण लौटा पाने का कोई स्पष्टीकरण अभी तक नही मिला है|

शिकारी चीन के जाल ने किया हाल बेहाल

सर्वविदित है कि अभी मोंटेनेग्रो पर उसकी कुल जीडीपी का भी दोगुना ऋण है। चीन के साथ किये गये एग्रीमेंट के अनुसार यदि मोंटेनेग्रो निर्धारित समय- सीमा के अंदर कर्ज़ चुकाने में असमर्थ रहता है तो मोंटेनेग्रो के अंदर जमीन पर चीन का एकाधिकार हो जायेगा। मोंटेनेग्रो की पूर्व सरकार ने भी ये संवाद जारी किया हे कि यदि किसी कारणवश कर्ज़ चुकता नही होता तो इस एग्रीमेंट के संदर्भ में उठे विवाद का फैसला चीन की अदालत में होगा।

“बेल्‍ट एंड रोड परियोजना” का किया उपयोग

मोंटेनेग्रो के उप प्रधानमंत्री अब्‍जोविक ने कहा था कि बड़ी बेतुकी सी शर्तों पर इस समझौते की नींव रखी गई है| उन्‍होंने ये भी कहा कि, ‘यह सामान्‍य नहीं है। यह देशहित के किसी भी लॉजिक के बाहर है।’ चीन द्वारा बनाई जा रही फिलहाल इस निर्माणाधीन सड़क को लेकर यूरोप में काफी बहस और तनाव चल रहा है। ये भी दावा किया जा रहा है कि चीन का प्रभाव और दबाव यूरोप जैसे समृद्धशाली देशों में भी बढ़ता जा रहा है।

चीन की महत्‍वाकांक्षा इतनी बढ़ गई है कि “बेल्‍ट एंड रोड परियोजना” की आड़ में वह एशिया और अफ्रीका के गरीब देशों को कर्ज का लोभ दिखा रहा है | उन देशों की कमज़ोर अर्थ और आधारव्यवस्था को मज़बूत करने का झूठा झांसा दे रहा है|

विदेशी मुद्रा का भंडार

चीन के पास अथाह भंडार है विदेशी मुद्राओं का| चीन दुनिया के कमज़ोर देशों को मदद की आड़ में लोन दे रहा है और कर्ज़ न चुका पाने की स्थिति में उनकी जमीनों और संपत्तियों पर अधिकार जमा रहा है। इसका ताज़ातरीन उदाहरण श्रीलंका है। श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल के लीज पर चीन ने अपना कब्ज़ा जमा लिया है|
चीन का ऋण न चुका पाने के कारण ये नौबत आई|

मालदीव का भी यही हाल है| एक कहावत है “नंगा क्या नहायेगा,क्या निचोड़ेगा|” चीन का कर्ज चुकाने में इसकी हालत खराब हो रही हैं। मंगोलिया और दज़िबूती का भी यही दर्द है, चीन उनको भी खून के आँसू रूला रहा है|