कश्मीर में सरकार की एडवाइज़री को ‘चेतावनी का चोला’ पहनाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस, अतिरिक्त फोर्स की तैनाती को बताया चिंताजनक

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जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि कश्मीर में किसी को डरने की जरुरत नहीं है. उन्होंने कहा कि आंतकी हमले के खतरे की वजह से सरकार ने एडवाइज़री जारी की है जिसकी वजह से अमरनाथ यात्रा को रोकना पड़ा है और पर्यटकों को वापस भेजने को कहा है.

दरअसल, शुक्रवार को सरकार की तरफ से एडवाइज़री जारी होने के बाद घाटी में अफरा-तफरी मच गई थी. लोग किसी आशंका के चलते पेट्रोल पंप, राशन की दुकानों और एटीएम की कतारों में उमड़ना शुरू हो गए. जिसके बाद घाटी के सियासी हालात में भी उथल-पुथल मची और घाटी के सियासी दलों ने एक आपात बैठक बुलाई जिसमें पीडीपी, नेशनल कान्फ्रेंस, कांग्रेस और दूसरे दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. पीडीपी और नेशनल कान्फ्रेंस ने सरकार पर एक तरफ एडवाइज़री तो दूसरी तरफ सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए. अब कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि  कश्मीर और लद्दाख के लोग गृह मंत्रालय की एडवाइजरी के बाद काफी डरे हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे हालात तो तब घाटी में नहीं हुए थे जब आतंक चरम पर था.

बड़ा सवाल ये है कि सुरक्षा बलों की तैनाती की वजह से वो लोग कौन हैं जो घाटी में डर रहे हैं और उनके डरने की क्या वजह है? क्या घाटी का आम शख्स खुद को भारत का नागरिक नहीं समझता? वो कौन लोग हैं जो घाटी में आतंकी हमलों को जवाब देने के लिए अपनी जानी की बाज़ी लगाने वाले सुरक्षा बलों के जवानों से डर रहे है?  इसी सोच से घाटी के हैरतअंगेज हालात को समझा जा सकता है कि किस तरह से पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती, नेशनल कान्फ्रेंस नेता उमर अबदुल्ला और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद मिल कर सेना की तैनाती पर शोर मचा रहे हैं. क्या अपने ही मुल्क में सशस्त्र बलों की तैनाती को लेकर सेना, गृह मंत्रालय और पीएमओ को राजनीतिक पार्टियों की इजाज़त लेनी पड़ेगी?

हैरान करने वाली बात ये है कि आतंकी हमलों के खुफिया इनपुट मिलने के बाद एडवाइज़री जारी हुई और अमरनाथ यात्रा को रोका गया तो इसे सशस्त्र बलों की तैनाती और आर्टिकल 35 ए से भी जोड़ा जाने लगा. क्या हिंदुस्तान और हिंदुस्तान की अवाम की सुरक्षा से बढ़कर कोई ऐसा अस्थाई कानून है जिसके तहत मुल्क की सुरक्षा या फिर हालात खतरे में घिरे रहें?   

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद कह रहे हैं कि कश्मीर में जो हो रहा है  वह हम सभी के लिए बेहद चिंताजनक है. वो कह रहे हैं कि पहले कभी भी न तो वाजपेयी जी के वक्त और न ही मनमोहन सरकार के वक्त अमरनाथ यात्रा को इस तरह से रोका गया. लेकिन आज़ाद ये भूल रहे हैं कि अब भारत की रणनीति आतंक के मुद्दे पर ज़ीरो टॉलरेंस की है. ऐसे में अब पाकिस्तान या फिर अलगावादियों को कोई दूसरा मौका देने की चूक नहीं की जा सकती.

आज़ाद ये भी कह रहे हैं कि इस वक्त घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात करना चिंताजनक है. आजाद पहले तो ये बताएं कि वो सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं या फिर सशस्त्र बलों की मुल्क के प्रति आस्था और समर्पण पर सवाल उठा रहे हैं?

गुलाम नबी आज़ाद ने ये भी कहा कि 35ए को समाप्त करना राजनीति से प्रेरित है और कश्मीर में 35ए हटने से बीजेपी को वोट मिलेगा. आज़ाद के बयान से ये समझा जा सकता है कि आर्टिकल 35 ए के बीजेपी के लिए क्या मायने हैं. लेकिन विपक्ष में सिमट कर बैठने वाली देश की कभी सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस को अकल कब आएगी कि जिस वजह से उसके वोट कटे हैं वो ही गलती कांग्रेस कब तक दोहराती रहेगी. अगर कश्मीर में 35 ए हटने पर बीजेपी को वोट मिलता है तो कांग्रेस ने ऐसे हालात ही क्यों पैदा होने दिए कि देश के किसी राज्य में एक अस्थाई कानून एक दिन मजबूरी बन कर रह गया.

घाटी में राजनीति जारी है और राजनीतिक बयानों की वजह से ही अफवाहों का दौर भी जारी है.
सरकार की एडवाइज़री को चेतावनी का चोला पहनाने की कोशिश करने वाले सियासी दल ट्वीट पर ट्वीट कर घाटी में हलचल मचा रहे हैं. एडवाइज़री जारी होने के बाद कश्मीर में ‘कुछ बड़ा’ होने की आशंका के चलते पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती, जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के प्रमुख शाह फैसल और पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की. राज्यपाल मलिक ने इनको बताया कि सुरक्षा एजेंसियों के पास अमरनाथ यात्रा पर आतंकवादी हमलों के संबंध में गंभीर और विश्वसनीय सूचनाएं हैं. ऐसे में अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा के लिहाज से उठाए गए कदमों को दूसरे मुद्दों से न जोड़ा जाए.

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