digvijay singh: ‘सौ टंच खरा माल’ वाले दिग्गी राजा -तोल मोल के बोल !

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दिग्विजय सिंह जी, आपको आराम की सख्त जरूरत है -अपनी नई वाली श्रीमती जी से तो पूछ लीजिये- क्या वो भी मोदी से प्रभावित हैं ? हिन्दू कौन हैं, ये बताने की कोई योग्यता नहीं है आपकी.

ऐसी बात करेंगे तो लोग कहने लगेंगे कि राजनीति में दीमागी दिवालिया लोग भी हैं..और फिर इस बात का अर्थ आपके विरोधी ये लगा लेंगे कि दिग्विजय सिंह एक मानसिक रोगी हैं. वो ये भी कहेंगे कि इसी कारण दिग्विजय सिंह ने अपने एक बयान में कहा है कि प्रियंका वाढरा ने आपको “ज्ञान” दिया है जिसके अनुसार पैंट जींस पहनने वाली लड़कियां मोदी से प्रभावित नहीं है बल्कि 40 वर्ष से ऊपर की औरतें मोदी से ज्यादा प्रभावित हैं.

आपकी इन हरकतों पर लोग फिर आपको ये भी कह सकते हैं कि आप आखिर कितना गिरोगे दिग्विजय सिंह जी, मोदी को कोसने के लिए आप कितने नीचे गिर जाते हो, वो भी तब, जब मोदी जी आप जैसे लोगों की अनर्गल बकवास का जवाब नहीं देते.

अब एक बार प्रियंका से ही पूछ लो दिग्विजय जी, वो भी तो जीन्स छोड़ कर साड़ी पहन रही हैं और 49 वर्ष की हैं -वो क्यों मोदी से प्रभावित नहीं हैं?

अपनी घरवाली अमृता राय से भी पूछ लो जो आज 49 वर्ष की हैं कि कहीं वो भी तो मोदी से प्रभावित तो नहीं हैं ? उनकी शादी जब आपसे हुई थी, तब भी वो 43 वर्ष की थीं- मतलब मोदी से प्रभावित होने वाली उम्र में.

जिस मीनाक्षी नटराजन के लिए आपने भयंकर गलत शब्द बोले थे, वो भी आज 49 वर्ष की हैं –और सब को छोड़ो, आप तो ये बताओ- क्या सोनिया गाँधी भी मोदी से प्रभावित हैं?

श्रीमन दिग्विजय सिंह, आपने एक तरह सभी उम्र की महिलाओं पर भद्दी टिपण्णी की है जो कोई मानसिक रोगी ही कर सकता है –वैसे ये भी आपको बताना चाहिये कि- आपसे किस उम्र की महिलाएं प्रभावित हो रही हैं आजकल?

आप कहते हो कि लोग मेरी आलोचना करते हैं, मैं उन्हें कुछ नहीं कहता, उन्हें वापस लौटा दे देता हूँ –ये तो आपको और मुझे भी पता है कितने सहिष्णु हो आप जो मेरे जैसे लेखक-पत्रकार आदमी को सहन नहीं कर सके और ब्लॉक कर दिया -बस यही दे सकते हो क्या?

न जाने कहां से निकाल कर लाये हैं दिग्विजय सिंह, वीर सावरकर का बयान जिसमे कहा गया (ऐसा दिग्गी कह रहे हैं) कि हिन्दू शब्द का हिन्दुओं से कोई लेना देना नहीं है.

हिन्दू शब्द का अगर हिन्दुओं से कोई लेना देना नहीं है तो क्या इस्लाम या ईसायत से है? कभी विवेकानंद को भी सुन लिए होते दिग्विजय सिंह ये समझने के लिए कि वो हिन्दू और हिंदुत्व के लिए क्या कहते थे!

दिग्विजय सिंह ने एक किताब में वीर सावरकर की कथित बात का भी उल्लेख किया (किताब का नाम नहीं बताया) कि गाय जो अपने मल में लोट लेती है, तो उसका मांस खाना कोई गलत नहीं है –दिग्विजय कहते हैं बहुत हिन्दू गौमांस खाते हैं.

मैं नहीं जानता सावरकर ने ऐसा कभी कहा और अगर कहा भी तो किस सन्दर्भ में कहा -लेकिन ये बात भी सत्य है कि गौमांस खाने वाले भी कांग्रेस के ही हिन्दू मिलेंगे और नेहरू तो बड़े शौक से खाते थे – अब इस बात पर क्या कहोगे श्रीमान?

सावरकर को या तो कांग्रेस पूरी तरह नकारे या पूरी तरह स्वीकार करे, ये दोहरा मापदंड नहीं चलेगा कि सावरकर की कथित माफ़ी पर उसे कोसते रहो, पर नेहरू की नाभा जेल में मांगी माफ़ी पर खामोश हो जाओ.

दूसरी तरफ सावरकर की गाय और हिन्दू धर्म पर कथित टिपण्णी को स्वीकार कर लो क्यूंकि उससे आप अपना लक्ष्य साध सकते हो – “मीठा मीठा गप, कड़वा कड़वा थू” ये नहीं चल सकता.

और हां, अगर कुछ कहो तो साक्ष्य भी दो, वरना किसी दिन पार्टी से ही बाहर कर दिये जाओगे. वैसे भी आपकी पार्टी को डुबाने वाले बड़े नेताओं में एक बड़ा नाम आपका भी है.