पहली बार Nepal का China पर पलटवार – ‘हमारी घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप सहन नहीं होगा!’

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नई दिल्ली. चीन तो छोड़ दीजिये, दुनिया में किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि नेपाल चीन पर गुस्सा कर सकता है. जिस चीन की दम पर नेपाल भारत से जंग करने को तैयार होने लगा था अब वह चीन पर ही भड़क उठा है. ऐसा कैसे हो गया?

‘घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप कभी स्वीकार नहीं’

चीन को नेपाल का ये करारा जवाब मिला है – ‘घरेलू राजनीति में हम किसी का हस्तक्षेप कभी स्वीकार नहीं करते.’ चीन को ऐसा कहने की हिम्मत नेपाल में कहाँ से आई – यह विचारणीय विषय है. हाल ही में नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवली (Pradeep Kumar Gyavli) ने चीन के लिए दिए अपने संदेश में साफ़ कर दिया है कि -‘नेपाल अपनी घरेलू राजनीति में कभी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि नेपाल अपनी आंतरिक समस्याओं को संभालने में समर्थ है, उसे किसी की मदद की आवश्यकता नहीं.’

इस बयान के मायने भारत के लिए हैं

नेपाल की संसद भंग होने के बाद ज्ञवाली का यह बयान सामने आया है जिसकी पृष्ठभूमि में इस पड़ोसी देश में पैदा हुए राजनीतिक संकट में चीन का हस्तक्षेप करना है. दूसरे शब्दों में कहें तो चीन के हस्तक्षेप ने नेपाल को सावधान कर दिया है कि कहीं नेपाल भी हांगकांग या ताइवान न बन जाए. समय रहते चेत कर नेपाल ने चेताया है चीन को कि बाहर से ही बात करें, अंदर दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. भारत के लिए मैत्री का यह परोक्ष संदेश है जिसकी शुरुआत अब होने ही वाली है.

भारत दौरे पर आये ज्ञवली

तीन दिनों के भारत दौरे के खात्मे पर ज्ञवली ने यह बयान दिया है. ज्ञवली ने चीन के लिए अपना संदेश बिलकुल ही साफ़ कर दिया और कहा कि सीमा संबंधी समस्या के समाधान के लिए नयी दिल्ली और काठमांडू (Kathmandu) की साझा प्रतिबद्धता है और दोनों पक्ष इसके निराकरण के तरीकों पर चिंतन कर रहे हैं. पिछले शुक्रवार 15 जनवरी को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से बातचीत की थी.

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