West Bengal Polls 2021: ये है राष्ट्रीय चुनाव बंगाल का -जो करेगा फैसला घुसपैठियों के जंजाल का!

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव बीजेपी के नजरिये से भले ही प्रतिष्ठा का विषय हो, ममता बनर्जी के लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं अपितु अस्तित्व का प्रश्न है. दो मई को आने वाले चुनाव परिणामों में बीजेपी की अन-अप्रत्याशित विजय उसकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगा देगी, तो वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी और उनकी पार्टी का अस्तित्व तृण के मूल की भाँति ही समाप्तप्राय हो जायेगा क्योंकि ममता अगर बंगाल से बाहर हुई तो वो कहाँ जायेगी, बीजेपी तो वैसे भी देश के कई राज्यों में है और देश की सरकार भी चला रही है.

प्रथम चरण में जोरदार मतदान

West Bengal elections का पहला चरण सम्पन्न हो गया है और 30 विधानसभा सीटों पर वोटिंग हुई है. इस प्रथम चरण के मतदान के माध्यम से 73 लाख से अधिक मतदाताओं को 191 उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय करना था. अहम बात ये है कि इस चरण में वोटिंग काफी जोरदार हुई है अर्थात voting percentage काफी अच्छा रहा है. चुनाव आयोग के आंकड़ों की मानें तो प्रथम चरण में सुबह से लेकर शाम 5 बजे तक करीब 78 फीसदी मतदाताओं ने पोलिंग बूथ जाकर मतदान किया. कुल मतदान का प्रतिशत देखा जाए तो लगभग अस्सी प्रतिशत है जो चुनावी चुनौती के जबरदस्त होने की तरफ इशारा कर रहा है.

‘समर्पित’ मतदान है ये

ये बता रहा है कि दोनों तरफ से या एक तरफ से समर्पित मतदान हुआ है अर्थात पार्टी को जिताने के लिए बड़ी संख्या में लोग घर से निकल कर मतदान की लाइनों में लगे हैं. यद्यपि लोगों का कौतुहल इस बात पर अटका हुआ है कि इस जोरदार मतदान प्रतिशत से लाभ बीजेपी को होगा या ममता को? ममता के लोग मानते हैं कि ये वो कैडर वोट हैं जो आमजनों में जड़ें जमाये हुए हैं और ममता दीदी धमाकेदार जीत अर्जित करेंगी.

बंगाल में अब भगवा होबे

भारतीय जनता पार्टी के दृष्टिकोण से देखें तो भगवा झंडा फहरेगा बंगाल में और देश का एक और प्रमुख राज्य भाजपा शासित हो जाएगा. बीजेपी की इस सोच में अनुचित कुछ भी नहीं है क्योंकि राष्ट्रहित में लिए गए निर्णय अब इस बंग-विजय के बाद यहां भी लागू किये जा सकेंगे और प्रदेश को राष्ट्रवाद की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा. प्रदेश बीजेपी कार्यालय में उल्लास देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि ये विकास की विजय का संकेत है.

अब दीदी वाला खेला न होबे

किन्तु सबसे अहम है वह चिंता जो राष्ट्रीय चिंता है. यह राष्ट्रीय चिंता बीजेपी की भी एक प्रमुख चिंता है अर्थात पश्चिम बंगाल के रास्ते देश में घुसपैठ कर रहे बांग्लादेशियों को अब ढोया नहीं जाएगा और इस घुसपैठ के माध्यम से राजनीतिक हित साध रहे लोगों और राजनीतिक दलों को भी बख्शा नहीं जाएगा. पीएम मोदी के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है इसलिए बंगाल में राष्ट्रहित के विरुद्ध अब खेला न होबे !

वास्तविकता क्या है?

प्रदेश के चुनाव में प्रथम चरण में होने वाली इस बम्पर वोटिंग को देख कर एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि अब शेष सभी चरणों में भी जमकर मतदान होना है जो दोनों तरफ के लिए आशा की किरण बनता दर्शित हो रहा है. किन्तु इससे भी बड़ी वास्तविकता ये है कि प्रदेश चुनाव कम्युनल एलेक्शंस अर्थात साम्प्रदायिक चुनावों में बदल गए दिखाई दे रहे हैं. मुस्लिम सम्प्रदाय मोदी को रोकना चाहता है और इसलिए एकजुट हो कर ममता की पार्टी को जिताने के लिए कटिबद्ध है.

कांग्रेस है आउट ऑफ़ रेस 

इस कारण चिंता का विषय कांग्रेस और लेफ्ट पार्टीज के लिए चिंता पैदा हो गई है और कम्युनल वोटिंग से जीतने वाली ये पार्टियां अब अपनी जीत के लिए चमत्कार की अपेक्षा कर रही हैं. बीजेपी का आधार भी बहुत स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय होने के साथ साम्प्रदायिक भी हो गया है. मूल रूप से हिन्दू देश हिन्दुस्तान में राम का विरोध वैसे भी इस धरती के लोगों को स्वीकार नहीं हो सकता. ऐसे में बंगाल से ममता को जाना को होगा, राम नाम को वापस आना होगा और बंगभूमि पर भगवा को छाना होगा !!