Republic Day Violence: संयम के लिये दिल्ली पुलिस अभिनन्दन की अधिकारी है!

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कल की हिंसा के खिलाफ जिस तरह दिल्ली पुलिस ने धैर्य से काम लिया, वो अभिनन्दन योग्य है. हथियार हाथ में लिए तो कोई भी चला सकता है, वो कोई वीर नहीं होता. अगर ऐसे लोग वीर होते तो फिर सभी आतंकी वीर कहलाते मगर उन्हें कायर कहा जाता है.
दूसरी तरफ हाथ में हथियार लिए और उन्हें प्रयोग करने की शक्ति होते हुए जो पुलिस संयम बरत गई, असली वीर तो वो है. अमित शाह और मोदी कोई कमजोर नहीं हैं, कमजोर होते तो पाकिस्तान को उसके घर में जा कर मार कर न आते.
याद कीजिये, कश्मीरी अलगाववादी और उग्रवादी कांग्रेस राज में सरकारी दामाद बन कर रहते थे लेकिन आज उनकी सब सुविधाएं बंद हो गई, अनेकों की संपत्ति जब्त हो गई और जेल में पड़े हैं.
खैर छोड़िये, इन कामों की लिस्ट बहुत लम्बी है. बस इतना समझ लीजिये कि हम और आपकी सोच जहां ख़त्म होती है, मोदी की सोच उसके 1000 कदम दूर से शुरू होती है. उनके दाएं हाथ को पता नहीं होता कि बायां हाथ क्या कर रहा है और बाएं को पता नहीं होता कि दायां क्या कर रहा है. फिर हम कैसे अनुमान लगा सकते हैं उनकी सोच का.
कांग्रेस की चालाकी भरी सोच थी कि पुलिस गोली चलाएगी जिससे 20-25 किसान रूप में गुंडे मारे जायेंगे जिनमें0 अधिकांश सिक्ख हो सकते हैं और उससे कांग्रेस के दामन में लगे 1984 के दाग कुछ मिट जायेंगे.
मोदी ने सबका षड़यंत्र फेल कर दिया और अब अमरिंदर सिंह रुदाली बने हुए हैं कि ये हिंसा नहीं होनी चाहिए थी जबकि कांग्रेस और उनके साथी सिद्धू जी दंगाइयों के साथ खड़े हैं.
मोदी को शुरू से पता था कि ये कोई किसान आंदोलन नहीं है, देश के किसानों और इस आन्दोलन के किसानों में जमीन आसमान का फर्क है, मगर इस बात का उनको सबूत चाहिए था जिससे किसानों की आँखों से पट्टी हट सके –कल यही किया मोदी ने.
एक झटके में पुलिस के संयम के जरिये आंदोलन को छान कर रख दिया और खालिस्तानी विष निकाल कर अलग कर
दिया. इस मंथन में अमृत निकला ही नहीं, मतलब ये साबित कर दिया कि धरने पर बैठे लोग किसान नहीं हैं बल्कि
देश-विरोधी तत्व हैं जिन्हें एक दिन में दुनिया के सामने ला कर बेनकाब कर दिया.
इसलिए मोदी जो कर रहे हैं या करते हैं, उस पर विश्वास करके चलिए और देश के लिए उसका साथ देना जरूरी है. एक बार कल्पना कीजिये वो कितनी भीतरी और बाहरी ताकतों से वे एक साथ लड़ रहे हैं.
हम लोग भी अगर उसमे खोट निकाल कर उनके दुश्मनों में खड़े हो जायेंगे तो हम अपना ही नुकसान करेंगे क्यूंकि मोदी के शत्रु हमें भी छोड़ने वाले नहीं हैं.
मेरी सलाह है आप सभी मित्रों को, किसी विषय पर तात्कालिक प्रतिक्रिया मत दिया कीजिये –तात्कालिक प्रतिक्रिया तो कोई भी दे सकता था कल की हिंसा देख कर.
कोई भी कह सकता था कि पुलिस को गोली चलानी चाहिए थी मगर थोड़ा ठंड रख कर सोचने पर प्रतिक्रिया अलग होगी –क्रोध आने और क्रोध करने में एक क्षण का अंतर होता है –क्रोध आने पर जरा सा संयम मन को शांत करता है.
चलिए एक बात छोटी सी सोचिये कि जो आग हमारे दिल में लगी कल की हिंसा देख कर, वो क्या मोदी और शाह के दिल में नहीं लगी होगी ? ऐसी ही हमारे और उसके दिल में पुलवामा के बाद लगी थी, और अंजाम आपने देखा.
अब कनाडा के खालिस्तानियों और उनके आकाओं का भी हिसाब होगा, थोड़ा धैर्य रखिये, मत भूलिये कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ अनेक आतंकी जेलों में पड़े हैं -खालिस्तानी उनसे बड़े नहीं है.
कल आन्दोलन में शामिल खालिस्तानी तत्वों ने सिक्ख कौम पर फिर से बेवजह प्रश्नचिन्ह फिर से लगा दिया है और जो पंजाब के सिक्ख आज आंदोलन कर रहे हैं, वो लोग 1984 के सिक्खों के कत्लेआम पर खामोश थे और आज उन्ही के कातिलों के साथ खड़े हैं.
(सुभाष चन्द्र)
“मैं वंशज श्री राम का”
(उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं जिनसे न्यूज इन्डिया ग्लोबल की सहमति हो, यह आवश्यक नहीं है )

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