एक युद्ध हम राष्ट्रवादी हमेशा हारते हैं!

देशविरोधी ताकतो के सामने हम हर बार जीत जाते है मगर एक युद्ध ऐसा है जो हम सदा हारते है और वो है सूचनाओ का युद्ध। यह युद्ध हम गद्दारों के कारण नही बल्कि अपने ही राष्ट्रवादियो की वजह से हारते है।
गलवान घाटी में चीन के साथ लड़ाई हुई, हमने कम से कम 40 चीनी मारे ये भारतीय इतिहास को गौरवान्वित करने वाला क्षण था। मगर हमने इसका उत्सव मनाकर भारतीयों को उत्साहित करने की जगह अपने 5 जवानों का शौक मनाया।
शास्त्रो में लिखा है कि वीर की मृत्यु पर रोना उसके बलिदान का अपमान है। हर भारत विरोधी ताकत का एक ही लघुकालीन लक्ष्य है कि किसी तरह भारत के लोगो का भरोसा अपनी सरकार, अपनी सेना और अपनी व्यवस्था से उठ जाए।
इन भारत विरोधी ताकतों का काम हमारे राष्ट्रवादी स्वयं आसान करते है। गलवान झड़प में हमने अपने वीरो की कोई गाथा नही गायी हम सिर्फ विधवा आलाप करते रहे मानो फिर से 1962 हो गया और हमने पूरा लद्दाख गवा दिया।
ठीक इसी तरह पाकिस्तान FATF की ग्रे लिस्ट में गया हमारे राष्ट्रवादियो ने इसे बिल्कुल मौसम के समाचारों की तरह लिया हमने प्रयास ही नही किया कि ट्विटर, लिंक्डइन के माध्यम से पाकिस्तान के चेहरे पर घात किया जाए। हमारा एक ही परम लक्ष्य है कि जब कुछ गलत हो तो पहले गर्म हो जाते है फिर फेसबुक पर भड़ास निकालकर कुछ लाइक कमेंट्स से आनंद की परम अनुभूति करते है।
यही चीजें देश को समय समय पर खाती आयी हैं। इस समय चीन की एक टेनिस खिलाड़ी गायब है क्योंकि उसने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता पर बलात्कार का आरोप लगाया। सेरेना विलियम्स, मारिया शारापोवा जैसी टेनिस स्टार उसके लिये आवाजे उठा रही हैं मगर भारत के 120 करोड़ नागरिक (शेष 15 करोड़ तो होकर भी यहाँ के नही है) ऐसे चुप हैं मानो चीन से कोई रिश्ता निभाना है।
2014 में मोदीजी जीते तब लगा राष्ट्रवादियो का विधवा विलाप अब बंद होगा उसके बाद 2019 में भी जीते मगर आज भी एक स्क्रॉल मारो तो 3 राष्ट्रवादी यह लिखते हुए मिलते हैं कि हिन्दुओ में एकता नही है, हिन्दू गुलामी के लिये बना है, हिन्दुओ के नसीब में कटना लिखा है। आखिर इन कायर तथाकथित राष्ट्रवादियो को ये अधिकार किसने दे दिया कि ये हमे हतोत्साहित करके देश के दुश्मनों की हिम्मत बढ़ाये।
ज्ञातव्य हो सोशल मीडिया अब सिर्फ आपके विचार रखने का मंच नही रहा यह एक युद्धभूमि बन चुका है जहाँ शत्रु के मन पर आघात किया जाता है। 2014 की क्रांति वही थी, मोदीजी की विजय बस हिन्दुओ के डर का परिणाम था हालांकि 2019 वे अपनी दम पर जीते।
मगर क्यों हम राष्ट्रवादियो के मन मे कभी ये नही आता कि हम चीन की ग्लोबल इमेज को क्षति पहुँचायें? क्यों हम राष्ट्रवादी कभी प्रयास नही करते कि पाकिस्तान FATF की ब्लैक लिस्ट में पहुँचे? यदि 2 लाख लोग भी पाकिस्तान की ब्लैक लिस्टिंग के लिये मेल लिख दें तो FATF आपके चरणों मे झुक जाएगा और हर हाल में पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करेगा।
आखिरकार कब तक हम लोग फेसबुक, लाइक और कमेंट्स की क्रांति से ही संतोष करेंगे कब तक???