“दादाश्री” फिरोज गाँधी कौन थे?

 प्रियंका वाड्रा जी को ये तो बता दिया गया सरदार पटेल कौन थे -किसी ने ये नहीं बताया “दादाश्री” फिरोज गाँधी कौन थे?
सरदार पटेल की हर जयंती पर कांग्रेस का कोई ना कोई नेता एक राग जरूर अलापता है कि सरदार पटेल तो कांग्रेसी नेता थे – मगर कोई कांग्रेसी उन्हें श्रद्धांजलि नहीं देता –अबकी बार ये विलाप तथाकथित गाँधी खानदान की बेटी प्रियंका वाड्रा जी ने किया है.
प्रियंका ने कहा –सरदार पटेल कांग्रेस के निष्ठावान नेता थे जो कांग्रेस की विचारधारा के प्रति समर्पित थे। वह नेहरू जी के क़रीबी साथी थे और RSS के सख़्त ख़िलाफ थे – आज भाजपा द्वारा उन्हें अपनाने की कोशिशें करते हुए और उन्हें श्रद्धांजलि देते देख के बहुत ख़ुशी होती है, क्योंकि भाजपा के इस ऐक्शन से दो चीज़ें स्पष्ट होती हैं:-
1. उनका अपना कोई स्वतंत्रता सेनानी महापुरुष नहीं है-  तक़रीबन सभी कांग्रेस से जुड़े थे-
2. सरदार पटेल जैसे महापुरुष को एक न एक दिन उनके शत्रुओं को भी नमन करना पड़ता है –
मैडम को आधा अधूरा ज्ञान तो दे दिया उसकी पार्टी ने सरदार साहब के बारे में मगर कभी ये सोचा कि ये भाजपा ही है जो गैरों को भी अपना लेती जबकि कांग्रेस अपने स्वार्थ के लिए अपनों को भी ठुकराती रही है –सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री ऐसे ही उन नेताओं में थे –वैसे तो कांग्रेस ने नेहरू के सामने सबको बौना बना दिया और गाँधी को आजतक याद रखा केवल उनकी हत्या का ठीकरा RSS पर फोड़ कर वोट बटोरने के लिए.
सरदार पटेल ऐसे ही कांग्रेसी थे और इतने नेहरू जी के करीब थे तो मैडम थोड़ा पता कर लेतीं कि नेहरू जी ने पटेल साहब की मृत्यु की घोषणा एक घंटे बाद की और आदेश दिया कि उन्हें दी हुई सरकारी  गाड़ी तुरंत वापस ले ली जाये.
दूसरा आदेश था कि जो गृह मंत्रालय के सचिव या अधिकारी उनके अंतिम संस्कार में जाना चाहते हैं, वो अपने खर्चे पर जाएँ.
लेकिन तत्कालीन गृह सचिव वी पी मेनन ने सभी अधिकारियों को अपने खर्चे पर मुंबई भेज दिया पटेल के अंतिम संस्कार में.
प्रियंका वाड्रा ये बताएं कि जब पटेल इतने बड़े कांग्रेसी थे तो उनकी मूर्ति “Statute of Unity” के अनावरण में कोई कांग्रेसी नेता क्यों नहीं गया ?
इतना ही नहीं, नेहरू जी के पटेल इतने करीब थे कि उनकी कैबिनेट ने राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को सलाह दी कि वो पटेल के अंतिम संस्कार में ना जाएं लेकिन डॉ साहब फिर भी गए परन्तु नेहरू ने वहां उन्हें स्मारक पत्र नहीं पढ़ने दिया जिसके लिए सी राजगोपालाचारी को भेजा था जिन्होंने उसे पढ़ा.
कांग्रेस कितनी उदार थी पटेल के लिए इसका अंदाजा नहीं है प्रियंका वाड्रा को कि पटेल की मृत्यु के 41 साल बाद उन्हें भारत रत्न पुरस्कार दिया गया और वो भी नरसिम्हा राव सरकार ने दिया.
जबकि नेहरू ने खुद को भारत रत्न पुरस्कार दे दिया 1955 में जबकि मौत हुई 1964 में, इंदिरा गाँधी ने भी खुद ले लिया भारत रतन 1971 में जबकि मौत हुई 1984 में और राजीव गाँधी को भी दे दिया राव सरकार ने 1991 में उनकी मौत के बाद और उसके साथ ही 1991 में पटेल को दिया गया  जबकि उनकी मृत्यु हुई 1950 में.
प्रियंका गाँधी को कोई ये भी बता देता कि उसके दादाश्री फिरोज गाँधी भी एक कांग्रेसी थे और उसके परनाना नेहरू जी की कैबिनेट में मंत्री थे मगर 1960 में उनकी मृत्यु के बाद ना कोई कांग्रेसी उन्हें श्रद्धांजलि देता है और ना कोई गाँधी परिवार का सदस्य उन्हें फूल चढाने उनकी समाधी पर गया –मैडम प्रियंका, इस सवाल का जवाब भी दीजिये, ऐसा क्यों है कि आपके तथाकथित गाँधी खानदान ने आपके दादाश्री फिरोज गाँधी को भुला दिया जिनके साथ आपका खून का रिश्ता है–क्या कसूर किया फिरोज गाँधी ने ?