बिहार के Bank में लाश आई… फिर बैंककर्मियों के होश पर बन आई

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बिहार. बैंक में काम कर रहे सभी कर्मचारी अचानक हैरान रह गए जब उन्होंने देखा अपने सामने एक पूरी लाश को. सुबह का मूड अजीबोगरीब हो गया और बैंककर्मियों के होश उड़ गए. बैंक में लाश का क्या काम? क्या करने आई थी ये लाश इस बैंक में ? आइये हम आपको बताते हैं सारी कहानी.

बना दिया विश्व कीर्तिमान

पटना की है ये घटना. पटना (Patna) के बैंक ने ये विश्वकीर्तिमान. अब तक यहां इस बैंक में जिंदा लोग पैसे के लेन देन के लिए आते थे लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि यहां एक लाश भी आई. दुनिया के किसी बैंक में कभी कोई लाश नहीं आई, हाँ लाश बाहर तो निकली है दुनिया के कई बैंकों से जहां बैंक डकैतियां पड़ी हैं और डकैतों ने लोगों को गोली मारी है, लेकिन लाश का आना किसी बैंक में पहली बार हुआ है और ऐसा हुआ है पटना के इस बैंक में. अब यह बैंक पटना में इस घटना के लिए हमेशा याद किया जाएगा.

शाहजहांपुर का है मामला

पटना का नाम करने वाला ये बैंक शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में है. शाहजहांपुर थाना क्षेत्र के सिगरियावा गांव में एक बैंक में इस सुबह हमेशा की तरह कई लोग पैसे के लेनदेन के लिए आये थे और इन लोगों में था एक मुर्दा जो यहां पैसा लेने पहुंच गया था. घटना है मंगलवार की सुबह की और ये बैंक था केनरा बैंक.

मैनेजर की वजह से आना पड़ा लाश को

जो जानकारी मिली है उसके अनुसार बैंक मैनेजर ने बुलाया तो नहीं था पर उनकी वजह से ही ये लाश बैंक में चली आई और जब केनरा बैंक की सिंगारियावा गांव की शाखा में महेश यादव नाम के शख्स का शव आ पहुंचा जिसे लेकर उसके परिजन बैंक में पहुंचे थे और इन परिजनों की मांग थी कि महेश के खाते में जमा रकम उन्हें दी जाए.

बैंक के नियम नहीं देते अनुमति

घटना की शुरुआत सिगरियांवा गाँव के निवासी महेश यादव (Mahesh Yadav) की मंगलवार को हुई मौत से हुई. महेश की मौत के बाद जब गाँव वालों ने उसके अंतिम संस्कार के लिए बैंक में उसके खाते में जमा पैसों की मांग की तो बैंक के मैनेजर ने इंकार कर दिया. इसके बाद गुस्साए ग्रामीण महेश यादव का शव लेकर बैंक के अंदर आ पहुंचे और उन्होंने वो शव बैंक मैनेजर के चैंबर के सामने वहीं रख दिया.

तीन घंटे बनी रही अफरातफरी

बैंक में ग्रामीणों और बैंककर्मियों के बीच बहस चलती रही और लाश वहीं रखी रही. तीन घंटे की इस अफरातफरी के बाद हालात ठीक हुए. शाहजहांपुर थाना पुलिस को जब इस घटना की सूचना मिली तो पुलिसकर्मी अविलम्ब बैंक पहुंचे और उसके बाद ही स्थिति नियंत्रण में आई.

मैनेजर ने दिए दस हज़ार

पुलिस न भी पहुँचती तो भी शायद मामला सुलझ ही जाता क्योंकि अंत में बैंक मैनेजर ने अपनी तरफ से 10 हजार रुपये मृतक के गाँव वालों को दिए ताकि वे उसका अग्नि संस्कार कर सकें. इसके बाद गांव वाले महेश यादव का शव लेकर उसके अंतिम संस्कार हेतु श्मशान घाट के लिए रवाना हो गए.

एक लाख किसको मिलेंगे?

महेश यादव के बैंक खाते में एक लाख 18 हजार रुपये जमा हैं. पर अब समस्या ये है कि ये पैसे बैंक किसको सौंपे. उसने बैंक में खता खोलते समय किसी को अपना नॉमिनी नहीं बनाया था. इतना ही नहीं, महेश यादव ने अपना अनिवार्य केवाईसी भी नहीं करवाया था. उसकी मृत्यु पर उसके किसी परिजन के उपस्थित न होने का कारण ये था कि उसने शादी नहीं की थी और उसका कोई वारिस और सगा-संबंधी भी गाँव में नहीं रहता था.

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