Diabetes से बच के रहना रे बाबा!

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दुनिया में एक बीमारी है जो कि कोरोना से भी कई गुना विकराल है उसे हम जानते हैं मधुमेह के नाम से. इसे शुगर भी कहते हैं क्योंकि ये शुगर की बीमारी है और खून में शुगर अर्थात चीनी की मात्रा बढ़ जाने से ये बीमारी हो जाती है जिसे डायबिटीज़ के नाम से जाना जाता है. कहते हैं कि मधुमेह मुहब्बत जैसी होती है एक बार हो गई तो फिर हो गई. ये आती तो है जाती नहीं है. लेकिन सच तो ये है कि जो बीमारी बिन बुलाये चली आये उससे बच के रहना चाहिए.

घर पर मुसीबत आ के बैठ जाए तो उससे क्या निजात पाइये, पहले ही उसको अपनेआप से दूर रखने का इंतज़ाम कर जाइये. जी हाँ कैसे करना है ये इंतज़ाम हम बताते हैं आपको पहले आप ये जान लीजिये कि इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं. तो सुन लीजिये ये दस शुरुआती लक्षण जिन्हें आपको अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये हो सकते हैं मधुमेह की चेतावनी के संकेत !

अगर आपको बहुत बार पेशाब के लिए जाना पड़ता हो, अगर आपको हमेशा प्यास लगी रहती हो, अगर आपको हर समय भूख लगी रहती हो, अगर अचानक आपका अप्रत्याशित रूप से वजन कम हो जाए, अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी हो जाये या आपकी नज़र में धुंधलापन आने लगे तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. ये आहट हो सकती है घातक क्योंकि ये आहट शुगर की हो सकती है.

ऐसे में सावधानी आपको क्या करनी चाहिए वो ये है कि सबसे पहली आप डॉक्टर के पास जा कर अपना शुगर चेक करा लें. और अगर शुगर बढ़ी हुई हो तो फिर आप डॉक्टर के कहे के मुताबिक़ सावधानियां अपनाएँ. वैसे मूल रूप से मधुमेह से बचने के लिए आपको पांच चीज़ों से बचना होगा. ये पांच cheezen हैं चीनी, चावल, आलू तेल और मैदा जो आपके दैनिक जीवन का नियमित हिस्सा है.

इन चीजो को एकदम से छोड़ना भी ठीक नहीं होगा इसलिए आप इनकी मात्रा कम से कम करते हुए धीरे धीरे इनको कम से कम कर देना होगा. लेकिन ये कार्य भी आपको डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए.

इसके अलावा मधुमेह से निपटने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में भी सुधार करना जरूरी है. सुबह जल्दी उठा कर भ्रमण करना और रोज़ाना स्नान के उपरान्त पंद्रह मिनट का व्यायाम करना होगा. सुबह शाम यदि प्राणायाम कर सकें तो अति उत्तम होगा. इसके अलावा रात्रि को जल्दी सो कर कम से आठ घंटे की नींद लेनी होगी ताकि आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मधुमेह का मुकाबला सफलता करके कर सके.

ऐसा करके आप प्राकृतिक ढंग से ही मधुमेह का स्वयं उपचार कर सकेंगे. और बेहतर भी यही होगा क्योंकि एक बार दवाइयों के जंजाल में फंस जाने के बाद उनसे मुक्ति और फिर इस बीमारी से मुक्ति सम्भव नहीं दिखती. वैसे भी कहा जाता है कि डायबिटीज़ को खत्म नहीं किया जा सकता इसको नियंत्रित किया जा सकता है.