एक अकेला Modi कैसे जीतेगा? अपने प्रधानसेवक के साथ खड़े होने का प्रण लीजिये!

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हम एक बहुत बड़े राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय षडयंत्र में फंस चुके हैं और इसके जिम्मेदार भी काफी हद तक हम खुद हैं,,
पिछले एक साल से हम कोरोना की मार झेल रहे हैं और हमने लगभग ये लड़ाई जीत ली थी फिर भी देश का एक वयोवृद्ध व्यक्ति जो अपने देश और देशवासियों से प्यार करता है, हर दिन एक ही बात कहता आ रहा कि अभी लड़ाई खत्म नहीं हुयी है और हमें अभी और ज्यादा सावधान रहना है. इसका कारण ये है कि उसे पता था कि क्या साजिश चल रही है और आगे क्या हो सकता है। उसने दिन रात एक कर दिया कि हम अपनी खुद की वैक्सीन जल्द से जल्द बना लें जिससे कि हम किसी के व्यापारिक और राजनीतिक हथकंडों में फंसने को मजबूर न हों।
लेकिन ये जो गिरोह है या सिंडीकेट है ये केवल हमारे देश तक सीमित है ऐसा समझने की भूल आप मत करना ये बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय लॉबी है जो बहुत शक्तिशाली है। पूरा मीडिया, बड़े बड़े बिज़नैस हाउस इनके समर्थन में हैं और इनके पास पैसा अकूत है क्योंकि बहुत से देशों से इनको फंडिंग की जाती है जिनमें सब भारत के बढ़ते कद से परेशान हैं।
पूरे विश्व कुछ गिने चुने नेता हैं जो इस सिंडीकेट के खिलाफ खुल कर खड़े होने की हिम्मत रखते हैं और उनमें भी सबसे ज्यादा ताकतवर व्यक्तित्व हमारे मोदी जी हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का शिकार इसी सिंडीकेट ने किया और किस तरह किया ये बताने की आवश्यकता नहीं है। अब इनका अगला टार्गेट मोदी है क्योंकि यही वो व्यक्ति है जो इस सिंडीकेट के विरुद्ध सबको एकजुट करने का माद्दा रखता है और कर भी रहा है। यही वो व्यक्ति है जो इनकी हर चाल और नीयत को भली भाँति जानता है और उसका तोड़ भी जानता है।
अब अपने देश की बात करते हैं। आज एक तरफ अकेला मोदी है जो किसी भी तरह से जी जान लगाकर अपने देशवासियों को बचाने की हर संभव कोशिश में लगा हुआ है। दूसरी तरफ एक पूरा ‘समूह’ है जिसमें कांग्रेस, सपा, बसपा, आपिये, वामपंथी, टुकड़े-टुकड़े गैंग, मीडिया, चाटुकार व्यापारी, कालाबाजारी करने वाले, खालिस्तानी, पाकिस्तान, चीन, अमरीका, इस्लामिक संगठन और भी बहुत से लोग शामिल हैं। ये ‘समूह’ भी भरसक प्रयास में लगा हुआ है कि कैसे भी ज्यादा से ज्यादा लोग मरें, मजदूर वर्ग में भगदड़ मच जाये, लोग एक एक चीज़ को मोहताज हो जायें और ये उन लाशों पर अपनी सत्ता का सिंहासन जमा सकें।
आप देखिए कि अस्पतालों को किस तरह से भर दिया गया है, ऑक्सीजन की सप्लाई को रोक दिया गया महाराष्ट्र और दिल्ली में। दिल्ली में तो चलते हुए ऑक्सीजन प्लांट बंद करवा दिये गये। दवाओं की जमाखोरी करवाई गई अपने एजेंटों से। और उसके बाद जैसा कि प्लान किया गया था एक ही समय पर एक साथ दो राज्यों के मुख्यमंत्री हल्ला मचाने लगते हैं बैड, ऑक्सीजन और वैक्सीन के लिए। पूरे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भरपूर पैसा बांटा गया है जिससे ये किल्लत का ड्रामा दिन भर चलता रहे और लोग भयाक्रांत हो कर इधर उधर भागने लगें। मीडिया ने देश में अफरा-तफरी का माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी क्योंकि पैसे ही उसके लिए मिले हैं। और एक भी चैनल या अखबार ने इन मुख्यमंत्रियों से सवाल नहीं पूछा।
सात सालों में ये मौका हाथ लगा है तो जो गिरोह टूट कर बिखरने की कगार पर था वो फिर से एकबार पूरी ताकत लगा रहा है कि किसी तरह से मोदी हट जाये। इनको तकलीफ मोदी से है न कि भाजपा के किसी और व्यक्ति से जो इनके लिए सॉफ्ट कॉर्नर रखता है।
बेईमानों के गांव में जब कोई ईमानदार थानेदार आ जाता है तो यही होता है।
एक व्यक्ति अकेला इन सब से लड़ रहा है और इसमें उसकी अपनी ही पार्टी के भी कुछ लोग शामिल हैं। क्या वो अपने लिए लड़ रहा है,, वो लड़ रहा है अपने देशवासियों के लिए।
तो क्या वो जीत पायेगा?? और जीतेगा तो कैसे??
आज जिस संकट में हम खड़े हैं उस संकट से निकलने में हमारा, हम देशवासियों का बहुत बड़ा सहयोग चाहिए। हमें समझना होगा कि कौन देश के साथ खड़ा है और कौन देश को संकट में डाल कर अपनी सत्ता की मलाई खाने के जुगाड़ में है।
आप देखिए कि वैक्सीन कंपनी के मालिक को धमकियां दी जा रही हैं कि वो वैक्सीन का उत्पादन रोक दे, रेल की पटरियां तोड़ी जा रही हैं जिससे कि अॉक्सीजन और दवाओं की सप्लाई रोकी जा सके, ऑक्सीजन के टैंकरों को गायब किया जा रहा है। अपने एजेंटों के द्वारा जमाखोरी करवाई जा रही है जिससे कि लोगों का इलाज ना हो और हर दिन हजारों लोग मरें।
और एक बात हमारे देश की तस्वीरों को अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को बेचा जा रहा है जिससे कि भारत की छवि खराब हो और जो विदेशी निवेश हमारे देश में आ रहा है वो रुक जाये। हमारी अर्थव्यवस्था धराशायी हो जाये। देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो जायें।
फर्जी खबरों, सोशल मीडिया पर फर्जी एकाउंट के द्वारा फेक प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है जिससे कि लोग सरकार के खिलाफ हो जायें।
इन सब को हम हरा सकते हैं,, हम मतलब हम हिंदू। ऐसा मैने क्यों कहा?? – इसलिए कि हम ही टार्गेट हैं। इसके लिए हमें अपना विवेक इस्तेमाल करते हुये सांपों की पहचान करनी होगी और ये समझ पैदा करनी होगी कि क्या सच्चाई है और क्या प्रोपेगैंडा है हम समझ सकें। और दूसरा एक पहलू है कि कुकुरमुत्तों की तरह उग आये भगवा में छिपे रंगे-सियारों को भी पहचानना होगा।
ये वक्त है कि हम पूरी ताकत से एकजुट हो कर अपने प्रधान सेवक के साथ खड़े रहें क्योंकि उस व्यक्ति की ताकत हम ही हैं। हमारी एकजुटता और हमारा सहयोग और नियमों का पालन ही मोदी की ताकत है। अगर हम इसमें चूक गये तो फिर कोई ना तो हमें बचा पायेगा, ना कोई और कभी खड़ा होगा हमारे लिए।
आज अगर हमने अपने नागरिक कर्तव्यों का सही से निर्वाह कर लिया तो आगे और भी लोग हैं जो हमारे लिए खड़े हैं। लेकिन ये तभी संभव है जब आज हम अपने नेतृत्व को समर्थन करें, उस पर भरोसा करें और उसको संबल प्रदान करें।
आइये हम सब प्रण करें कि संकट काल में हम बिना शर्त अपने प्रधान सेवक के साथ खड़े हैं और उसके हर प्रयास को हम अपनी सजगता और कर्तव्यपरायणता से सफल बनायेंगे!

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