Hariyali Teej: हरियाली तीज के व्रत से घर में आती है खुशहाली

हमारे हिंदू धर्म में त्यौहार वर्ष के बारहों महीने होते हैं.  संसार में कहीं और इतने उत्सव और त्यौहार नही मनाये जाते जितना हमारे भारतवर्ष  में.  रंग-बिरंगे  इन पर्वों की छटा और महत्व भी भिन्न-भिन्न है. इन्हीं में से एक पर्व है हरियाली तीज जो श्रावण मास की तृतीया तिथि के शुक्ल पक्ष को मनायी जाती है.
सावन का महीना होने के कारण इसे श्रावणी तीज के नाम से भी जाना चाहता है. यूँ तो सावन के पूरे महीने भगवान शिव संग माता पार्वती के पूजन का विधान है. इस पावन महीने में लोग विधिवत पूजन और व्रत करते हैं तथा तामसी भोजन का त्याग और सात्विक भोजन करते हैं. यह उत्सव अधिकांशत: पूरे उत्तर भारत में मनाया में मनाया जाता है.

हरियाली तीज  क्यों मानते हैं? 

हरियाली तीज को कज्जली तीज भी कहा जाता है. इस वर्ष हरियाली तीज 11 अगस्त यानी आज है. इस दिन महिलायें व्रत व पूजन करती है शिव और पार्वती का. ये व्रत सुहागनें अपने पति की लंबी आयु और संतान प्राप्ति के लिये रखती हैं.  कुंवारी  कन्याएँ ये व्रत व पूजन मनपसंद वर प्राप्ति  हेतु करती हैं.

माँ भवानी की प्रसन्नता का दिन है ये

हरियाली तीज मनाने के पीछे एक पौराणिक आख्यान भी प्रचलित है जिसके अनुसार यह दिन विशेष महत्वपूर्ण इसलिये है कि अन्नपूर्णा जगदंबा माँ का अपने पति भगवान शिव शंकर से पुनर्मिलन हुआ था.  इसी कारण महिलायें हरियाली तीज का पूजन और व्रत करती हैं. कुँवारी कन्याएँ भी हरियाली तीज पर्व पर व्रत रखती हैं औऱ अपने भावी वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने की कामना करती हैं.

हरियाली तीज  पर पौराणिक आख्यान 

हरियाली तीज मनाने के संदर्भ में शास्त्रों में बताया गया है कि माता पार्वती ने शिव जी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए एक सो सात जन्म लिये थे. शिव इसके लिये उन्होंने कठोर व घोर तपस्या की परन्तु भगवान शिव तपस्या में ही लीन रहे. भोलेनाथ के हृदय में तब भी  मोह उत्पन्न न हुआ. फिर माता पार्वती ने 108वें जन्म में घोर तपस्या की. अंतत: भगवान शिव प्रकट हुए.इस तरह शिव-पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ. इसीलिए श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज को विशेष रूप से दाम्पत्य सुख-संपदा का  शुभ उत्सव माना जाता है. वैसे भी सुखी दाम्पत्य सुंदर गृहस्थ जीवन का आधार है.

हरियाली तीज पर पूजन व व्रत का विधान

इस दिन सुहागनें और कुँवारी  कन्याएँ निर्जला व्रत रखती हैं. अन्न-जल ग्रहण नही करतीं.  दूसरे दिन सवेरे स्नान और पूजन के पश्चात व्रत पूर्ण माना जाता है तदोपरान्त वे अन्न ग्रहण कर सकती हैं. ये व्रत करवा-चौथ के व्रत से भी अधिक कठिन होता है.  पूरे दिन निराहार रहकर स्त्रियाँ पूरे नियम और शुद्धता से शिव-पार्वती का पूजन करती हैं. विधिपूर्वक पूजन और व्रत करने पर अखंड सुहागन होने का दान व इच्छुक सुहागनों को संतान फल की प्राप्ति भी होती हैं.  कुँवारियों को मनचाहा वर मिलता है. उनके विवाह में आने वाली विध्न-बाधाओं का नाश हो जाता है.

सुहागनेंं करती हैं सोलह-श्रृंगार

इस दिन सुहागनों के मायके से सोलह-श्रृंगार का सामान भेजा जाता है. मूलत: हरियाली तीज सौभाग्य से जुड़ा है. इसे करके स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का फल मिलता है ऐसा कहा जाता  है. सौभाग्य, श्रृंगार, अच्छे स्वास्थ्य और शांति के लिए इस दिन हरे रंग का विशेष महत्व है. लड़कियाँ और सुहागनें हरे वस्त्र, हरी चूड़ियाँ पहनती हैं.  मान्यता है कि हरे रंग की चूड़ियाँ पहनने से  पति दीर्घायु  और स्वास्थ्य अच्छा  रहता  है तथा घर में हर्षोल्लास बना रहता है. यही कारण है कि हरियाली तीज के दिन सुहागने को हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं. हरियाली तीज पर मायके से आई श्रृंगार  की वस्तुओं का उपयोग करने की परंपरा जो होती है. हरियाली तीज व्रतसे पहले माता-पिता अपनी विवाहिता बेटी को साड़ी, साज-श्रृंगार का सामान, फल-मिठाईयाँ भेजते हैं. इस लिए यह आवश्यक है कि स्त्रियों अपने मायके से आये सामान का उपयोग पूजन और व्रत में करें तथा व्रत के दौरान  सांयकाल में इसकी कथा सुने. तभी यह व्रत पूर्ण माना जाता है. हरियाली तीज को पार्वती माता से जु़ड़े गीत और कथाओं को पढ़ना-गाना व सुनना लाभवर्द्धक होता है कहा जाता है कि ऐसा करने से इससे माता पार्वती प्रसन्न होती हैं और मनचाहा फल मिलता है.

हरियाली तीज पर क्या करना वर्जित है? 

यूँ तो किसी दिन भी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए परन्तु इस दिन विशेष रूप से ये ध्यान रखना होगा कि परिवार में और बाहर भी लड़ाई-झगड़े से बचें और मन में नकारात्मक विचारों को न आने दें. अपने जीवन साथी  और घर के बाकी  सदस्यों  के साथ  मिल-जुलकर हर्षोल्लास के साथ तीज का त्यौहार नमामि.  ऐसा करने से पति परआने वाले सभी संकटों का दमन होता है. हरियाली तीज में लाल,-पीले,हरे और रंगबिरंगे वस्त्र पहने. काले और सफेद कपड़े कदापि न पहनें. इससे जीवन में अशुभ होने की आशंका हो सकती है. हरियाली तीज व्रत निर्जला ही करना चाहिये अन्यथा व्रत फलदायी नही होता.

हरियाली तीज के शुभ मुहूर्त 

इस वर्ष  हरियाली तीज का शुभ मुहूर्त  10 अगस्त की  तृतीया तिथि में सांय 6 बज कर 6 मिनट से अगलेदिन 11 अगस्त को शाम 4 बज कर 54 मिनट तक है. पूजा करने का समय सवेरे 4.25(am) बजे से लेकर 5.17 (pm) बजे तक रहेगा. मुहूर्त का दूसरा समय दोपहर 2.30 बजे (pm) से 3.07(pm) बजे तक होगा.